Brij Bhushan Sharan Singh ने आरक्षण को लेकर चल रही बहस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “सवर्ण रिक्शा चलाएगा, मजदूरी करेगा लेकिन आरक्षण नहीं मांगेगा,” और इसे एक “वादा” बताया।
लखनऊ: भारत में आरक्षण नीति को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार विवाद के केंद्र में हैं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh, जिन्होंने सामाजिक और जातिगत आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कई तीखे बयान दिए हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस छिड़ गई है।
आरक्षण पर बृज भूषण का बड़ा दावा
एक सार्वजनिक बयान में बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि सवर्ण वर्ग मेहनत-मजदूरी कर सकता है, यहां तक कि रिक्शा चला सकता है, लेकिन वह कभी आरक्षण की मांग नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि यह एक “ऐतिहासिक और सामाजिक सच्चाई” है कि सवर्ण समुदाय आरक्षण के लिए आगे नहीं आता।उन्होंने यह भी कहा कि देश में पिछले कई दशकों में शिक्षा और अवसरों के वितरण को लेकर बड़े बदलाव हुए हैं, लेकिन आरक्षण की बहस अभी भी जारी है।
अपने बयान में बृज भूषण ने कहा कि आरक्षण प्रणाली में कई बदलाव समय के साथ हुए हैं, लेकिन इससे जुड़ी जटिलताएं और बढ़ी हैं। उनके अनुसार, कुछ जातियां समय के साथ वर्गीकरण बदलकर “अगड़ी” और “पिछड़ी” श्रेणियों में शामिल हो गई हैं, जिससे व्यवस्था और जटिल हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग आरक्षण का लाभ गलत तरीके से उठा रहे हैं और वास्तविक जरूरतमंदों तक इसका पूरा लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।

पिछड़ी जातियों को लेकर बयान
पूर्व सांसद ने पिछड़ी जातियों के लोगों से अपील करते हुए कहा कि उनका संघर्ष किसी एक समुदाय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज में कुछ लोग खुद को पिछड़ी श्रेणी में शामिल कर लाभ ले रहे हैं, जबकि वास्तविक पिछड़े वर्गों तक इसका लाभ सीमित रह जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के भीतर ही कुछ लोग “नकली पहचान” बनाकर आरक्षण का फायदा ले रहे हैं, जिससे असली लाभार्थी प्रभावित हो रहे हैं।
बृज भूषण शरण सिंह ने अपने बयान में यह भी कहा कि समय के साथ सवर्ण समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव आया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई सवर्ण लोग अब दैनिक मजदूरी, सब्जी विक्रय और छोटे व्यवसायों में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज कई लोग अयोध्या, बहराइच और अन्य क्षेत्रों में रिक्शा चलाने या मेहनत-मजदूरी करने जैसे कार्यों से अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनका कहना था कि समाज का यह वर्ग अब पहले जैसी स्थिति में नहीं रहा।
आरक्षण के भविष्य पर बयान
अपने बयान में बृज भूषण शरण सिंह ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में भी उनकी ओर से आरक्षण समाप्त करने की मांग नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे अगले 100 वर्षों तक आरक्षण के विरोध में नहीं जाएंगे, लेकिन इसके बावजूद समाज में असमानताएं बनी रह सकती हैं। उनके अनुसार, आरक्षण व्यवस्था के बावजूद समाज के कई महत्वपूर्ण पदों पर कुछ सीमित वर्गों का वर्चस्व बना हुआ है, जिससे वास्तविक समानता की स्थिति पूरी तरह हासिल नहीं हो पाई है।










