समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर की उपेक्षा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल मूर्तियां बनाना पर्याप्त नहीं, गांव को उचित सम्मान मिलना चाहिए।
New Delhi: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर की कथित उपेक्षा पर सवाल उठाया है। वाजपेयी की जयंती पर एक्स (X) प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को यह बताना चाहिए कि वाजपेयी से जुड़े इस महत्वपूर्ण स्थान की अनदेखी क्यों की जा रही है।
अखिलेश यादव ने लिखा कि भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर उन्हें याद करते हुए वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहते हैं कि उनके पैतृक स्थान बटेश्वर की उपेक्षा क्यों की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसके पीछे कोई खास कारण है।
भाजपा की मूर्तियों को सियासी करार
अखिलेश यादव ने भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ के लिए गगनचुंबी मूर्तियां बनवाती है, लेकिन सच में किसी के सम्मान में कोई सच्चा स्मारक नहीं बनवाती। उनका कहना था कि भाजपा की मूर्तियां भी सियासी होती हैं और यह केवल दिखावे का प्रयास है, जबकि वास्तविक स्मारक और स्थायी सम्मान नहीं मिलता।
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यादव ने यह भी कहा कि किसी नेता की जयंती मनाना और केवल मूर्तियां बनवाना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, वाजपेयी जैसे व्यक्तित्व के पैतृक गांव की उपेक्षा करना उनके योगदान और उनके व्यक्तित्व के प्रति उपेक्षा का प्रतीक है।
वाजपेयी की जयंती और उनका योगदान
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उन्होंने भारतीय राजनीति में एक लंबा और प्रभावशाली सफर तय किया। वाजपेयी ने 16 अगस्त 2018 को दिल्ली में अंतिम सांस ली। उनकी जयंती को सरकार द्वारा सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए। उनकी नीति और विचारधारा ने देश की राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डाला। वे समाज में एकता, लोकतंत्र और राष्ट्रीय विकास के प्रतीक माने जाते थे।
बटेश्वर गांव की उपेक्षा
बटेश्वर, उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित वाजपेयी का पैतृक गांव है। अखिलेश यादव ने सरकार से यह सवाल किया कि क्यों इस स्थान को वह महत्व नहीं दिया जा रहा जो इसे मिलना चाहिए। उनके अनुसार, वाजपेयी के योगदान को याद करने के लिए केवल गगनचुंबी मूर्तियां बनाना पर्याप्त नहीं है।
यादव ने स्पष्ट किया कि यह उपेक्षा केवल एक स्थान का नहीं बल्कि उस महान नेता के योगदान और उनके मूल्य के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाती है। उनका कहना था कि वाजपेयी की जयंती पर उनके पैतृक गांव को प्रमुखता देना जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को समझ सकें।










