यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु संयंत्र पर रूसी हमलों के बाद रेडिएशन रिसाव का खतरा फिर से बढ़ गया है। ग्रीनपीस ने चेतावनी दी है कि पुराने सुरक्षा ढांचे के कमजोर होने से गंभीर दुर्घटना हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो पर्यावरणीय नुकसान बढ़ सकता है।
चेरनोबिल रेडिएशन खतरा 2026: यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में रूसी हमलों के बाद एक बार फिर रेडिएशन रिसाव की आशंका गहराने लगी है। यह वही स्थल है जहां 1986 में दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटना हुई थी। कीव और ग्रीनपीस के अनुसार, कहां, कब और क्यों यह खतरा बढ़ रहा है, इसका कारण पुराने सुरक्षा ढांचे का कमजोर होना और हालिया हमलों से हुई क्षति है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं संभाली गई तो इसका असर व्यापक पर्यावरणीय और मानवीय संकट के रूप में सामने आ सकता है।
पुराने सुरक्षा ढांचे पर बढ़ता खतरा
ग्रीनपीस की रिपोर्ट के मुताबिक, चेरनोबिल में मौजूद पुराना स्टील-कंक्रीट सरकोफैगस समय के साथ कमजोर हो रहा है। इसी ढांचे के भीतर भारी मात्रा में रेडियोएक्टिव पदार्थ अब भी मौजूद हैं। संस्था का कहना है कि यदि यह संरचना ढहती है तो रेडियोएक्टिव धूल हवा में फैल सकती है, जिससे दशकों से चल रहे सुरक्षा प्रयासों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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रूसी हमलों से बढ़ी स्थिति की जटिलता
यूक्रेन का आरोप है कि युद्ध के दौरान इस साइट पर कई बार हमले हुए हैं, जिससे न्यू सेफ कन्फाइनमेंट जैसी आधुनिक सुरक्षा संरचना भी प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आसपास विस्फोट या रॉकेट हमले से कंपन पैदा हो सकता है, जिससे कमजोर ढांचे पर दबाव बढ़ेगा और जोखिम और गंभीर हो सकता है।
1986 की त्रासदी की यादें फिर ताजा
26 अप्रैल 1986 को हुए चेरनोबिल हादसे में रिएक्टर नंबर-4 के विस्फोट से भारी मात्रा में रेडिएशन फैल गया था। इस घटना ने लाखों लोगों के जीवन और पर्यावरण को प्रभावित किया था। उस समय तत्काल 31 लोगों की मौत हुई थी, जबकि बाद के वर्षों में बीमारियों और कैंसर से हजारों मौतें दर्ज की गईं। यह आपदा आज भी दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटना मानी जाती है।










