कबाड़ के कारोबार से खड़ा किया साम्राज्य, अब ₹43,500 करोड़ की संपत्ति का 75% समाज को देंगे अनिल अग्रवाल

वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल अपनी करीब ₹43,500 करोड़ की संपत्ति का 75% समाज को देने का संकल्प लिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर फोकस रहेगा।

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपनी करीब ₹43,500 करोड़ की संपत्ति का 75% सामाजिक कार्यों के लिए देने का संकल्प लिया है। उनका फोकस बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के रोजगार पर है।

Anil Agarwal Net Worth: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा समाज के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया है। कबाड़ के कारोबार से शुरुआत कर बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने वाले अग्रवाल अपनी करीब ₹43,500 करोड़ की संपत्ति में से 75% हिस्सा सामाजिक कार्यों और जनकल्याण पर खर्च करना चाहते हैं। बच्चों और महिलाओं से जुड़े कार्यक्रम इस पहल के केंद्र में रहेंगे।

कबाड़ के कारोबार से शुरू हुआ सफर

अनिल अग्रवाल की कारोबारी कहानी संघर्ष और लगातार विस्तार की मिसाल मानी जाती है। बिहार के पटना से निकलकर उन्होंने छोटे स्तर पर स्क्रैप कारोबार से अपने सफर की शुरुआत की। धीरे-धीरे कारोबार का विस्तार हुआ और उन्होंने वेदांता जैसे ग्लोबल कारोबारी ग्रुप की नींव रखी।

कबाड़ के कारोबार से खड़ा किया साम्राज्य, अब ₹43,500 करोड़ की संपत्ति का 75% समाज को देंगे अनिल अग्रवाल

आज अग्रवाल भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल हैं और उनकी संपत्ति करीब ₹43,500 करोड़ बताई गई है। हालांकि, अपनी आर्थिक सफलता के साथ अब उनका जोर संपत्ति को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाने पर है। उन्होंने अपनी संपत्ति का 75% हिस्सा सामाजिक कार्यों और जनकल्याण के लिए देने का संकल्प लिया है।

अग्रवाल का मानना रहा है कि कारोबार से अर्जित संपत्ति पर केवल परिवार का अधिकार नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा समाज के उन वर्गों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

बच्चों की शिक्षा और पोषण पर खास जोर

अनिल अग्रवाल के परोपकारी कामों में बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य प्रमुख प्राथमिकताएं रही हैं। जनवरी 2026 में अपने बेटे अग्निवेश अग्रवाल के निधन के बाद उन्होंने अपने इस संकल्प को दोहराया था।

उन्होंने उस समय परिवार के एक बड़े सपने का उल्लेख करते हुए कहा था कि देश में कोई बच्चा भूखा न सोए और आर्थिक कमजोरी के कारण किसी बच्चे की शिक्षा न रुके। इसी सोच के तहत उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बच्चों से जुड़े सामाजिक उद्देश्यों पर लगाए जाने की बात सामने आई है।

उनके मुताबिक समाज के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए बच्चों के शुरुआती वर्षों में निवेश बेहद जरूरी है। बेहतर पोषण और शिक्षा बच्चों के विकास के साथ उनके भविष्य के अवसरों को भी प्रभावित करते हैं।

महिला सशक्तिकरण और रोजगार भी एजेंडे में

अनिल अग्रवाल की प्रस्तावित परोपकारी पहल केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और युवाओं को सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

महिलाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराना उनके सामाजिक कार्यों का अहम हिस्सा है। वहीं युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना भी उनके व्यापक जनकल्याण के उद्देश्य में शामिल है। उनका मानना है कि समाज के विकास के लिए महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना जरूरी है।

‘नंद घर’ से आंगनवाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण

अनिल अग्रवाल की सामाजिक पहलों में ‘नंद घर’ परियोजना प्रमुख है। इसका उद्देश्य देश के आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है। इन केंद्रों के जरिए बच्चों को बेहतर शुरुआती शिक्षा और पोषण उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाता है।

नंद घर पहल में महिलाओं के लिए कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया गया है। इस तरह एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों और महिलाओं से जुड़े कई सामाजिक मुद्दों पर काम करने का लक्ष्य रखा गया है।

75% संपत्ति दान करने का संकल्प

अनिल अग्रवाल ने अपनी 75% संपत्ति सामाजिक कार्यों के लिए देने का फैसला ऐसे समय में दोहराया है, जब वह अपने कारोबारी सफर की सफलता को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर देख रहे हैं। उनके लिए संपत्ति केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का साधन भी है।

बच्चों की शिक्षा और पोषण से लेकर महिला सशक्तिकरण और युवाओं के रोजगार तक, उनके परोपकारी एजेंडे का दायरा व्यापक है। उनका यह संकल्प इस विचार को सामने रखता है कि बड़ी संपत्ति की विरासत केवल परिवार के लिए धन छोड़ना नहीं, बल्कि समाज के लिए लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव की नींव रखना भी हो सकती है।

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