1 जनवरी से Mexico का नया टैरिफ, भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा झटका; जानें कौनसे साधन होंगे प्रभावित

मेक्सिको 1,400+ उत्पादों पर 1 जनवरी से 5-50% टैरिफ लागू करेगा। भारतीय निर्यातकों के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन और इंजीनियरिंग वस्तुएं प्रभावित होंगी।

मेक्सिको ने 1 जनवरी 2026 से 1,400+ उत्पादों पर 5-50% टैरिफ लगाने की घोषणा की। इससे भारतीय निर्यातक विशेषकर वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में चुनौतियों का सामना करेंगे।

Mexico Tariff: मेक्सिको सरकार ने भारत सहित कुछ एशियाई देशों के निर्यात पर 1,400 से अधिक उत्पादों पर 5 से 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। यह नया टैरिफ 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। अमेरिकी बाजार में पहले से ऊंचे शुल्क का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों के लिए यह कदम एक और चुनौती साबित होगा।

सरकार और व्यापारिक संगठन इस मामले पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। निर्यातक समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह शुल्क वृद्धि मुख्य रूप से चीन को निशाना बनाने के लिए है। अमेरिका में चर्चा हुई थी कि चीन मेक्सिको के जरिए अमेरिकी बाजार में अपनी वस्तुएं भेज रहा है, जिससे अमेरिकी व्यापार को असर पड़ रहा है।

कौन-कौन से उत्पाद प्रभावित होंगे

मेक्सिको द्वारा लगाए जाने वाले शुल्क से इलेक्ट्रॉनिक्स, परिधान, रसायन, इंजीनियरिंग वस्तुएं, वाहन और धातुएं सबसे अधिक प्रभावित होंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम घरेलू उद्योग की सुरक्षा और विदेशी प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित करने के मकसद से उठाया गया है।

निर्यातकों के संगठन FIEO के महानिदेशक और CEO अजय सहाय ने कहा कि यह निर्णय गलत समय पर आया है। उन्होंने बताया कि भारतीय उद्योग अभी अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्क से जूझ रहे हैं और अब मेक्सिको भी भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगा रहा है।

सहाय ने उम्मीद जताई कि अगर भारत और मेक्सिको के बीच कोई व्यापार समझौता होता है, तो शुल्क में राहत मिल सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि उच्च शुल्क केवल उन देशों पर लगाया जाएगा जिनके पास मेक्सिको के साथ कोई व्यापार समझौता नहीं है।

भारत से मेक्सिको का निर्यात और प्रभाव

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल निर्यात में मेक्सिको का हिस्सा केवल 1.3 प्रतिशत था, जो 5.75 अरब डॉलर के करीब है। इस निर्यात में सबसे अधिक योगदान इंजीनियरिंग वस्तुओं का है, जो लगभग 3.5 अरब डॉलर के मूल्य का निर्यात करते हैं।

मेक्सिको को होने वाले निर्यात में एक तिहाई हिस्सा वाहन और उनके कलपुर्जों का है। शुल्क वृद्धि से मारुति सुजूकी, फोक्सवैगन ग्रुप, ह्युंडै मोटर इंडिया और निसान सहित अन्य कार निर्माता प्रभावित होंगे। कारों पर शुल्क 20 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो सकता है। इस संभावना को देखते हुए कंपनियों ने पहले ही निर्यात रणनीति पर विचार शुरू कर दिया है।

एक प्रमुख भारतीय कार निर्माता ने कहा कि वह मेक्सिको को निर्यात के लिए विविध विकल्प तलाश रहे हैं। बहुराष्ट्रीय होने के कारण भारत से मेक्सिको को निर्यात की कमी अन्य देशों से पूरी की जा सकती है। दक्षिण अफ्रीका और सऊदी अरब के बाद मेक्सिको भारत का तीसरा सबसे बड़ा कार निर्यात बाजार है।

निर्यातकों की बढ़ती चिंता

व्यापारी और उद्योग संगठन इस निर्णय से चिंतित हैं। रॉयटर्स के अनुसार, वाहन निर्माता संगठन SIAM ने नवंबर में भारत के वाणिज्य मंत्रालय से आग्रह किया था कि वह भारत से भेजे जाने वाले वाहनों पर शुल्क में यथास्थिति बनाए रखने के लिए मेक्सिको पर दबाव डाले।

मेक्सिको में हर साल लगभग 15 लाख यात्री वाहन बेचे जाते हैं, जिनमें से लगभग दो-तिहाई आयात किए जाते हैं। भारतीय निर्यात की हिस्सेदारी कुल बिक्री में लगभग 6.7 प्रतिशत है। स्कोडा जैसे कुछ ब्रांडों का भारत से निर्यात कुल कार निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत है।

इसलिए नए शुल्क से भारतीय कार उद्योग को सीधे नुकसान हो सकता है और कंपनियों को अपने उत्पादन और निर्यात योजनाओं में बदलाव करने पड़ सकते हैं।

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