ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच 26 दिसंबर से मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर चौथा एशेज टेस्ट खेला जाएगा। इस टेस्ट को ‘बॉक्सिंग डे टेस्ट’ भी कहा जाता है और यह हमेशा ही रोमांचक मुकाबलों का केंद्र रहा है। इस बार भी मैच कई मायनों में खास होने जा रहा है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर खेला जाने वाला चौथा एशेज टेस्ट कई मायनों में खास होने जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई टीम लगातार चौथी जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान में उतरेगी, जबकि इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज इस मुकाबले में बड़ी उपलब्धि हासिल करने का मौका पाएंगे।
खास तौर पर हैरी ब्रूक और बेन डकेट पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। दोनों बल्लेबाज भले ही एशेज 2025-26 में अब तक कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए हों, लेकिन मेलबर्न टेस्ट में उनके पास अपने करियर में एक खास मुकाम हासिल करने का सुनहरा अवसर है।
हैरी ब्रूक 3000 टेस्ट रन के बेहद करीब
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इंग्लैंड के मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज हैरी ब्रूक अब अपने टेस्ट करियर में 3000 रन पूरे करने के सिर्फ 7 रन दूर हैं। ब्रूक ने अब तक 33 टेस्ट मैचों की 56 पारियों में 2993 रन बनाए हैं, जिसमें 10 शतक और 14 अर्धशतक शामिल हैं। यदि ब्रूक बॉक्सिंग डे टेस्ट की पहली पारी में 7 रन बनाते हैं, तो वह टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड के लिए सबसे तेज 3000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाजों में दूसरे नंबर पर आ जाएंगे।
ब्रूक की यह उपलब्धि उन्हें महान बल्लेबाज डेनिस कॉम्पटन की बराबरी तक ले जाएगी, जिन्होंने 57 पारियों में 3000 टेस्ट रन पूरे किए थे। अगर तुलना करें, तो सबसे तेज 3000 टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाज इस प्रकार हैं:
- हर्बर्ट सटक्लिफ – 52 पारी
- डेनिस कॉम्पटन – 57 पारी
- जैक हॉब्स – 60 पारी
ब्रूक की तकनीक और स्थिरता इंग्लैंड के लिए मेलबर्न में अहम साबित हो सकती है। उनकी शानदार पारी न केवल व्यक्तिगत कीर्तिमान बनाएगी बल्कि टीम को शुरुआती बढ़त दिलाने में भी मदद करेगी।
बेन डकेट के लिए भी खास मौका
इंग्लैंड के ओपनिंग बल्लेबाज बेन डकेट भी टेस्ट क्रिकेट में 3000 रन के बेहद करीब हैं। डकेट को यह मुकाम हासिल करने के लिए केवल 31 रन की जरूरत है। पहले तीन टेस्ट में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाने वाले डकेट से अब बॉक्सिंग डे टेस्ट में एक मजबूत और आत्मविश्वासी पारी की उम्मीद है। डकेट और ब्रूक की यह व्यक्तिगत उपलब्धि इंग्लैंड के लिए अतिरिक्त उत्साह का स्रोत होगी। हालांकि, इंग्लैंड की मुख्य चुनौती सीरीज में सम्मान बचाना और ऑस्ट्रेलिया के दबदबे को चुनौती देना होगी।









