अमित शाह ने गोवा में कहा कि नक्सलवाद के बाद अब नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2014 से 2026 के बीच 1.19 करोड़ किलोग्राम से अधिक ड्रग्स जब्त किए गए और 1 लाख नशामुक्ति मित्र तैयार होंगे।
पणजी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गोवा में कहा कि सरकार ने देश में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है और अब इसी तरह नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश को नशामुक्त बनाने के लिए सरकार व्यापक अभियान चला रही है और इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। गोवा दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के बाद अब नशीले पदार्थों की समस्या के खिलाफ भी उसी तरह अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जिन लोगों ने तिरुपति से पशुपतिनाथ तक 'रेड कॉरिडोर' की कल्पना की थी, उन्होंने हथियार डाल दिए हैं और मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं।
शाह ने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य देश को नशे की समस्या से मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने मीडिया से भी इस अभियान को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने और नशामुक्त भारत के लक्ष्य में सहयोग करने की अपील की।
तीन साल का नशामुक्त भारत अभियान
अमित शाह ने कहा कि देश नशामुक्त भारत के लिए चलाए जा रहे तीन साल के अभियान का समर्थन करेगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को नशे से दूर रखना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गृह मंत्री ने गोवा के मीडिया से अपील करते हुए कहा कि देश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में मीडिया को सरकार का सहयोग करना चाहिए। उनके अनुसार, नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।
सरकार इस अभियान के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी, इनके इस्तेमाल और इससे जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता को भी प्राथमिकता दे रही है।
2014 के बाद 1.19 करोड़ किलो से ज्यादा ड्रग्स जब्त होने का दावा
अमित शाह ने नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस शासन के दौरान 26 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए थे।
उनके अनुसार, 2014 से 2026 के बीच यह मात्रा बढ़कर 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक हो गई।
शाह ने इन आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस दिशा में अभियान जारी रहेगा।
नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए जांच एजेंसियों और सुरक्षा तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार इसे केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे के तौर पर भी देखती है।
1 लाख 'नशामुक्ति मित्र' किए जाएंगे तैयार
अमित शाह ने कहा कि नशामुक्त भारत अभियान को देश के 50 करोड़ नागरिकों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए समाज में जागरूकता फैलाने वाले लोगों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने बताया कि सरकार 1 लाख 'नशामुक्ति मित्र' तैयार करने जा रही है। इन लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अपने आसपास के लोगों और समुदायों में नशीले पदार्थों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने में भूमिका निभा सकें।
शाह ने हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा एक कार्यक्रम में 1 करोड़ युवाओं के साथ बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युवाओं तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पीएम मोदी ने ड्रग्स को आतंकी साजिश से जोड़ा था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त को 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' की शुरुआत की थी। इस दौरान उन्होंने भारत में नशीले पदार्थों की आपूर्ति को दुश्मन देशों की कथित आतंकी साजिश से जोड़ा था।
प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने संबोधन में कहा था कि दुश्मन देश भारतीय युवाओं को नशे के जाल में फंसाना चाहते हैं। उन्होंने ऐसी साजिशों को मिलकर नाकाम करने की अपील की थी।
केंद्र सरकार के स्तर पर नशीले पदार्थों की तस्करी और उसके नेटवर्क को रोकने के साथ-साथ युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया जा रहा है।
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क्या है नार्को-टेररिज्म?
नशीले पदार्थों और आतंकवाद के बीच संबंध को समझने के लिए नार्को-टेररिज्म शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। जब नशीले पदार्थों की बिक्री से हासिल धन का इस्तेमाल आतंक फैलाने, हथियार खरीदने या आतंकी गतिविधियों के संचालन में किया जाता है, तो इसे नार्को-टेररिज्म कहा जाता है।
इस वजह से ड्रग्स की तस्करी को कई देशों में सिर्फ एक आपराधिक गतिविधि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौती के रूप में भी देखा जाता है।
नशीले पदार्थों से होने वाली अवैध कमाई का इस्तेमाल आपराधिक और आतंकी नेटवर्क को आर्थिक मदद देने के लिए किया जा सकता है। ऐसे नेटवर्क हथियारों की खरीद, नए सदस्यों की भर्ती और अपने संचालन के लिए इस धन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
पाकिस्तान सीमा से ड्रग्स तस्करी की चुनौती
भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तान सीमा से होने वाली तस्करी एक चुनौती बताई जाती है। सीमा पार नेटवर्क और ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थ भेजे जाने के मामले भी सामने आते रहे हैं।
हालांकि, भारत में आने वाले कुल नशीले पदार्थों में पाकिस्तान से आने वाली खेप का कितना हिस्सा है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस हिस्सेदारी को लेकर किसी निश्चित संख्या का दावा नहीं किया जा सकता।
सीमा पार तस्करी के अलावा देश के भीतर मौजूद वितरण नेटवर्क भी नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के लिए चुनौती बने हुए हैं।
भारत की भौगोलिक स्थिति क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत की भौगोलिक स्थिति भी नशीले पदार्थों की तस्करी के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। देश दुनिया के दो प्रमुख अवैध ड्रग्स उत्पादन क्षेत्रों के बीच स्थित है।
एक ओर गोल्डन क्रिसेंट क्षेत्र है, जिसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान शामिल हैं। दूसरी ओर गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र है, जिसमें म्यांमार, लाओस और थाईलैंड शामिल हैं।
इन क्षेत्रों के बीच भारत की स्थिति होने के कारण तस्करी करने वाले नेटवर्क देश का इस्तेमाल नशीले पदार्थों को दूसरे देशों तक पहुंचाने के लिए पारगमन मार्ग के तौर पर करने की कोशिश कर सकते हैं। साथ ही, भारत एक बड़ा बाजार भी है।
इसी भौगोलिक स्थिति के कारण देश के सामने सीमा पार तस्करी रोकने और घरेलू स्तर पर नशीले पदार्थों की मांग कम करने, दोनों तरह की चुनौती है।
नशे के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता पर जोर
अमित शाह के बयान से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को व्यापक अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसमें नशीले पदार्थों की जब्ती और तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ सामाजिक जागरूकता को भी अहम स्थान दिया जा रहा है।
1 लाख नशामुक्ति मित्रों को तैयार करने की योजना इसी दिशा में एक कदम है। सरकार का लक्ष्य अभियान को बड़े स्तर पर नागरिकों तक पहुंचाना है, ताकि नशे के खिलाफ जागरूकता केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित न रहे।
अमित शाह ने मीडिया से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि नशामुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के सभी वर्गों को साथ आना होगा। सरकार के अनुसार, नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में कार्रवाई के साथ रोकथाम, जागरूकता और युवाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।








