उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय राय को लेकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की अटकलों के बीच उन्होंने अपना रुख स्पष्ट किया है। अजय राय ने कहा कि वह कांग्रेस के सिपाही हैं और पार्टी में ही रहेंगे। भाजपा में जाने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि भाजपा में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह उन्हें सीधे फोन करके पार्टी में आने के लिए कह सके। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में उनके राजनीतिक भविष्य और कांग्रेस में उनकी भूमिका को लेकर चल रही चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।
अजय राय का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक बदलाव करते हुए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी से हटाकर आराधना मिश्रा मोना को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। अजय राय करीब तीन साल तक प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाल चुके हैं। नेतृत्व में बदलाव के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि, अजय राय ने इससे पहले भी स्पष्ट किया था क
अजय राय ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कांग्रेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। वह वर्ष 2009 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद से वह कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वाराणसी और पूर्वांचल की राजनीति में उनकी पहचान एक प्रमुख नेता के रूप में रही है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वर्ष 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में वाराणसी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार भी रह चुके हैं। भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर उनका जवाब इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद अजय राय ने पार्टी के नए नेतृत्व को सहयोग देने की बात भी कही थी। उन्होंने आराधना मिश्रा मोना को नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दीं और कहा कि पार्टी नेतृत्व जो फैसला करता है, उसे वह स्वीकार करते हैं। उनके मुताबिक, उन्हें अब तक जो भी जिम्मेदारियां मिलीं, उन्होंने उन्हें निभाने की पूरी कोशिश की है। उन्होंने कांग्रेस को मजबूत करने और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ मिलकर काम करते रहने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
अजय राय के बयान का एक अहम पहलू यह भी है कि उन्होंने अपनी आगे की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर पिंडरा विधानसभा क्षेत्र का उल्लेख किया है। वाराणसी के पिंडरा क्षेत्र को वह अपना राजनीतिक आधार मानते हैं। उन्होंने कहा है कि अब उनका ध्यान इस क्षेत्र में सक्रिय रहकर कांग्रेस के लिए काम करने पर रहेगा। ऐसे में उनके हालिया बयान से संकेत मिलता है कि प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बावजूद वह पार्टी की राजनीति से दूरी बनाने के बजाय संगठन और अपने क्षेत्र में सक्रिय बने रहने की बात कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस, भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। संगठन में बदलाव, नेताओं के बयान और गठबंधन को लेकर चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। अजय राय के भाजपा में जाने की अटकलों पर दिए गए जवाब ने भी इसी राजनीतिक माहौल में ध्यान खींचा है। फिलहाल, उनका सार्वजनिक रुख यही है कि वह कांग्रेस के साथ बने रहेंगे और पार्टी के लिए काम करेंगे। भाजपा में शामिल होने को लेकर उनकी ओर से किसी फैसले की घोषणा नहीं की गई है।









