गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर और फतेह सिंह की शहादत की स्मृति में हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है।
बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह ने कम उम्र में ही धर्म, साहस और निडरता की शिक्षा पिता से पाई।
मुगल शासन के समय जबरन धर्मांतरण और अत्याचार के बीच साहिबजादों ने धर्म पर अडिग रहने का संकल्प लिया।
गुरु परिवार के पुराने सेवक गंगू के विश्वासघात से माता गुजरी और दोनों साहिबजादों को सरहिंद ले जाया गया।
कम उम्र के साहिबजादों ने मुगल नवाब की धमकियों और लालच को ठुकराते हुए धर्म न बदलने का निश्चय किया।
साहिबजादों को दीवार में जीवित चुनवा दिया गया, लेकिन उन्होंने साहस और विश्वास बनाए रखा और शहीद हुए।
26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाकर बच्चों और युवाओं में साहस, धर्मनिष्ठा और सत्य के लिए खड़े होने का संदेश दिया जाता है।