पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी की साइकिल यात्रा पटना साहिब पहुंची, GDP के साथ GEP को विकास का पैमाना बनाने पर जोर

पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी की 3000 किमी साइकिल यात्रा पटना साहिब पहुंची। अभियान में GDP के साथ GEP को विकास का पैमाना बनाने की अपील की गई।

पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में नेपाल के जनकपुर से शुरू हुई राष्ट्रीय साइकिल यात्रा पटना साहिब पहुंची। अभियान के जरिए आर्थिक विकास के साथ प्रकृति संरक्षण को महत्व देने और GDP के साथ GEP को विकास का पैमाना बनाने का संदेश दिया जा रहा है।

पटना: पद्मभूषण से सम्मानित पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में निकाली जा रही राष्ट्रीय साइकिल यात्रा पटना साहिब स्थित तख्त श्री हरिमंदिर साहिब पहुंच गई है। नेपाल के जनकपुर से 2 अक्टूबर को शुरू हुआ यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और टिकाऊ विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है। यात्रा के जरिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के साथ सकल पर्यावरण उत्पाद (GEP) को भी विकास के आकलन में महत्व देने की अपील की जा रही है।

पटना साहिब पहुंचने पर साइकिल यात्रियों का स्वागत

पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में चल रही राष्ट्रीय साइकिल यात्रा 16 अक्टूबर को पटना साहिब स्थित तख्त श्री हरिमंदिर साहिब पहुंची। यहां गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह, सेवादारों और अन्य कार्यकर्ताओं ने यात्रियों का स्वागत किया। इस अवसर पर पर्यावरण कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे।

पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी की साइकिल यात्रा पटना साहिब पहुंची, GDP के साथ GEP को विकास का पैमाना बनाने पर जोर

‘जल, जीवन, जन-जागरण’ के संदेश के साथ निकाली गई इस यात्रा का उद्देश्य लोगों को प्रकृति के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराना है। अभियान के आयोजकों का कहना है कि आर्थिक प्रगति के साथ प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा पर ध्यान देना भी जरूरी है। इसी सोच को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर लोगों से संवाद किया जा रहा है।

GDP के साथ GEP को भी विकास का पैमाना बनाने की अपील

डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने अपने संबोधन में प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति को सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यात्रा के समन्वयक और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पत्रकार पंकज मालवीय ने GDP और GEP की भूमिका समझाई।

GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद किसी देश में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन तथा आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर प्रस्तुत करता है। वहीं, GEP यानी सकल पर्यावरण उत्पाद के जरिए जंगलों, जलस्रोतों, मिट्टी, जैव-विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र से मिलने वाले लाभों को महत्व देने की बात कही जाती है।

अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार, यदि किसी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं, लेकिन वहां के जंगल, नदियां और मिट्टी खराब होते जाते हैं, तो केवल आर्थिक आंकड़ों से विकास की पूरी स्थिति नहीं समझी जा सकती। इसलिए विकास योजनाओं में पर्यावरण की स्थिति को भी ध्यान में रखने की जरूरत है।

जनकपुर से शुरू हुई 3000 किलोमीटर की यात्रा

यह राष्ट्रीय साइकिल यात्रा 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर नेपाल के जनकपुर से शुरू हुई थी। आयोजकों की योजना करीब 3000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए विभिन्न राज्यों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने की है। निर्धारित मार्ग में देवघर, पटना, लखनऊ, दिल्ली और देहरादून जैसे शहर शामिल हैं।

आयोजकों के अनुसार, बिहार में कार्यक्रमों के बाद यात्री आरा और बक्सर होते हुए उत्तर प्रदेश की ओर आगे बढ़ेंगे। इस दौरान स्थानीय समुदायों, युवाओं और सामाजिक संगठनों को प्रकृति संरक्षण से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर जोर

बिहार जैसे राज्य में नदियों, कृषि और जलस्रोतों का सामाजिक तथा आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। वहीं, बाढ़, जलजमाव, भूजल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसी चुनौतियां भी कई क्षेत्रों में सामने आती हैं। ऐसे में तालाबों का पुनर्जीवन, नदियों की सुरक्षा, भूजल पुनर्भरण और हरित क्षेत्रों का विस्तार महत्वपूर्ण विषय हैं।

डॉ. अनिल जोशी हिमालयन एनवायरनमेंट स्टडीज एंड कंजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन (HESCO) के संस्थापक हैं। उनका कार्य पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से जुड़ा रहा है। इस यात्रा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जन-अभियान बनाने और विकास की योजनाओं में प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को शामिल करने का संदेश दिया जा रहा है।

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