असम के विकास में IIT गुवाहाटी बनेगा ज्ञान भागीदार, मुख्यमंत्री ने रखी नई तकनीकी पहल की रूपरेखा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने IIT गुवाहाटी से पूर्वोत्तर के विकास में तकनीक और शोध आधारित समाधान देने की अपील की। सरकार 100 छात्रवृत्तियां भी देगी।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने IIT गुवाहाटी से पूर्वोत्तर के विकास में ज्ञान और तकनीकी भागीदार की भूमिका मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने स्वास्थ्य, सेमीकंडक्टर, बाढ़ प्रबंधन, कृषि और शहरी नियोजन में शोध बढ़ाने पर जोर दिया और 100 छात्रवृत्तियों की घोषणा की।

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी से राज्य और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में अपनी भूमिका को और व्यापक बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने संस्थान से केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और अकादमिक शोध तक सीमित न रहने, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ी वास्तविक समस्याओं के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित करने की अपील की।

नॉर्थ गुवाहाटी में IIT गुवाहाटी के 33वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान को असम और पूर्वोत्तर के लिए ज्ञान तथा तकनीक के प्रमुख साझेदार के रूप में काम करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से उन्नत विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, कौशल विकास, आपदा प्रबंधन, शहरीकरण, कृषि और उभरती तकनीकों में संस्थान की सक्रिय भागीदारी की जरूरत बताई।

शिक्षा से आगे बढ़कर समाज के लिए समाधान विकसित करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि IIT गुवाहाटी की विशेषज्ञता का लाभ केवल कैंपस और शोध प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। संस्थान के शोध और तकनीकी क्षमताओं को राज्य की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ने की जरूरत है।

असम में बाढ़, जलवायु परिवर्तन, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, कृषि संबंधी चुनौतियां और स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत ऐसे क्षेत्र हैं, जहां तकनीक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। मुख्यमंत्री ने IIT गुवाहाटी से इन क्षेत्रों में ऐसे समाधान विकसित करने का आग्रह किया, जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियां देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं। इसलिए क्षेत्र की समस्याओं के लिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान तैयार करना आवश्यक है।

असम समझौते की आकांक्षाओं से जुड़ा IIT गुवाहाटी

सरमा ने IIT गुवाहाटी की स्थापना के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने याद दिलाया कि संस्थान की स्थापना 1994 में असम समझौते के दौरान व्यक्त की गई आकांक्षाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, IIT गुवाहाटी पूर्वोत्तर के लोगों की उस इच्छा का प्रतीक है, जिसमें क्षेत्र को शिक्षा, शोध और तकनीकी विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी हिस्सों के साथ आगे बढ़ाने की आकांक्षा थी।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र ने विकास की दौड़ में अपेक्षाकृत देर से शुरुआत की, लेकिन IIT गुवाहाटी जैसी संस्थाओं ने इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब संस्थान के सामने अगली पीढ़ी के विकास को गति देने की बड़ी जिम्मेदारी है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी सहयोग

असम सरकार और IIT गुवाहाटी के बीच पहले से चल रहे सहयोग का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं को रेखांकित किया। इनमें असम एडवांस्ड हेल्थकेयर इनोवेशन इंस्टीट्यूट और कम-क्षेत्र वाले MRI जैसी तकनीकों पर शोध शामिल है।

सर्जिकल रोबोटिक्स और पौधों से विकसित उपचार संबंधी अनुसंधान भी राज्य में स्वास्थ्य और चिकित्सा तकनीक की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि IIT गुवाहाटी की तकनीकी विशेषज्ञता को स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता सुधारने से जोड़ा जाना चाहिए।

ऐसे शोध का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना होना चाहिए जो भविष्य में आम लोगों तक पहुंच सके।

सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण पर फोकस

असम में उभरते औद्योगिक क्षेत्र का जिक्र करते हुए सरमा ने सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण को राज्य के भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि नए उद्योगों के विकास के साथ प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम मानव संसाधन की मांग भी बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि असम के युवाओं को नई औद्योगिक परियोजनाओं के केवल दर्शक के रूप में नहीं रहना चाहिए। उन्हें ज्ञान, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न स्तरों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जाना चाहिए।

इसके लिए कौशल विकास, उद्योग आधारित प्रशिक्षण और उच्च तकनीकी शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक होगा। IIT गुवाहाटी इस प्रक्रिया में शोध संस्थान के साथ-साथ तकनीकी प्रशिक्षण और नवाचार के केंद्र के रूप में भी भूमिका निभा सकता है।

बाढ़ और आपदा प्रबंधन में तकनीक की भूमिका

असम में हर वर्ष बाढ़ से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया। उन्होंने IIT गुवाहाटी से बाढ़ प्रतिरोधी ढांचे और वैज्ञानिक नदी प्रबंधन के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने की अपील की।

ड्रोन आधारित बाढ़ प्रतिक्रिया और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों जैसी तकनीकों को इस दिशा में उपयोगी माना जा सकता है। समय पर सूचना मिलने से प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकता है।

सरमा ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ऐसे बुनियादी ढांचे की आवश्यकता बताई, जो बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने में अधिक सक्षम हो।

जलवायु अनुकूल कृषि और वैज्ञानिक नदी प्रबंधन

मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में भी तकनीक और वैज्ञानिक शोध की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया। असम की कृषि व्यवस्था को जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और बाढ़ जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने IIT गुवाहाटी से जलवायु अनुकूल कृषि मॉडल और वैज्ञानिक नदी प्रबंधन के क्षेत्र में योगदान बढ़ाने की अपील की। स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित शोध से किसानों के लिए अधिक टिकाऊ उत्पादन प्रणाली विकसित करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े डेटा के बेहतर उपयोग की जरूरत भी बताई।

तेजी से बढ़ते शहरों के लिए नई योजना

असम में शहरीकरण की रफ्तार बढ़ने के साथ मुख्यमंत्री ने शहरी नियोजन को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने IIT गुवाहाटी से परिवहन, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता और जलवायु अनुकूल शहरी विकास से जुड़ी समस्याओं पर शोध करने का आग्रह किया।

शहरों के विस्तार के साथ केवल नई सड़कें और इमारतें बनाना पर्याप्त नहीं होगा। भविष्य के शहरों को पर्यावरणीय जोखिम, बढ़ती आबादी और संसाधनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित करना होगा।

तकनीक आधारित शहरी नियोजन से यातायात प्रबंधन, जल निकासी और ऊर्जा उपयोग जैसी समस्याओं के बेहतर समाधान खोजे जा सकते हैं।

महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबार में AI का इस्तेमाल

सरकार और IIT गुवाहाटी के सहयोग में महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए व्याख्यायोग्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी Explainable AI का उपयोग भी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। इसका उद्देश्य ऋण आकलन जैसी प्रक्रियाओं को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने में मदद करना है।

यदि ऐसी तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल होता है, तो छोटे और महिला नेतृत्व वाले व्यवसायों के लिए वित्तीय अवसरों तक पहुंच बेहतर हो सकती है। इससे तकनीक और समावेशी आर्थिक विकास के बीच संबंध मजबूत किया जा सकता है।

‘Tea, Tree and Tech’ से विकास का विजन

मुख्यमंत्री सरमा ने असम के भविष्य के लिए “Tea, Tree and Tech” की अवधारणा पेश की। इसके जरिए उन्होंने राज्य की पारंपरिक आर्थिक ताकत, प्राकृतिक एवं जैव विविधता संपदा और तकनीकी अवसरों को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता बताई।

असम की चाय अर्थव्यवस्था, समृद्ध वन एवं जैव विविधता और तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी क्षेत्र को एक-दूसरे का पूरक बनाकर राज्य के लिए नया विकास मॉडल तैयार किया जा सकता है।

IIT गुवाहाटी के छात्रों के लिए 100 छात्रवृत्तियां

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने IIT गुवाहाटी के छात्रों के लिए 100 छात्रवृत्तियां उपलब्ध कराने की घोषणा भी की। उन्होंने संस्थान के निदेशक से छात्रवृत्ति योजना का ढांचा तैयार करने को कहा।

यह पहल आर्थिक रूप से जरूरतमंद और प्रतिभाशाली छात्रों को उच्च तकनीकी शिक्षा जारी रखने में सहायता दे सकती है। साथ ही, इससे राज्य सरकार और संस्थान के बीच सहयोग को शिक्षा और मानव संसाधन विकास के स्तर पर और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पूर्वोत्तर के तकनीकी भविष्य पर नजर

मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट है कि IIT गुवाहाटी को पूर्वोत्तर की विकास रणनीति में केवल एक शिक्षण संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि शोध, नवाचार और तकनीकी समाधान के प्रमुख केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

स्वास्थ्य से लेकर सेमीकंडक्टर, कृषि से लेकर बाढ़ प्रबंधन और शहरी नियोजन से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक कई क्षेत्रों में संस्थान की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने की योजना क्षेत्र के लिए व्यापक तकनीकी दृष्टिकोण का संकेत देती है।

यदि सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और शोधकर्ताओं के बीच सहयोग मजबूत होता है, तो असम और पूरे पूर्वोत्तर में स्थानीय समस्याओं के लिए स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकते हैं। यही मॉडल क्षेत्र को ज्ञान आधारित और अधिक टिकाऊ अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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