केरल में उधार की डेस्क से शुरू हुई कंपनी, अब भारतीय सेना के लिए ड्रोन और Madison Square Garden में टेक्नोलॉजी

केरल की AXL Systems ने उधार की डेस्क से शुरुआतकर 150 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी बनाई। जानें सेना के ड्रोन और Madison Square Garden की RFID तकनीक की कहानी।

केरल की AXL Systems ने एक छोटी सी शुरुआत से तकनीक की दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। कंपनी भारतीय सेना के साथ निगरानी ड्रोन विकसित करती है और अमेरिका के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में RFID आधारित सामान की तेज चेकआउट व्यवस्था भी उपलब्ध कराती है।

Tech: केरल के कोच्चि से शुरू हुई AXL Systems की कहानी भारतीय तकनीकी नवाचार और उद्यमिता की मिसाल है। करीब 15 साल पहले उधार की डेस्क पर काम शुरू करने वाली इस कंपनी में आज 150 से अधिक कर्मचारी हैं। कंपनी भारतीय सेना के साथ निगरानी ड्रोन विकसित करने के अलावा अमेरिका के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में RFID तकनीक पर आधारित चेकआउट सिस्टम भी संचालित करती है।

उधार की डेस्क से शुरू हुआ सफर, आज 150 से ज्यादा कर्मचारी

केरल के कोच्चि में शुरू हुई AXL Systems की कहानी बताती है कि तकनीकी कारोबार खड़ा करने के लिए बड़े शहर या शानदार ऑफिस का होना जरूरी नहीं है। कंपनी के सीईओ और चीफ स्ट्रैटेजिस्ट जो कुनचारिया के मुताबिक, करीब 15 साल पहले तीन लोगों ने किसी दूसरे के ऑफिस में एक छोटी सी जगह पर बैठकर काम शुरू किया था। उस समय उनके पास अपना कार्यालय तक नहीं था।

केरल में उधार की डेस्क से शुरू हुई कंपनी, अब भारतीय सेना के लिए ड्रोन और Madison Square Garden में टेक्नोलॉजी

धीरे-धीरे कंपनी ने अपना कारोबार बढ़ाया और कोच्चि में खुद का ऑफिस स्थापित किया। आज इसमें 150 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। कंपनी का भारत में पंजीकृत कारोबारी नाम Axldrone Pvt Ltd है, जबकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार AXL Systems के नाम से संचालित होता है।

कंपनी ने शुरुआत में कंसल्टिंग के क्षेत्र में काम किया। वर्ष 2013 के आसपास उसे यूरोप और अमेरिका के कुछ ग्राहक मिले। इसके बाद 2015 में कंपनी ने निजी कारोबार के रूप में अपनी गतिविधियां आगे बढ़ाईं। शुरुआती दौर में बड़े सॉफ्टवेयर कारोबारों के लिए तकनीकी समाधान तैयार करना उसके विकास का प्रमुख हिस्सा रहा।

कुनचारिया के अनुसार, तकनीक विकसित करना एक चुनौती है, लेकिन उसे लंबे समय तक भरोसेमंद तरीके से चलाए रखना उससे भी ज्यादा मुश्किल काम है।

भारतीय सेना के लिए निगरानी ड्रोन तैयार करती है कंपनी

AXL Systems का एक प्रमुख कारोबार निगरानी ड्रोन विकसित करना है। कंपनी ने भारतीय सेना के साथ मिलकर लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले ड्रोन पर काम किया है। इसकी शुरुआत तब हुई, जब कंपनी ने महसूस किया कि पारंपरिक निगरानी प्रणालियों में किसी क्षेत्र को देखने के लिए सीमित दृष्टिकोण मिलता है।

कंपनी के अनुसार, ड्रोन के जरिए किसी क्षेत्र की निगरानी तीन आयामों में की जा सकती है। इससे औद्योगिक सुरक्षा, वन्यजीव प्रबंधन और अवैध खनन जैसी गतिविधियों की पहचान में मदद मिल सकती है।

हालांकि, ऐसे ड्रोन बनाना केवल उड़ने वाली मशीन तैयार करने तक सीमित नहीं है। मोटर, कंट्रोलर, संचार प्रणाली, एवियोनिक्स और पावर सिस्टम को एक साथ इस तरह काम करना होता है कि ड्रोन लंबे समय तक भरोसेमंद बना रहे।

कंपनी ने अपने उत्पादों में भारतीय उपकरणों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। गैर-चीनी पुर्जों की तलाश के दौरान कई चुनौतियां सामने आईं। इसके बाद कंपनी ने पावर डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड, जीपीएस मॉड्यूल, फ्लाइट कंट्रोलर, रिमोट कंट्रोल और बैटरी जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों को खुद विकसित करने की दिशा में काम किया।

भारतीय सेना के साथ कंपनी का काम संयुक्त विकास के रूप में आगे बढ़ा। हालांकि, कंपनी के अधिकारियों ने सेना से जुड़े अपने काम के विस्तृत परिचालन पहलुओं पर टिप्पणी करने से परहेज किया।

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में RFID तकनीक से तेज होती है खरीदारी

ड्रोन के अलावा AXL Systems का दूसरा प्रमुख कारोबार रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन यानी RFID तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक के जरिए सामान पर लगे टैग को रेडियो सिग्नल की मदद से पहचाना जाता है। इससे हर उत्पाद को अलग-अलग स्कैन किए बिना खरीदारी की प्रक्रिया तेज की जा सकती है।

कंपनी की तकनीक का इस्तेमाल न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में किया गया है। यहां न्यूयॉर्क निक्स के प्रशंसकों के लिए सामान खरीदने की प्रक्रिया को तेज बनाने वाले स्वचालित चेकआउट स्टेशन संचालित किए जाते हैं।

कंपनी के सीईओ के मुताबिक, उसका मानक RFID सिस्टम एक सेकंड में 300 टैग तक पढ़ सकता है। बड़े स्टेडियमों और खेल आयोजनों में यह सुविधा खास मायने रखती है, क्योंकि मैच शुरू होने से पहले बड़ी संख्या में दर्शक टीम की जर्सी और दूसरे उत्पाद खरीदते हैं।

कंपनी का सिस्टम USB के जरिए सीधे बिक्री केंद्र के उपकरणों से जुड़ता है। इससे हर बार डेटा को क्लाउड पर भेजकर जवाब मिलने का इंतजार करने की जरूरत कम होती है और खरीदारी की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

RFID तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए भी किया जा सकता है। अगर कोई ग्राहक कई सामान लेकर बाहर निकल रहा हो और अलार्म बज जाए, तो सिस्टम यह पहचानने में मदद कर सकता है कि किस उत्पाद के टैग ने अलर्ट सक्रिय किया।

कंपनी भारत में भी इस तकनीक का परीक्षण कर रही है। हालांकि, पहले ऐसी प्रणालियों के अपेक्षित परिणाम न देने के अनुभवों के कारण ग्राहकों का भरोसा हासिल करना एक चुनौती बना हुआ है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भविष्य की योजनाएं

AXL Systems अपने दोनों कारोबारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की भूमिका को महत्वपूर्ण मानती है। ड्रोन के जरिए लोगों, वाहनों और दूसरी वस्तुओं की पहचान करने जैसे काम किए जा सकते हैं। वहीं, खुदरा कारोबार में ग्राहकों की खरीदारी के समय, व्यवहार और गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया जा सकता है।

आने वाले वर्षों में कंपनी ड्रोन और RFID कारोबार को अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ाने की योजना रखती है। ड्रोन के क्षेत्र में स्वचालन, AI आधारित विश्लेषण और GPS सिग्नल के बिना काम करने की क्षमता पर जोर दिया जा सकता है। दूसरी ओर, RFID कारोबार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार देने की योजना है।

कुनचारिया का कहना है कि नई तकनीक विकसित करने में समय और निवेश दोनों की जरूरत होती है। कंपनी को अपने उत्पादों के फायदे देखने में कई साल लगे। उनका मानना है कि स्टार्टअप शुरू करने वालों को बिना स्पष्ट मांग और ग्राहक की जरूरत समझे एक साथ कई अलग-अलग कारोबारों में नहीं उतरना चाहिए।

AXL Systems की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि छोटे स्तर पर शुरू हुआ तकनीकी उद्यम भी लगातार शोध, ग्राहकों की जरूरतों को समझने और अपने उत्पाद विकसित करने के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकता है।

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