भारत के तेल और गैस आयात बिल में वित्त वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में उल्लेखनीय कमी आई है। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में गिरावट और प्राकृतिक गैस की कमजोर मांग के कारण कुल आयात खर्च 12 प्रतिशत घटकर 69.9 अरब डॉलर पर आ गया।
Business: वित्त वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में भारत को तेल और गैस आयात के मोर्चे पर राहत मिली है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और प्राकृतिक गैस की मांग कम होने से आयात पर होने वाला कुल खर्च घट गया है। पेट्रोलियम योजना व विश्लेषण प्रकोष्ठ के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच शुद्ध आयात बिल 12 प्रतिशत कम होकर 69.9 अरब डॉलर पर आ गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 75.9 अरब डॉलर था।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में हर बदलाव सीधा प्रभाव डालता है। इस वर्ष भारत ने कच्चे तेल का आयात पिछले साल की तरह ही किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव कम होने से कुल आयात बिल में बड़ी बचत हुई।

अप्रैल से अक्टूबर के दौरान कच्चे तेल का बिल 13 प्रतिशत कम होकर 71.2 अरब डॉलर रहा जबकि पिछले वर्ष यह 81.9 अरब डॉलर पर था। घटती कीमतों ने भारत को वित्तीय राहत दी है, जिससे बजट पर दबाव कम हुआ है।
प्राकृतिक गैस की मांग में कमी
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इस वर्ष घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की मांग कम देखने को मिली। मांग घटने से आयात में भी कमी आई और इसका असर कुल आयात बिल पर साफ दिखा। प्राकृतिक गैस के आयात पर कम खर्च होने से तेल–गैस आयात बिल और कम हो गया।
ऊर्जा सुरक्षा पर असर
तेल और गैस आयात पर खर्च में हुई इस कमी से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती मिली है। कम कीमतों का लाभ लेकर सरकार और उद्योगों को ऊर्जा लागत में राहत मिली है। इससे आगे चलकर महंगाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। हालांकि भारत का ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर होना अभी भी एक चुनौती है और दीर्घकालिक समाधान के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना जरूरी है।









