आगरा में आलू किसानों पर बढ़ा आर्थिक दबाव, महंगे सरकारी बीज के चलते बुकिंग में भारी गिरावट

आगरा में आलू की कम कीमतों और महंगे सरकारी बीज से किसान परेशान हैं। अब तक सिर्फ 190 आवेदन आए हैं, जबकि 2,000 क्विंटल बीज बुकिंग के लिए बचा है।

आगरा में आलू की कम कीमतों और सरकारी बीज महंगा होने से किसान नई बुवाई के लिए बीज खरीदने से पीछे हट रहे हैं। अब तक सिर्फ 190 आवेदन आए हैं और जिले में करीब 2,000 क्विंटल बीज बुकिंग के लिए बचा है।

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में आलू की लगातार कमजोर कीमतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो साल से मंदी का सामना कर रहे किसान अब महंगे सरकारी बीज की खरीद से भी बच रहे हैं। जिले में आवंटित 4,716 क्विंटल बीज में से करीब 2,000 क्विंटल अब भी बुकिंग के लिए शेष है। सरकारी अनुदान के बावजूद किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए बड़ी रकम जुटानी पड़ रही है।

कम भाव के कारण सरकारी बीज की बुकिंग में गिरावट

आगरा जिले में आलू की खेती करने वाले किसानों के सामने इस बार नई फसल की तैयारी करना चुनौती बन गया है। पिछले दो साल से आलू की कम कीमतों के कारण आर्थिक दबाव झेल रहे किसान अब सरकारी बीज खरीदने से भी पीछे हट रहे हैं। इसका असर बीज की बुकिंग पर साफ दिखाई दे रहा है।

सितंबर से सरकारी आलू बीज के लिए आवेदन शुरू हुए थे, लेकिन अब तक केवल 190 आवेदन ही आए हैं। पिछले वर्षों में सरकारी बीज के लिए करीब 2,000 से 2,500 किसान आवेदन करते थे। इस बार मांग में आई गिरावट ने बीज वितरण से जुड़े विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

आगरा जिले को कुल 4,716 क्विंटल सरकारी आलू बीज आवंटित किया गया है। इसमें से करीब 2,000 क्विंटल बीज अब भी बुकिंग के लिए उपलब्ध है। मौजूदा रुझान जारी रहने पर पूरी खेप की बिक्री करना मुश्किल हो सकता है।

आलू के कम भाव और बीज की ऊंची कीमत से बढ़ी परेशानी

आलू की कीमतों में गिरावट किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। पिछले साल जिले में करीब 85 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की बुवाई हुई थी और पैदावार भी अच्छी रही। लेकिन बाजार में पूरे सीजन किसानों को संतोषजनक भाव नहीं मिल सके। इससे कई किसानों की कमाई प्रभावित हुई और कुछ पर कर्ज का दबाव भी बढ़ गया।

वर्तमान में ओवर साइज आलू का भाव करीब 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है। वहीं, गुल्ला और किर्री जैसी छोटी श्रेणी के आलू बेचकर किसानों के लिए कोल्ड स्टोर का किराया निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

दूसरी ओर, सरकारी बीज की कीमत 2,980 रुपये से 3,630 रुपये प्रति क्विंटल तक है। ऐसे में किसानों के सामने मुश्किल यह है कि जिस आलू को बेचकर उन्हें अगली फसल के लिए पूंजी जुटानी है, उससे मिलने वाली रकम नए बीज की लागत के मुकाबले काफी कम है।

सरकार की ओर से प्रति क्विंटल 1,000 रुपये की सब्सिडी दिए जाने के बावजूद किसानों को बीज खरीदने के लिए पर्याप्त रकम जुटानी पड़ रही है। इसी वजह से कई किसान फिलहाल नई खरीद से बच रहे हैं।

पुराना बीज इस्तेमाल करने की तैयारी में किसान

किसानों का कहना है कि मौजूदा बाजार भाव को देखते हुए महंगा बीज खरीदने में जोखिम है। खंदौली के किसान संजीव कुमार के अनुसार, आलू की वर्तमान कीमतों में महंगा बीज खरीदना घाटे का सौदा साबित हो सकता है। उन्होंने मांग की कि सरकार बाजार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बीज की कीमत तय करे और किसानों को अतिरिक्त छूट दे।

बमान के किसान जितेंद्र कुमार ने भी बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार आलू की स्थिति अधिक खराब है। कम कीमतों के कारण किसानों के लिए अगली फसल में निवेश करना कठिन हो गया है। ऐसे में कुछ किसान पुराने बीज के सहारे बुवाई की तैयारी कर रहे हैं।

बीज की अलग-अलग श्रेणियों के लिए तय हैं अलग दाम

सरकारी आलू बीज की कीमत उसकी श्रेणी और आकार के अनुसार अलग-अलग है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आधारित प्रथम श्रेणी के सीड साइज बीज की कीमत 3,630 रुपये प्रति क्विंटल और ओवर साइज की कीमत 3,040 रुपये प्रति क्विंटल है। आधारित द्वितीय श्रेणी में सीड साइज बीज 3,480 रुपये और ओवर साइज बीज 2,980 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।

आलू की कम कीमतों और बीज की लागत के बीच फंसे किसानों के लिए अगली फसल की योजना बनाना मुश्किल हो रहा है। अब उनकी नजर इस बात पर है कि बाजार में आलू के भाव में सुधार होता है या सरकार बीज की कीमत और सब्सिडी को लेकर कोई राहत देती है।

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