26/11 मुंबई हमले के दौरान ताज होटल में फंसे 40 लोगों की जान बचाने वाले राजस्थान के एनएसजी कमांडो सुनील जोधा आज भी उस दर्दनाक रात की यादें संभाले हुए हैं। आतंकवादियों से भिड़ंत में उनके शरीर में 8 गोलियां लगीं, जिनमें से एक गोली अब भी उनके सीने के पास धंसी हुई है।
Rajasthan: मुंबई में 26/11 आतंकी हमले के दौरान ताज होटल में चल रहे ऑपरेशन में अलवर के मुंडिया खेड़ा गांव निवासी एनएसजी कमांडो सुनील जोधा ने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब 40 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। आतंकियों से आमने-सामने की लड़ाई में उन्हें 8 गोलियां लगीं, जिनमें से 7 तो ऑपरेशन के दौरान निकाल ली गईं, लेकिन एक गोली आज भी उनके सीने के पास मौजूद है। कमांडो जोधा की इस बहादुरी और अदम्य साहस के लिए उन्हें महाराष्ट्र सरकार द्वारा कई बार सम्मानित किया गया है। उन्हें गैलेंट्री अवॉर्ड, ग्लोबल पीस अवॉर्ड सहित कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
सेना से एनएसजी तक का सफर
राजस्थान के अलवर जिले के सुनील जोधा ने अपने सैन्य सफर की शुरुआत 3 राजपूत बटालियन में सिपाही के रूप में की थी। उत्कृष्ट प्रदर्शन और कड़े प्रशिक्षण के बाद वे एनएसजी कमांडो बने। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग उदयपुर में है, जबकि इससे पहले वे अलवर की ईटाराणा छावनी में भी सेवाएं दे चुके हैं। मंगलवार को इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित आर्मी मेले में पहुंचे कमांडो सुनील जोधा ने 26/11 ऑपरेशन की यादों और अपने अनुभवों को साझा किया। उनकी बहादुरी और समर्पण ने उपस्थित लोगों को प्रेरित किया।
ताज ऑपरेशन की भयावह रात
मुंबई हमले की रात सुनील जोधा एनएसजी मुख्यालय से सीधे ताज होटल पहुंचे, जहां चारों तरफ अफरा-तफरी और लोगों के शव पड़े थे। जैसे ही वे दूसरे फ्लोर पर पहुंचे, अचानक होटल की बिजली गुल हो गई और पूरा परिसर अंधेरे में डूब गया। इसी दौरान एक कमरे में दो आतंकियों से आमना-सामना हुआ, जिसके बाद भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई। धुआं और आग बढ़ने के बावजूद कमांडो टीम बिना रुके आगे बढ़ती रही।
इस मुठभेड़ में सुनील के शरीर में कुल आठ गोलियां लगीं, जिनमें से सात को तो ऑपरेशन से निकाल दिया गया, लेकिन एक गोली अब भी उनके सीने के पास धंसी हुई है। यह गोली ऐसी जगह फंसी है जिसे निकालना खतरनाक माना गया, इसलिए उसे वहीं रहने दिया गया।
मौत को मात देने का साहस
सुनील जोधा बताते हैं कि ऑपरेशन के दौरान उन पर करीब 30 से अधिक गोलियां चलाई गई थीं। गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं खोई। इतनी चोटों के बीच भी वे लगातार लड़ते रहे और कई लोगों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
जब वे जमीन पर घायल पड़े थे, आतंकी उनके बिल्कुल पास आ गए। उस वक्त सुनील ने अपनी सांस रोक ली और खुद को मृत जैसा दिखाया। आतंकियों को उनके हाथ में लगी गोली का घाव दिखा, लेकिन उन्होंने उन्हें मृत समझकर छोड़ दिया। सुनील कहते हैं कि उनके सीने में फंसी वह एक गोली आज भी 26/11 की रात की भयावहता की याद दिलाती है।










