एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित इस महीने के अंत में भारतीय वायुसेना की कमान संभालेंगे। उनके सामने वायुसेना के आधुनिकीकरण से जुड़ी कई अहम चुनौतियां होंगी।
Air Marshal Ashutosh Dixit: एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित 31 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालेंगे। वह एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह लेंगे और भारतीय वायुसेना के 29वें एयर चीफ बनेंगे। उनका कार्यकाल ऐसे समय शुरू हो रहा है, जब वायुसेना अपने लड़ाकू विमान बेड़े को मजबूत करने के साथ-साथ कई बड़े स्वदेशी और विदेशी एविएशन प्रोग्राम को आगे बढ़ा रही है।
भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल स्वीकृत 42.5 स्क्वाड्रन की तुलना में करीब 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं। ऐसे में नए विमानों की समय पर डिलीवरी, स्वदेशी तकनीक का विकास और भविष्य की युद्धक क्षमता तैयार करना नए एयर चीफ के लिए बड़ी प्राथमिकता होगी। उनके कार्यकाल में पांच प्रमुख एविएशन प्रोग्राम खास तौर पर महत्वपूर्ण रहेंगे।
1. LCA Mk-1A: डिलीवरी की रफ्तार बढ़ाना
LCA Mk-1A कार्यक्रम नए एयर चीफ के सामने सबसे तत्काल चुनौतियों में से एक होगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ 83 विमानों के लिए करीब 48,000 करोड़ रुपये का शुरुआती अनुबंध हुआ था। इन विमानों की डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन इंजन सप्लाई और जरूरी प्रमाणन में देरी के कारण कार्यक्रम प्रभावित हुआ।
अब इंजन की आपूर्ति से जुड़ी स्थिति में सुधार हुआ है और HAL बाकी तकनीकी मुद्दों को दूर करने पर काम कर रहा है। इनमें रडार और हथियार प्रणालियों का एकीकरण भी शामिल है। HAL का लक्ष्य मौजूदा वित्त वर्ष में करीब 10 LCA Mk-1A बनाने का है, जबकि बेंगलुरु और नासिक की सुविधाओं की संयुक्त उत्पादन क्षमता सालाना 24 विमान तक बताई गई है।
इसके अलावा 97 और LCA Mk-1A के लिए 62,370 करोड़ रुपये से अधिक का अनुबंध किया गया है। इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होने और छह वर्षों में पूरी होने की योजना है।
2. LCA Mk-2: अगली पीढ़ी का स्वदेशी फाइटर

LCA Mk-2 को Mk-1A से अधिक क्षमता वाला लड़ाकू विमान बनाने की योजना है। इसमें ज्यादा रेंज और पेलोड, बेहतर सर्वाइवेबिलिटी, आधुनिक एवियोनिक्स और नेटवर्क-सेंट्रिक क्षमताएं शामिल होंगी। यह भविष्य में मिराज 2000, MiG-29 और Jaguar जैसे पुराने विमानों की जगह लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
HAL ने Mk-2 प्रोटोटाइप की स्ट्रक्चरल असेंबली पूरी कर ली है। पहला ग्राउंड रन मार्च 2027 तक करने का लक्ष्य है, जबकि पहली उड़ान 2027 के बाद होने की उम्मीद है। विमान में GE Aerospace के F414 इंजन का इस्तेमाल प्रस्तावित है और भारत में इसके संयुक्त उत्पादन को लेकर बातचीत चल रही है।
3. MRFA: 114 राफेल की बड़ी खरीद
घटते लड़ाकू विमान बेड़े को तेजी से मजबूत करने के लिए सिर्फ घरेलू परियोजनाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। यही वजह है कि Multi-Role Fighter Aircraft (MRFA) कार्यक्रम नए एयर चीफ के लिए अहम रहेगा। इसके तहत सरकार-से-सरकार व्यवस्था के जरिए 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना है।
फरवरी 2026 में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इस प्रस्ताव के लिए Acceptance of Necessity को मंजूरी दी थी। अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना वायुसेना की परिचालन क्षमता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
4. AMCA: भारत का 5वीं पीढ़ी का फाइटर

Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) भारत के दीर्घकालिक रक्षा लक्ष्यों की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना के लिए स्वदेशी स्टील्थ फाइटर विकसित करना है। AMCA में एडवांस्ड एवियोनिक्स, आंतरिक हथियार क्षमता, बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस और सुपरक्रूज जैसी क्षमताएं शामिल होने की उम्मीद है।
मौजूदा अनुमान के अनुसार पहला प्रोटोटाइप 2029 में उड़ान भर सकता है और विकास कार्य करीब 2034 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद उत्पादन शुरू करने की योजना है। हालांकि, ये अनुमानित समयसीमाएं हैं और अंतिम डिलीवरी या सेवा में शामिल होने की तारीखें नहीं हैं।
5. MTA: एयरलिफ्ट क्षमता बढ़ाने की चुनौती
लड़ाकू विमानों के अलावा भारतीय वायुसेना की परिवहन क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। Medium Transport Aircraft (MTA) प्रोग्राम के तहत 18 से 30 टन कार्गो क्षमता वाले विमान विकसित या हासिल करने की योजना है। रक्षा मंत्रालय ने 60 तक मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है।
इस प्रक्रिया में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, महिंद्रा ग्रुप, अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, HAL और रिलायंस डिफेंस जैसी भारतीय कंपनियों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। MTA प्रोग्राम सिर्फ विमान खरीदने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य भारत में एक मजबूत ट्रांसपोर्ट-एयरक्राफ्ट निर्माण इकोसिस्टम विकसित करना भी है।










