अमित शाह 20 अक्टूबर को पंजाब दौरे पर जाएंगे, नशे के खिलाफ अभियान और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बढ़ेगी सियासत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 अक्टूबर को पंजाब जाएंगे। दौरे मे नशा विरोधी कार्यकर्ताओं के परिवारो से मुलाकात संभावित है। विधानसभा चुनाव से पहले ड्रग्स मुद्दा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 अक्टूबर को पंजाब का दौरा करेंगे। इस दौरान मानसा और संगरूर में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं के परिवारों से मुलाकात की संभावना है। दौरे से 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में नशे का मुद्दा फिर चर्चा में है।

चंडीगढ़: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 अक्टूबर को पंजाब के दौरे पर जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने रविवार को इसकी जानकारी दी। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब राज्य में नशीले पदार्थों की समस्या, नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में शाह का दौरा नशे के मुद्दे पर बीजेपी की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर केंद्रीय गृह मंत्री के आगमन की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पंजाब नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहा है और युवाओं तथा राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है। हालांकि, शाह के दौरे का विस्तृत कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उनके मानसा और संगरूर जाने की संभावना है।

मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता के परिवार से मिल सकते हैं शाह

अमित शाह के मानसा दौरे के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात संभावित है। झोटा की 13 अक्टूबर को एक मेडिकल स्टोर के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना व्यस्त बाजार में हुई थी, जिससे इलाके में आक्रोश फैल गया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झोटा ने कथित तौर पर मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार से एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीले पदार्थ बेचे जाने को लेकर सवाल किया था। इसी विवाद के बाद गोलीबारी की घटना सामने आई। पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला व्यापक चर्चा में आ गया।

झोटा की हत्या के विरोध में कई जगह प्रदर्शन हुए और राज्यव्यापी बंद का भी आयोजन किया गया। मामले में अश्वनी कुमार को राजस्थान से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है। घटना के बाद नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और ऐसे कारोबार का विरोध करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

शाह की झोटा के परिवार से संभावित मुलाकात का उद्देश्य और इसके दौरान होने वाली घोषणाएं अभी स्पष्ट नहीं हैं। हालांकि, यह मामला पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़े अपराधों पर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।

संगरूर में गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात की संभावना

अमित शाह के संगरूर जाने की भी संभावना है। यहां वह दिरबा के रहने वाले गुलजार सिंह के परिवार से मिल सकते हैं। गुलजार सिंह दिहाड़ी मजदूर थे और उन्होंने सार्वजनिक रूप से पंजाब में नशीले पदार्थों की कथित आसान उपलब्धता को लेकर चिंता जताई थी।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की मौजूदगी में नशे की समस्या का मुद्दा उठाने के बाद गुलजार सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। इस घटना ने राज्य में नशे के खिलाफ कार्रवाई, प्रभावित परिवारों की स्थिति और सरकार की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति की आत्महत्या के कारणों को लेकर निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित तथ्यों और जांच के नतीजों को ध्यान में रखना जरूरी है। इस मामले में शाह की संभावित मुलाकात को पंजाब में नशे से जुड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

केंद्र ने पंजाब सरकार से मांगी घटनाओं की रिपोर्ट

पंजाब में हालिया घटनाओं के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इनमें परविंदर सिंह झोटा की हत्या, गुलजार सिंह की मौत और 15 अक्टूबर को गुरदासपुर में हुई बिक्रमजीत सिंह की हत्या का मामला शामिल है।

स्थानीय स्तर पर बिक्रमजीत सिंह की हत्या को भी कथित तौर पर नशे के कारोबार का विरोध करने से जोड़कर देखा गया है। हालांकि, इन मामलों में आरोपों और स्थापित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। संबंधित घटनाओं की परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

गृह मंत्री अमित शाह पहले भी पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति और आम आदमी पार्टी की सरकार की नीतियों पर सवाल उठा चुके हैं। झोटा की हत्या और गुलजार सिंह की मौत का उल्लेख करते हुए उन्होंने राज्य सरकार के कामकाज की आलोचना की थी।

अब केंद्र की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने और शाह के प्रस्तावित दौरे के कारण इन मामलों पर राजनीतिक तथा प्रशासनिक स्तर पर ध्यान बढ़ने की संभावना है।

एक महीने में दूसरी बार पंजाब पहुंचेंगे अमित शाह

अमित शाह का यह एक महीने के भीतर पंजाब का दूसरा दौरा होगा। इससे पहले 30 सितंबर को उन्होंने जालंधर में एक रैली को संबोधित किया था। यह कार्यक्रम बीजेपी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन के अवसर पर आयोजित किया गया था।

पार्टी के इस अभियान के तहत पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंचने की कोशिश की गई थी। सितंबर के दौरे के दौरान शाह ने नशे की समस्या से प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि यदि पंजाब में बीजेपी की सरकार बनती है, तो दिसंबर 2029 तक राज्य को नशामुक्त बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

इस घोषणा के जरिए बीजेपी ने नशे के मुद्दे को राज्य में अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल किया है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी इस विषय पर जनसमर्थन जुटाने और मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने की रणनीति अपना रही है।

बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ सकता है टकराव

रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने अपना जनसमर्थन खो दिया है। उन्होंने राज्य के लोगों से नशे के खिलाफ अभियान में अमित शाह के प्रयासों का समर्थन करने की अपील की।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी सरकार का कहना है कि वह नशे के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता की नीति पर काम कर रही है। राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि सीमा सुरक्षा और दूसरे राज्यों से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में केंद्र सरकार की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

यह मतभेद पंजाब में नशे की समस्या से निपटने के तरीकों और जवाबदेही को लेकर केंद्र तथा राज्य के बीच राजनीतिक खींचतान को दर्शाता है। जहां बीजेपी राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठा रही है, वहीं आप सरकार केंद्र की भूमिका और सीमावर्ती सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर जोर दे रही है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा अहम

पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक चिंता का विषय रही है। इसका असर युवाओं, परिवारों, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्थानीय समुदायों पर पड़ता है। हालिया घटनाओं ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अमित शाह के प्रस्तावित दौरे में यदि झोटा और गुलजार सिंह के परिवारों से मुलाकात होती है, तो इससे प्रभावित परिवारों के मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर और अधिक जगह मिल सकती है। साथ ही, नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई, तस्करी पर नियंत्रण और विरोध करने वाले लोगों की सुरक्षा जैसे सवाल भी प्रमुखता से उठ सकते हैं।

फिलहाल, शाह के दौरे का पूरा कार्यक्रम और मुलाकातों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि पंजाब में नशे की समस्या अब केवल सामाजिक चिंता नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच जवाबदेही तथा 2027 के विधानसभा चुनावों की राजनीतिक रणनीति से जुड़ा प्रमुख मुद्दा बन चुकी है।

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