बिहार में पुनपुन नदी ने थामी रेल की रफ्तार: 10 MEMU ट्रेनें रद, कई गाड़ियों के बदले रूट

पुनपुन नदी का जलस्तर बढ़ने से पटना-गया रेलखंड प्रभावित हुआ। 10 MEMU ट्रेनें रद की गईं, जबकि कई ट्रेनों को बदले रूट से चलाया गया
बिहार में पुनपुन नदी ने थामी रेल की रफ्तार: 10 MEMU ट्रेनें रद, कई गाड़ियों के बदले रूट
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रेलवे की ओर से यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए लिया गया है। पुनपुन नदी में पानी बढ़ने के साथ पुल और ट्रैक की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक पुनपुन घाट और परसा बाजार के बीच स्थित पुल संख्या-21 पर जलस्तर बढ़ने के कारण डाउन लाइन को बंद किया गया है। फिलहाल इस रेलखंड पर अप लाइन के माध्यम से परिचालन को नियंत्रित तरीके से जारी रखने की कोशिश की जा रही है। जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में रेलवे को परिचालन को लेकर आगे भी अतिरिक्त निर्णय लेना पड़ सकता है।

सोमवार को रद्द की गई MEMU ट्रेनों में गया-पटना और पटना-गया के अलावा पटना-राजगीर के बीच चलने वाली ट्रेन भी शामिल है। रेलवे के अनुसार 63242 गया-पटना MEMU, 63244 गया-पटना MEMU, 63245 पटना-गया MEMU, 63247 पटना-गया MEMU, 63248 गया-पटना MEMU, 63250 गया-पटना MEMU, 63251 पटना-गया MEMU, 63253 पटना-गया MEMU, 63256 गया-पटना MEMU और 63274 पटना-राजगीर MEMU को रद्द रखा गया है।

इन ट्रेनों के रद्द होने का सीधा असर रोजाना ट्रेन से पटना, गया और आसपास के क्षेत्रों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ा है। MEMU ट्रेनें इस रेलखंड पर बड़ी संख्या में दैनिक यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साधन हैं। छात्र, नौकरीपेशा लोग, छोटे कारोबारी और दूसरे जरूरी कामों से यात्रा करने वाले लोग इन ट्रेनों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अचानक ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।

रविवार को भी ट्रेनों के रद्द रहने के कारण पटना जंक्शन पर यात्रियों की भीड़ देखी गई थी। कई यात्रियों को ट्रेन सेवा बाधित होने के बाद सड़क मार्ग से अपनी यात्रा पूरी करनी पड़ी। पटना और गया के बीच नियमित आवाजाही करने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति खास तौर पर परेशानी वाली है, क्योंकि कम दूरी के सफर में MEMU ट्रेनों को अपेक्षाकृत सुविधाजनक और किफायती विकल्प माना जाता है।

पुनपुन नदी का जलस्तर बढ़ने का असर केवल स्थानीय यातायात तक सीमित नहीं है। रेलवे ने इस स्थिति को देखते हुए कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन में भी बदलाव किया है। रिपोर्ट के मुताबिक 18625 पूर्णिया कोर्ट-पटना-हटिया एक्सप्रेस और 18626 हटिया-पटना-पूर्णिया कोर्ट एक्सप्रेस का मार्ग परिवर्तित किया गया है। यात्रियों को इन ट्रेनों की वास्तविक स्थिति और बदले हुए मार्ग की जानकारी यात्रा से पहले रेलवे से प्राप्त करने की सलाह दी गई है।

रेलवे अधिकारियों के लिए इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता पुल और ट्रैक की सुरक्षा है। पानी बढ़ने की स्थिति में रेल पुल पर दबाव और ट्रैक की स्थिरता को लेकर जोखिम पैदा हो सकता है। इसलिए सामान्य परिचालन को जारी रखने की बजाय पहले संरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी माना जाता है। इसी वजह से डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन रोककर स्थिति की निगरानी की जा रही है।

बताया गया है कि पुनपुन पुल के आसपास जलस्तर लगातार बढ़ता रहा है। पहले पानी डाउन लाइन के गार्डर तक पहुंचा और बाद में जलस्तर गार्डर से ऊपर पहुंच गया। ऐसे हालात में रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। टीम पुल और ट्रैक की स्थिति का निरीक्षण कर रही है और जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर रखी जा रही है।

बिहार में इस समय कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और बाढ़ की स्थिति ने कई जिलों में जनजीवन प्रभावित किया है। गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक और पुनपुन समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रही हैं। ऐसे में सड़क और रेल दोनों परिवहन व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है।

पटना-गया रेलखंड की स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिहार के दो प्रमुख शहरों को जोड़ने वाला व्यस्त रेल मार्ग है। इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। गया से पटना आने वाले यात्रियों के लिए MEMU ट्रेनें रोजमर्रा की यात्रा का अहम साधन हैं। ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों को बस, निजी वाहन या दूसरे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे अतिरिक्त समय और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं।

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे स्टेशन के लिए घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें। मौजूदा स्थिति में ट्रेन रद्द होने या मार्ग बदलने की संभावना को देखते हुए बिना जानकारी के स्टेशन पहुंचना परेशानी का कारण बन सकता है। खासकर उन यात्रियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है जिन्हें लंबी दूरी की ट्रेन पकड़ने के लिए पटना या गया पहुंचना है।

पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर ने यह भी दिखा दिया है कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक स्थिति का असर केवल नदी किनारे रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहता। जब जलस्तर रेल पुल और ट्रैक तक पहुंचता है तो हजारों यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। एक पुल की सुरक्षा को लेकर उठाया गया एहतियाती कदम पूरे रेलखंड के परिचालन पर असर डाल सकता है।

फिलहाल रेलवे की नजर पुनपुन नदी के जलस्तर पर बनी हुई है। अगर पानी कम होता है और पुल तथा ट्रैक की सुरक्षा को लेकर इंजीनियरिंग विभाग से हरी झंडी मिलती है, तभी बंद की गई लाइन पर सामान्य परिचालन बहाल किया जा सकेगा। जब तक स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नहीं होती, तब तक यात्रियों को ट्रेनों के रद्द या डायवर्ट होने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

रेलवे की ओर से ट्रेनों के रूट में बदलाव का उद्देश्य भी यही है कि जहां संभव हो, यात्रियों की आवाजाही को वैकल्पिक रेल मार्ग से जारी रखा जा सके। हालांकि वैकल्पिक मार्ग अपनाने से ट्रेन के समय में बदलाव और यात्रा अवधि बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए यात्रियों को केवल ट्रेन के नंबर की जानकारी ही नहीं, बल्कि उसके निर्धारित मार्ग और संशोधित समय की भी पुष्टि करनी चाहिए।

इस बीच बाढ़ के कारण बिहार के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन पहले से प्रभावित है। कई निचले इलाकों में पानी पहुंचने से सड़क संपर्क बाधित हुआ है और लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। ऐसे समय में रेल सेवा भी प्रभावित होने से उन लोगों की मुश्किल बढ़ गई है जो रोजाना रोजगार, पढ़ाई या दूसरे जरूरी कामों के लिए पटना और गया के बीच यात्रा करते हैं।

पुनपुन नदी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे यात्रा से पहले ताजा अपडेट जरूर लें। 7 सितंबर को 10 MEMU ट्रेनों के रद्द रहने की जानकारी सामने आई है और कुछ ट्रेनों के मार्ग में भी बदलाव किया गया है। जलस्तर की स्थिति बदलने पर रेलवे की ओर से आगे भी नए निर्णय लिए जा सकते हैं।

फिलहाल पटना-गया रेलखंड पर सामान्य रेल परिचालन बाढ़ के पानी के कारण प्रभावित है। पुनपुन नदी का बढ़ता जलस्तर रेलवे के लिए सुरक्षा चुनौती बना हुआ है। 10 MEMU ट्रेनों को रद्द करने और दूसरी ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाने का फैसला यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। अब सबकी नजर पुनपुन नदी के जलस्तर पर है। पानी घटने और पुल की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही रेल सेवा को पूरी तरह सामान्य किए जाने की उम्मीद है।

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