दुनिया 31 अक्टूबर को हैलोवीन धूमधाम से मनाती है. क्या यह सिर्फ मस्ती का दिन है या इसका अंधेरे रीति रिवाजों से नाता है आइए जानते हैं इसका असली इतिहास
हर साल 31 अक्टूबर को हैलोवीन सेलिब्रेट किया जाता है. घर भूतिया सजावट से भर जाते हैं और बच्चे ट्रिक ऑर ट्रीट के लिए निकलते हैं
करीब 2,000 साल पहले यह त्योहार गर्मियों के अंत और सर्दियों की शुरुआत का संकेत था. माना जाता था कि इस रात आत्माएं वापस धरती पर आती हैं
लोग आत्माओं से बचने के लिए डरावने कपड़े और मास्क पहनते थे. यही परंपरा आगे चलकर आज के हैलोवीन कॉस्ट्यूम बन गई
आठवीं सदी में 1 नवंबर को ऑल सेंट्स डे घोषित किया गया. इसके पहले दिन को ऑल हैलोज ईव कहा गया जो बाद में हैलोवीन बन गया
19वीं सदी में यूरोपीय लोग यह परंपरा अमेरिका लेकर आए. यहीं से ट्रिक ऑर ट्रीट और मॉडर्न हैलोवीन कल्चर शुरू हुआ
कुछ धर्म इसे शैतानी परंपरा मानते हैं. आज के दौर में यह डर से ज्यादा क्रिएटिविटी, फन और कम्युनिटी का सेलिब्रेशन बन चुका है