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बजट सत्र 2025 ने रचा इतिहास, संसद से पारित हुए 16 अहम विधेयक, वक्फ बिल पर रिकॉर्ड बहस

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संसद का 2025 का बजट सत्र ऐतिहासिक रहा। करीब दो महीने तक चले इस सत्र में संसद ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कर देश के शासन तंत्र में अहम बदलाव की नींव रखी। वक्फ (संशोधन) विधेयक-2025 समेत कुल 16 विधेयक दोनों सदनों से पारित हुए।

नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया, जिसकी शुरुआत 31 जनवरी को हुई थी। इस सत्र के दौरान कुल 16 विधेयकों को पारित किया गया, जिनमें वक्फ संशोधन विधेयक भी शामिल है। संसदीय कार्य मंत्रालय के अनुसार, इस बजट सत्र में लोकसभा की उत्पादकता 118 प्रतिशत और राज्यसभा की 119 प्रतिशत रही। सत्र के समापन पर केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उनके साथ विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल तथा सूचना एवं प्रसारण व संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन भी मौजूद थे।

31 जनवरी से शुरू हुआ सत्र, कुल 26 बैठकें

सत्र की शुरुआत 31 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 87(1) के तहत यह संबोधन संसद के पहले सत्र का हिस्सा होता है। इस बजट सत्र में कुल 26 बैठकें हुईं, जिसमें पहले चरण में 9 और दूसरे चरण में 17 बैठकें शामिल थीं।

लोकसभा-राज्यसभा की उत्पादकता रही प्रभावशाली

संसदीय कार्य मंत्रालय के अनुसार, लोकसभा की उत्पादकता 118% और राज्यसभा की 119% दर्ज की गई। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में 173 सदस्यों ने भाग लिया और 17 घंटे 23 मिनट तक चर्चा चली। राज्यसभा में यह बहस 21 घंटे 46 मिनट तक चली और 73 सदस्यों ने इसमें भागीदारी की।

वक्फ (संशोधन) विधेयक बना बहस का केंद्र

वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन और कानूनी सुधार को लेकर लाया गया वक्फ संशोधन विधेयक-2025 इस सत्र की सबसे चर्चित विधेयकों में से रहा। इस विधेयक ने न केवल बहस का रिकॉर्ड बनाया, बल्कि इसके जरिए मुसलमान वक्फ अधिनियम-1923 को भी निरस्त कर दिया गया। विधेयक का मकसद वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण, पंजीकरण और विवादों के समाधान को सरल और पारदर्शी बनाना है।

अन्य महत्वपूर्ण विधेयक जो पारित हुए

१. आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक-2025: इस विधेयक के ज़रिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को और अधिक अधिकार दिए जाएंगे और उनकी भूमिकाएं स्पष्ट होंगी।
२. त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक-2025: यह नया विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र के विकास, प्रशिक्षण और अनुसंधान को प्रोत्साहन देगा। इसमें ई-लर्निंग और डिग्री प्रोग्राम्स भी उपलब्ध होंगे।
३. बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक-2025: इस विधेयक से बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और नियामकीय ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाए गए हैं।
४. आव्रजन और विदेशी विधेयक-2025: यह कानून आव्रजन नीतियों को सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

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