केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के निंबाहेड़ा में वंदे मातरम् विवाद को लेकर कांग्रेस और सोनिया गांधी पर निशाना साधा। शाह ने आरोपों को गंभीर बताते हुए माफी की मांग की। कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी की 21 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण भी किया।
निंबाहेड़ा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को राजस्थान के निंबाहेड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और सोनिया गांधी पर तीखा हमला बोला। शाह ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने इसे बीच में रोकने का संकेत दिया। कांग्रेस की ओर से इस आरोप को लेकर अलग पक्ष सामने आया है।
निंबाहेड़ा में अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना
राजस्थान दौरे पर पहुंचे अमित शाह ने चित्तौड़गढ़ जिले के निंबाहेड़ा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 21 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। इसके बाद उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। शाह ने कहा कि कांग्रेस ने कथित तौर पर वोट बैंक की राजनीति के चलते राष्ट्रगीत को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका वह हकदार है।
शाह ने अपने भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के अवसर पर इसे फिर से प्रमुखता दिलाने का काम किया है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़ी भावनाओं का प्रतीक रहा है।
सोनिया गांधी पर शाह का सीधा हमला
अमित शाह ने कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी पर सीधे निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वंदे मातरम्’ का गायन चल रहा था और इसी दौरान सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को गीत रोकने का संकेत दिया।
शाह ने इस घटना को कांग्रेस की ओर से राष्ट्रगीत का अपमान बताया और सोनिया गांधी से देश की जनता से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग इस घटनाक्रम को देख रहे थे और कांग्रेस नेताओं को इस मामले में स्पष्टीकरण देना चाहिए।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस का पक्ष भाजपा के आरोपों से अलग है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि सोनिया गांधी का उद्देश्य ‘वंदे मातरम्’ के गायन को रोकना नहीं था। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
‘वंदे मातरम्’ पर क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के गायन से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हुआ। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि गीत के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इसे रोकने का संकेत दिया गया।
भाजपा ने इस घटना को राष्ट्रीय भावना और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़ते हुए कांग्रेस से माफी की मांग की। दूसरी ओर, कांग्रेस ने आरोपों की व्याख्या को लेकर अलग रुख अपनाया है। इस तरह यह मुद्दा स्वतंत्रता दिवस के तुरंत बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष का भी शाह ने किया जिक्र
अमित शाह ने अपने भाषण में ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक भूमिका को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में राष्ट्रभावना जगाने का माध्यम बना था। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसके 150वें वर्ष के अवसर पर लाल किले से इसे विशेष सम्मान देने का संदेश दिया।
यह मुद्दा पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। 13 अगस्त को संसद में भी ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण गायन हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे।

अटल बिहारी वाजपेयी की 21 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण
निंबाहेड़ा कार्यक्रम का दूसरा प्रमुख आकर्षण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 21 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण रहा। अमित शाह ने प्रतिमा का लोकार्पण किया और अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन तथा राष्ट्रसेवा को याद किया।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिमा और स्मारक के निर्माण पर करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समेत भाजपा के कई नेता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
शाह ने वाजपेयी को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया, जिन्होंने पत्रकारिता, कविता और राजनीति के माध्यम से राष्ट्रसेवा को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी सत्ता में रहे या विपक्ष में, उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
15 जिलों के लिए विकास परियोजनाओं का लोकार्पण
निंबाहेड़ा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राजस्थान के 15 जिलों से जुड़ी करीब 5,659 करोड़ रुपये की 944 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन परियोजनाओं को राज्य में बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।
अमित शाह ने केंद्र और राजस्थान सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए विकास कार्यों को सरकार की उपलब्धियों से जोड़ा। उन्होंने विशेष रूप से पेयजल और ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी सुविधाओं की पहुंच का मुद्दा उठाया।
अलवर में भी शाह का कार्यक्रम
निंबाहेड़ा के कार्यक्रम के बाद अमित शाह के राजस्थान के अलवर जाने का कार्यक्रम था। यहां उनके द्वारा 6,262 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किए जाने की जानकारी सामने आई। कार्यक्रम में युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपने और किसानों से जुड़ी योजनाओं के लाभ का वितरण भी प्रस्तावित था।
अलवर दौरे से पहले कुछ कांग्रेस नेताओं को पुलिस हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम से पहले रोककर रखा गया। वहीं, प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए।
हिरासत को लेकर भी सियासत गरमाई
अलवर में अमित शाह के कार्यक्रम से पहले कांग्रेस नेताओं की हिरासत का मुद्दा भी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गया। रिपोर्टों के मुताबिक, खैरथल-तिजारा क्षेत्र के कुछ कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन की ओर से कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई।
‘वंदे मातरम्’ विवाद से बढ़ी सियासी गर्मी
अमित शाह के निंबाहेड़ा भाषण के बाद ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं। भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा के आरोपों पर अलग रुख रखती है।
ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के बाद शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में संसद से लेकर राज्यों की राजनीति तक चर्चा में रह सकता है। खास तौर पर सोनिया गांधी को लेकर अमित शाह की टिप्पणी ने इस मामले को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है।












