जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निकाय चुनावों में परिसीमन और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों पर दबाव था और CMO से रोज निगरानी हो रही थी। कई जिलों में अकाल जैसी स्थिति होने की बात भी कही।
जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निकाय चुनावों की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाया गया और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से रोजाना निगरानी की जा रही थी। गहलोत ने परिसीमन में कथित गड़बड़ी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव में हार-जीत से ज्यादा चिंता निष्पक्ष प्रक्रिया की है। उन्होंने कई जिलों में अकाल जैसी स्थिति होने का मुद्दा भी उठाया।
निकाय चुनाव में परिसीमन और पुलिस की भूमिका पर गहलोत ने उठाए सवाल
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में निकाय चुनावों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार और जीत सामान्य बात है, लेकिन परिसीमन के दौरान कथित अनियमितताओं और पुलिस की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, चुनावी नतीजों से अधिक चिंता उन परिस्थितियों की है, जिनमें चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।
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गहलोत ने आरोप लगाया कि निकाय चुनावों के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली चिंताजनक रही। उन्होंने दावा किया कि पुलिस अधिकारी अब खुद स्वीकार कर रहे हैं कि चुनाव के समय उन पर भारी दबाव था। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए चुनावी व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि किसी भी चुनाव में राजनीतिक दलों की हार या जीत होती रहती है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है। गहलोत के अनुसार, परिसीमन और पुलिस की भूमिका से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
CMO से रोजाना मॉनिटरिंग होने का लगाया आरोप
अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि निकाय चुनावों के दौरान CMO से रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही थी। उनके बयान के अनुसार, पुलिस अधिकारियों पर कथित दबाव और चुनावी गतिविधियों की निगरानी चिंता का विषय है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव परिणामों को लेकर उनकी चिंता नहीं है, बल्कि जिस तरह से परिसीमन और पुलिस की भूमिका सामने आई, वह ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने इन परिस्थितियों को लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के लिहाज से गंभीर बताया।
हालांकि, पुलिस अधिकारियों पर दबाव और मुख्यमंत्री कार्यालय से चुनावी निगरानी संबंधी दावे गहलोत के आरोप हैं। उपलब्ध खबर के अंश में किसी पुलिस अधिकारी का नाम, संबंधित दस्तावेज या सरकार की प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।
निकाय चुनावों में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर संबंधित विभागों की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे आरोपों की स्थिति भी जांच या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
राजस्थान के कई जिलों में अकाल जैसी स्थिति का भी उठाया मुद्दा
निकाय चुनावों के अलावा अशोक गहलोत ने राजस्थान के कई जिलों में अकाल जैसी स्थिति होने की बात भी कही। उन्होंने प्रदेश में सूखे से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई। हालांकि, उपलब्ध समाचार अंश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन्होंने किन जिलों का उल्लेख किया या अकाल जैसी स्थिति के संबंध में कौन से आंकड़े प्रस्तुत किए।
अकाल या सूखे की स्थिति का आकलन वर्षा के आंकड़ों, जल उपलब्धता, फसलों की स्थिति और संबंधित सरकारी रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। ऐसे में गहलोत के दावे की पुष्टि के लिए प्रभावित जिलों से जुड़ी आधिकारिक जानकारी आवश्यक होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री के बयान में दो प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं। पहला निकाय चुनावों में परिसीमन और पुलिस की कथित भूमिका से संबंधित है, जबकि दूसरा प्रदेश के कुछ जिलों में सूखे जैसी परिस्थितियों को लेकर है।
फिलहाल उपलब्ध खबर में इन आरोपों पर राज्य सरकार या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। ऐसे में गहलोत के बयानों को उनके राजनीतिक आरोपों और चिंताओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।









