कर्नाटक सरकार के मंत्री Priyank Kharge द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) को लेकर लिखे गए खुले पत्र पर अब विवाद तेज हो गया है। इस पत्र के बाद विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा लिखे गए पत्र के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अब विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कांग्रेस पर संघ को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। वीएचपी ने कहा कि आरएसएस की कानूनी स्थिति, कार्यप्रणाली और वित्तीय ढांचा पहले से ही न्यायालयों और कानून के दायरे में स्पष्ट रहा है।
VHP का कांग्रेस पर सीधा हमला
वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने प्रियांक खरगे के आरोपों को “तथ्यहीन” बताते हुए कहा कि आरएसएस को लेकर लंबे समय से राजनीतिक हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश में सभी संगठनों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। आलोक कुमार ने कहा कि आरएसएस एक ऐसा संगठन है जो अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से सामाजिक कार्य करता है और इसकी कार्यप्रणाली पारदर्शी है। उन्होंने दावा किया कि संगठन पर लगाए जा रहे आरोप वास्तविकता से परे हैं और यह केवल राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं।
आय और वित्तपोषण पर सफाई
आरएसएस की आय और वित्तीय स्रोतों पर उठे सवालों का जवाब देते हुए वीएचपी ने कहा कि संगठन किसी बाहरी स्रोत से फंड स्वीकार नहीं करता। संगठन की प्रमुख गतिविधि “गुरु दक्षिणा” के माध्यम से स्वैच्छिक योगदान पर आधारित है। वीएचपी अध्यक्ष ने दावा किया कि 1967-68 और 1975-76 के मामलों में आयकर विभाग ने आरएसएस की आय पर टैक्स लगाने की कोशिश की थी, लेकिन अदालतों ने यह माना कि गुरु दक्षिणा से प्राप्त धन “म्यूचुअल ट्रस्ट” की श्रेणी में आता है और कर के दायरे से बाहर है।
‘1948 से लगातार निशाने पर संघ’
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वीएचपी ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद से ही आरएसएस को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। आलोक कुमार ने कहा कि संगठन के खिलाफ झूठे आरोपों की राजनीति दशकों से चल रही है और यह नया नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रियांक खरगे का पत्र भी उसी राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आरएसएस की छवि को नुकसान पहुंचाना है।
कर्नाटक कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद के बयानों का जवाब देते हुए वीएचपी ने कहा कि आरएसएस हमेशा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का सम्मान करता है। संगठन की सदस्यता और रिकॉर्ड को लेकर उठे सवालों पर आलोक कुमार ने कहा कि आरएसएस में नियमित संरचना मौजूद है। उन्होंने बताया कि संगठन में हर तीन साल में आंतरिक प्रक्रियाओं के तहत व्यवस्था और चुनाव जैसी गतिविधियां होती हैं, जिसके लिए स्वयंसेवकों का रिकॉर्ड रखा जाता है।
प्रियांक खरगे का क्या है आरोप?
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि यदि आरएसएस देश और विदेश में अपनी व्यापक उपस्थिति का दावा करता है, तो उसे पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही के मानकों का पालन करना चाहिए। खरगे ने आरएसएस से निम्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है—
- संगठन का आधिकारिक पंजीकरण
- आय और व्यय का विवरण
- वित्तपोषण के स्रोत
- संपत्ति और लेन-देन की जानकारी
- टैक्स अनुपालन की स्थिति
उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस को अपने शताब्दी वर्ष को केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और पारदर्शिता की दिशा में कदम बढ़ाने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।









