असम में जनगणना और धार्मिक डेमोग्राफी को लेकर फिर से विवाद पैदा हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक कार्यक्रम में दावा किया कि अगली जनगणना में बांग्लादेशी मुस्लिमों की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
गुवाहाटी: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के साथ विधानसभा चुनावों की दहलीज पर खड़ा असम अब बांग्लादेशी मुस्लिमों की बढ़ती संख्या के मुद्दे से गरमा सकता है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर राज्य की डेमोग्राफी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनके अनुसार, अगली जनगणना में असम की आबादी में बांग्लादेशी मुसलमानों का हिस्सा 40 फीसदी हो जाएगा।
सरमा ने पहले भी कहा था कि पिछले कुछ दशकों में पूर्वोत्तर राज्य में डेमोग्राफिक बदलाव हो रहा है और बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों की आबादी लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा, सरमा ने मुस्लिम आबादी से मुकाबला करने के लिए तीन बच्चे पैदा करने की अपील भी पहले कर चुके हैं।
जनगणना और डेमोग्राफिक बदलाव
सरमा ने पिछले वर्षों में लगातार यह बयान दिया है कि असम की जनसंख्या संरचना (Demography) में बदलाव हो रहा है। उनके अनुसार, राज्य में बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा, अगली जनगणना असम के लिए बुरी खबर लेकर आएगी। अगर मौजूदा ग्रोथ रेट जारी रहा, तो 2041 तक मुस्लिम आबादी हिंदुओं के लगभग बराबर हो जाएगी।
2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल आबादी 3.12 करोड़ थी, जिसमें मुस्लिम आबादी 1.07 करोड़ (34.22 प्रतिशत) और हिंदू आबादी 1.92 करोड़ (61.47 प्रतिशत) थी। सरमा के मुताबिक, पिछले दशक में मुस्लिम आबादी में तेजी से वृद्धि हुई है, और आने वाली जनगणना में यह 40 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।

संदिग्ध मियां के वोट हटाने की तैयारी
असम के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रशासन संदिग्ध मुस्लिम मतदाताओं को वोटर लिस्ट से हटाने के लिए कार्रवाई करेगा। उन्होंने सभी विधायकों और ब्लॉक लेवल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को चिन्हित करें और उचित प्रक्रिया के माध्यम से शिकायत दर्ज करें। सरमा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया कि बीजेपी सरकार केवल अपने समर्थकों के वोटर नाम बनाए रख रही है और अन्य पार्टी समर्थकों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, अगर किसी पार्टी को लगता है कि योग्य नाम शामिल नहीं किए गए हैं, तो वे अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित करने का ऐलान किया है। पहला चरण हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा, और अंतिम जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी। यह जनगणना मूल रूप से 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी।
जनगणना को लेकर इस बार राजनीतिक तनाव भी देखा जा रहा है। सरमा का बयान और उनके प्रशासन की तैयारी इसे चुनावी और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में भी विधानसभा चुनावों की दहलीज पर असम का जनगणना डेटा महत्वपूर्ण हो सकता है।











