आंगनबाड़ी में गैस सप्लाई बंद ‘ऊपर से आदेश’ कहकर टाला जा रहा, बच्चों के पोषण पर संकट

आंगनबाड़ी केंद्रों में रसोई गैस की सप्लाई बंद होने से बच्चों के पोषण पर असर पड़ रहा है। अधिकारियों द्वारा ‘ऊपर से आदेश’ का हवाला दिया जा रहा है स्थिति चिंताजनक।
आंगनबाड़ी में गैस सप्लाई बंद ‘ऊपर से आदेश’ कहकर टाला जा रहा, बच्चों के पोषण पर संकट
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ग्रामीण इलाकों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कई जगहों से यह शिकायत सामने आ रही है कि आंगनबाड़ी केंद्रों को रसोई गैस की सप्लाई नहीं दी जा रही है, जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला पोषण आहार प्रभावित हो रहा है। जब इस बारे में स्थानीय स्तर पर पूछताछ की जाती है, तो जवाब मिलता है—“ऊपर से ही बंद है।”

ग्राउंड पर स्थिति यह है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खाना बनाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिन केंद्रों पर पहले गैस सिलेंडर से खाना बनता था, वहां अब या तो लकड़ी-कोयले का सहारा लिया जा रहा है या फिर कई जगहों पर खाना बन ही नहीं पा रहा। इससे बच्चों को मिलने वाला गर्म भोजन बंद होने की कगार पर है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। हर बार यही कहा जाता है कि सप्लाई ऊपर से रुकी हुई है और जल्द ही शुरू होगी, लेकिन लंबे समय से स्थिति जस की तस बनी हुई है।

इसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं पर पड़ रहा है, जिन्हें आंगनबाड़ी के माध्यम से पोषण आहार दिया जाता है। पोषण योजना का मुख्य उद्देश्य ही कुपोषण को दूर करना है, लेकिन गैस की कमी के कारण यह व्यवस्था कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

कुछ जगहों पर ग्रामीणों ने खुद आगे आकर मदद करने की कोशिश की है, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीमित संसाधनों में काम करना मुश्किल हो गया है और वे अपने स्तर से ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनबाड़ी जैसी योजनाएं देश के भविष्य यानी बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। यदि समय रहते गैस सप्लाई बहाल नहीं की गई, तो इसका असर बच्चों के पोषण स्तर पर साफ दिखाई देगा।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का जल्द समाधान किया जाए और आंगनबाड़ी केंद्रों को नियमित रूप से गैस उपलब्ध कराई जाए, ताकि बच्चों को मिलने वाला भोजन बाधित न हो।

यह मामला सिर्फ गैस सप्लाई का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो देश के सबसे कमजोर वर्ग के लिए काम करती है। अगर उसी में कमी आने लगे, तो इसका असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ना तय है।

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