13 दिन बाद मिला नवजात, खरीदने वाली महिला थाने पहुंची; भोजपुर में 4.50 लाख में हुई थी डील

भोजपुर में जन्म के बाद बेचे गए नवजात को पुलिस ने 13 दिन बाद बरामद किया। 4.50 लाख की डील का खुलासा, खरीदने वाली महिला समेत कई आरोपी गिरफ्तार।

भोजपुर में जन्म के बाद बेचे गए नवजात को 13 दिन बाद बरामद किया गया। आरोपी महिला और गिरोह के कई सदस्य गिरफ्तार किए गए। पुलिस ने सभी आरोपियों की जांच शुरू की और बच्चे को सुरक्षित मां के पास सौंपा।

Bihar: घटना गड़हनी थाना क्षेत्र के नारायणपुर गांव की है। खुशबू कुमारी और चितरंजन कुमार ने लव मैरिज की थी, लेकिन खुशबू की सास क्रिंता देवी इस शादी से नाराज थी। इसी नाराजगी और बेटे-बुहू को अलग करने की नीयत से क्रिंता देवी ने 7 दिसंबर को अगिआंव पीएचसी में जन्म लेने के तुरंत बाद नवजात पोते को बेच दिया।

सास के साथ पड़ोसी महिला और रिश्तेदारों ने भी इस साजिश में सहयोग किया। नवजात को ग्रामीण चिकित्सक दिलीप उर्फ हरिशंकर पंडित को सौंप दिया गया। खुशबू कुमारी को इस बारे में कोई भनक तक नहीं लगी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई 

16 दिसंबर को खुशबू कुमारी ने गड़हनी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। सास क्रिंता देवी, पड़ोसी कविता शर्मा, होमगार्ड सिपाही चांदनी शर्मा और डॉक्टर की सहयोगी प्रीति कुमारी को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर मुख्य आरोपी ग्रामीण चिकित्सक दिलीप ने थाने में सरेंडर किया। उसके बाद औरंगाबाद और पीरो से अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सभी ने स्वीकार किया कि नवजात को झारखंड की महिला को 4.50 लाख रुपये में बेचा गया था।

मां की भावुक प्रतिक्रिया

नवजात को सुरक्षित मिलने की खबर मिलते ही खुशबू कुमारी थाने भागी। बेटे को गोद में लेकर वह रो पड़ी। उसके चेहरे पर राहत और आंखों में आंसू साफ झलक रहे थे। खुशबू ने थानाध्यक्ष और पूरी पुलिस टीम का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की तत्परता और मेहनत से उसका बेटा सुरक्षित लौट सका।

खुशबू ने बताया कि जन्म के बाद उन्हें डिलीवरी के समय घर से अलग कर दिया गया था। उन्हें विश्वास था कि नवजात की देखभाल ठीक से हो रही है, लेकिन बाद में पता चला कि बच्चे को बेच दिया गया था।

गिरोह का खुलासा

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार सभी आरोपी एक संगठित गिरोह से जुड़े हैं। गिरोह का नेटवर्क बिहार और झारखंड तक फैला हुआ है। नवजात को चोरी या खरीदकर जरूरतमंदों को ऑन-डिमांड लाखों रुपए में बेचा जाता था।

थानाध्यक्ष कमलजीत ने बताया कि महिला ने पूछताछ में स्वीकार किया कि डील में कुल 4.50 लाख रुपए तय थे, जिसमें 3.50 लाख रुपए ग्रामीण डॉक्टर को दे दिए गए थे। बाकी राशि अन्य सहयोगियों में बांटी जानी थी।

पुलिस अब गिरोह के कलेक्शन नेटवर्क और पूर्व में अंजाम दी गई घटनाओं की जानकारी जुटा रही है। आवश्यकता पड़ने पर आरोपियों को रिमांड पर लेकर भी पूछताछ की जाएगी।

परिवार की साजिश

खुशबू कुमारी और चितरंजन कुमार ने शादी से दो-तीन महीने पहले एक-दूसरे को प्रपोज किया और दिल्ली में शादी रचाई। इसके बाद पति हाजीपुर में काम के लिए चले गए और खुशबू कुछ दिन वहां रहीं।

छठ के करीब घर लौटने पर सास ने बेटे-बुहू को अलग करने की साजिश रची। डिलीवरी के बाद खुशबू को अलग ऑटो में बैठा कर नवजात को चांदनी शर्मा और कविता देवी को सौंप दिया गया। खुशबू ने 13 दिसंबर को किसी तरह घर से निकलकर एसपी ऑफिस और फिर थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई।

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