अजमेर में डेटिंग ऐप के जरिए लोगों को फंसाकर लूटने का आरोप, चार गिरफ्तार

अजमेर मे CRPF जवान से लूट के मामले मे चार आरोपी गिरफ्तार। पुलिस के अनुसार, डेटिंग ऐप पर संपर्क कर लोगो को बुलाकर, निजी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ठगते है

राजस्थान के अजमेर में CRPF जवान से लूट के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी डेटिंग ऐप के जरिए लोगों से संपर्क कर उन्हें सुनसान जगह बुलाते और निजी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर रुपये वसूलते थे।

अजमेर: राजस्थान: राजस्थान के अजमेर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक जवान को कथित तौर पर बंधक बनाकर लूटने के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी एक गे डेटिंग ऐप के जरिए लोगों से संपर्क करते थे और मिलने के बहाने उन्हें सुनसान स्थान पर बुलाकर धमकाते थे। आरोप है कि वे निजी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़ितों से रुपये ट्रांसफर करवाते थे।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान अजमेर से जयपुर तक फैले संभावित नेटवर्क और अन्य वारदातों के बारे में जानकारी मिली है। जांच में यह भी सामने आया कि बदनामी के डर से कुछ संभावित पीड़ितों ने शिकायत दर्ज नहीं कराई। हालांकि, ऐसे मामलों की वास्तविक संख्या और गिरोह की गतिविधियों की व्यापकता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

डेटिंग ऐप पर बातचीत से शुरू होती थी कथित साजिश

पुलिस के अनुसार, मामले में कथित मुख्य आरोपी जयराम चौधरी का संपर्क जयपुर में रोहित नाम के युवक से हुआ था। बताया गया कि रोहित ने उसे गे डेटिंग ऐप के बारे में जानकारी दी और मोबाइल में ऐप डाउनलोड करने में मदद की। इसके बाद जयराम ने ऐप के जरिए लोगों से बातचीत शुरू की।

जांच में सामने आया कि अगस्त 2026 में एक व्यक्ति से ऑनलाइन बातचीत के बाद जयराम उससे मिलने पहुंचा। आरोप है कि उसके परिचित भी वहां पहुंच गए और उन्होंने मिलकर उस व्यक्ति को लूट लिया। पुलिस के मुताबिक, इस घटना से मिली रकम का इस्तेमाल खरीदारी और पार्टी करने में किया गया।

पुलिस का कहना है कि जयपुर में कुछ साथियों के पकड़े जाने के बाद जयराम अजमेर आ गया। यहां उसने नए युवकों से संपर्क बढ़ाया। सितंबर में उसकी मुलाकात राहुल उर्फ रॉकी यादव से हुई। इसके बाद राकेश गोदारा और दयाराम ढाका भी कथित तौर पर इस समूह से जुड़ गए।

चाय की दुकान पर योजना बनाने का आरोप

पुलिस जांच के मुताबिक, चारों आरोपियों ने अजमेर में एक चाय की दुकान पर बैठकर वारदात की योजना बनाई। आरोप है कि वे ऐप पर बातचीत के जरिए लोगों को मिलने के लिए तैयार करते और फिर उन्हें ऐसी जगह ले जाने की कोशिश करते थे, जहां आसानी से मदद न मिल सके।

इसी दौरान जयराम की बातचीत एक CRPF जवान से हुई। पुलिस के अनुसार, दोनों के बीच कुछ समय तक ऑनलाइन संवाद चलता रहा। इसके बाद जवान को 25 सितंबर की रात मिलने के लिए बुलाया गया। पुलिस का दावा है कि आरोपियों को शुरुआत में पीड़ित की पहचान और उसके पेशे की जानकारी नहीं थी।

मदद का संदेश भेजकर अस्पताल के पास बुलाया

पीड़ित की शिकायत के मुताबिक, 25 सितंबर की रात करीब 10 बजे उसे मदद की जरूरत होने का संदेश मिला। इसके बाद उसे अजमेर के जनाना अस्पताल के पास बुलाया गया। वहां एक सफेद कार में मौजूद आरोपी ने मरीज होने की बात कहकर जवान को कार में बैठा लिया। कुछ ही देर में तीन अन्य युवक भी कार में सवार हो गए।

शिकायत के अनुसार, आरोपी जवान को सुनसान जगह ले गए, जहां उसके साथ मारपीट की गई। आरोप है कि उसके कपड़े उतरवाकर मोबाइल की टॉर्च जलाते हुए वीडियो रिकॉर्ड करने का दिखावा किया गया। इसके बाद परिवार और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे डराया गया और उसके बैंक खाते से ऑनलाइन रुपये ट्रांसफर करवाए गए।

पुलिस के मुताबिक, जवान को करीब दो घंटे तक आरोपियों के कब्जे में रखा गया। शिकायत में लगभग 89 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए जाने का उल्लेख है। इस मामले में कृष्णगंज थाना पुलिस ने जांच के बाद चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

निजी वीडियो की धमकी को बनाया कथित वसूली का तरीका

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर पीड़ितों के निजी पलों को रिकॉर्ड करने का भ्रम पैदा करते थे। मोबाइल की टॉर्च जलाकर वीडियो बनाए जाने का नाटक किया जाता था और फिर सामग्री सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती थी। पुलिस के अनुसार, सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार के सामने बदनामी का डर पीड़ितों पर दबाव बनाने का माध्यम बनता था।

जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों ने कितने लोगों को निशाना बनाया और क्या इस तरह की अन्य घटनाओं में भी यही तरीका अपनाया गया। यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी डेटिंग ऐप का इस्तेमाल करने वाले सभी लोग इस तरह की गतिविधियों से जुड़े नहीं होते। मामले में आरोप विशिष्ट व्यक्तियों और कथित आपराधिक गतिविधियों से संबंधित हैं।

डिजिटल रिकॉर्ड मिटाने की कोशिश

पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपी अपने और पीड़ितों के मोबाइल फोन से डेटिंग ऐप तथा बातचीत से जुड़ा डेटा हटाने की कोशिश करते थे। कथित तौर पर इसका उद्देश्य डिजिटल रिकॉर्ड मिटाकर जांच से बचना था।

कृष्णगंज थाना प्रभारी अरविंद चारण के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, CCTV फुटेज और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। पुलिस के अनुसार, टीम ने ऐप पर प्रोफाइल बनाकर संदिग्धों तक पहुंचने की रणनीति भी अपनाई और संपर्कों की कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपियों का पता लगाने की कोशिश की।

ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य, उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी जांच के लिए अहम हो सकती है। हालांकि, कौन-सा साक्ष्य किस निष्कर्ष का समर्थन करता है, यह पुलिस की विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया से तय होगा।

लग्जरी सामान और ऑनलाइन गेम में पैसे लगाने का दावा

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में जयराम चौधरी की उम्र 19 वर्ष, राहुल उर्फ रॉकी यादव की उम्र 19 वर्ष, राकेश गोदारा की उम्र 23 वर्ष और दयाराम ढाका शामिल हैं। पुलिस ने जयराम को कथित मुख्य आरोपी बताया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राहुल और दयाराम बीएससी के छात्र हैं, जबकि राकेश 12वीं पास है।

पुलिस का दावा है कि आरोपी महंगे कपड़े और अन्य सामान खरीदने, पार्टी करने तथा ऑनलाइन गेम में पैसे लगाने के लिए वारदात करते थे। जांच में एविएटर गेम में रकम लगाने का उल्लेख भी सामने आया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर लूटी गई रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया।

पुलिस के मुताबिक, यदि पीड़ित के पास नकदी नहीं होती थी, तो उससे मोबाइल के जरिए ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे। इस तरह कथित वारदातों में डिजिटल भुगतान का भी इस्तेमाल किया गया।

अन्य पीड़ितों और जयपुर के मामलों की जांच

पुलिस को आशंका है कि अजमेर और जयपुर में इस तरह की अन्य वारदातें भी हुई हो सकती हैं। कुछ संभावित पीड़ित कारोबारी या दूसरे पेशों से जुड़े लोग हो सकते हैं। पुलिस के अनुसार, निजी बातचीत सार्वजनिक होने या बदनामी का डर शिकायत दर्ज कराने में बाधा बन सकता है। हालांकि, अन्य पीड़ितों की संख्या और संबंधित घटनाओं की पुष्टि अभी जांच का विषय है।

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, पुलिस ने 28 सितंबर को चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 29 सितंबर को अजमेर के पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाल ने मामले की जानकारी दी थी। बाद में आरोपियों को जेल भेजा गया और पहचान परेड की प्रक्रिया कराई गई।

पुलिस का कहना है कि जयराम और राहुल उर्फ रॉकी के खिलाफ जयपुर के करधनी थाने में भी मामले दर्ज हैं। जयपुर पुलिस ने दोनों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पूछताछ शुरू की। अब जांच में यह पता लगाने पर जोर है कि क्या आरोपी अन्य घटनाओं से भी जुड़े थे और क्या कोई अन्य व्यक्ति इस कथित नेटवर्क में शामिल था।

मामले में गिरफ्तार व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही कथित गिरोह की गतिविधियों, संभावित पीड़ितों और अन्य मामलों से जुड़े तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

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