सुपरस्टार संगीतकार ए आर रहमान ने खुलासा किया कि उन्हें पिछले आठ सालों से बॉलीवुड से कोई प्रोजेक्ट नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े लेबल और कॉर्पोरेट नियंत्रण ने स्वतंत्र और क्रिएटिव अवसरों को सीमित कर दिया है। जावेद अख्तर और शान ने इस बयान पर अलग प्रतिक्रिया दी, जो इंडस्ट्री की बदलती परिस्थितियों को दर्शाती है।
A R Rahman Bollywood Update: बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार ए आर रहमान ने हाल ही में कहा कि पिछले आठ सालों से उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कोई काम नहीं मिला है। मुंबई में दिए इंटरव्यू में रहमान ने बड़े लेबल और कॉर्पोरेट संस्थाओं के बढ़ते नियंत्रण को इस समस्या का कारण बताया। जावेद अख्तर और सिंगर शान ने भी इस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने व्यक्तिगत व्यस्तताओं और इंडस्ट्री की संरचना को मुख्य कारण बताया।
ए आर रहमान ने बताया सच
बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध संगीतकार ए आर रहमान ने एक लेटेस्ट इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्हें पिछले आठ सालों से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से कोई प्रोजेक्ट नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में संगीत निर्माण पर नियंत्रण बड़े लेबल और कॉर्पोरेट संस्थाओं के हाथ में चला गया है, जिससे स्वतंत्र और क्रिएटिव काम के मौके कम हो गए।
रहमान ने यह भी बताया कि हिंदी फिल्मों में अपनी जगह बनाने में उन्हें कई साल लगे। उन्होंने मणिरत्नम की 1991 की फिल्म रोजा से बॉलीवुड में डेब्यू किया था और बॉम्बे, दिल से… और रामगोपाल वर्मा की रंगीला जैसी फिल्मों में भी काम किया। इसके बावजूद, अब उन्हें बॉलीवुड में लंबे समय से काम मिलने में परेशानी हो रही है।

जावेद अख्तर और शान का रिएक्शन
मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने इस मुद्दे पर कहा कि उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा। उनका कहना था कि रहमान वेस्ट में ज्यादा व्यस्त रहते हैं और छोटे निर्माता शायद उनसे संपर्क करने में झिझक महसूस करते हैं। जावेद ने यह भी जोड़ा कि रहमान एक महान शख्सियत हैं, जिनका सम्मान सभी करते हैं।
बॉलीवुड सिंगर शान ने भी ए आर रहमान के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संगीत उद्योग में किसी प्रकार की सांप्रदायिक या अल्पसंख्यक पहलू नहीं है। शान ने कहा कि काम न मिलने की समस्या व्यक्तिगत और अस्थायी हो सकती है और कलाकारों को इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहिए।
इंडस्ट्री की बदलती स्थितियां
ए आर रहमान के खुलासे ने बॉलीवुड में संगीतकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर बहस छेड़ दी है। बड़े लेबल और कॉर्पोरेट नियंत्रण ने स्वतंत्र संगीतकारों के लिए अवसर सीमित कर दिए हैं। इस पर जावेद अख्तर और शान जैसी हस्तियों के विचार अलग हैं, जो व्यक्तिगत व्यस्तताओं और उद्योग की संरचना को एक कारण मानते हैं।










