वीर बाल दिवस 2025: साहिबजादों का अद्वितीय बलिदान और निडरता

गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर और फतेह सिंह की शहादत की स्मृति में हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है।

साहिबजादों का जन्म और परिवार

बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह ने कम उम्र में ही धर्म, साहस और निडरता की शिक्षा पिता से पाई।

धर्म और अत्याचार का संघर्ष

मुगल शासन के समय जबरन धर्मांतरण और अत्याचार के बीच साहिबजादों ने धर्म पर अडिग रहने का संकल्प लिया।

गिरफ़्तारी और विश्वासघात

गुरु परिवार के पुराने सेवक गंगू के विश्वासघात से माता गुजरी और दोनों साहिबजादों को सरहिंद ले जाया गया।

अडिग साहस और धर्मनिष्ठा

कम उम्र के साहिबजादों ने मुगल नवाब की धमकियों और लालच को ठुकराते हुए धर्म न बदलने का निश्चय किया।

शहादत की अमानवीय परीक्षा

साहिबजादों को दीवार में जीवित चुनवा दिया गया, लेकिन उन्होंने साहस और विश्वास बनाए रखा और शहीद हुए।

वीर बाल दिवस का महत्व

26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाकर बच्चों और युवाओं में साहस, धर्मनिष्ठा और सत्य के लिए खड़े होने का संदेश दिया जाता है।

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