Badrinath Dham:16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, 17 नवंबर से शीतकालीन प्रवास

Badrinath Dham के कपाट 16 नवंबर 2026 को रात 9:37 बजे बंद होंगे। 12 नवंबर से पंच पूजाएं शुरू होंगी और 17 नवंबर को देवडोलियां शीतकालीन प्रवास पर जाएंगी।

उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर 2026 को रात 9:37 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे। इससे पहले 12 नवंबर से पंच पूजाएं शुरू होंगी। 17 नवंबर को देवडोलियां शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होंगी।

चमोली: उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर 2026 को रात 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। विजयदशमी के अवसर पर मंदिर परिसर में आयोजित समारोह के दौरान कपाट बंद होने की तिथि घोषित की गई। इससे पहले 12 नवंबर से पंच पूजाएं शुरू होंगी। कपाट बंद होने के अगले दिन भगवान उद्धव और कुबेर की देवडोलियां शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होंगी।

16 नवंबर को रात 9:37 बजे बंद होंगे कपाट

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर 2026 को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने का समय रात 9 बजकर 37 मिनट निर्धारित किया गया है। विजयदशमी के अवसर पर बदरीनाथ मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में विधिवत पूजा-अर्चना और पंचांग गणना के बाद कपाट बंद होने की तिथि घोषित की गई।

Badrinath Dham:16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, 17 नवंबर से शीतकालीन प्रवास

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस अवसर पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को विजयदशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि कपाट बंद होने से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु बदरीनाथ, केदारनाथ और आसपास के मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कपाट बंद होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के तहत शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित किया जाएगा।

कपाट बंद होने की तिथि की घोषणा बदरीनाथ धाम के रावल अमरनाथ नंबूदरी ने की। इस दौरान बीकेटीसी के पदाधिकारी, मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़, धर्माधिकारी और वेदपाठी मौजूद रहे।

12 नवंबर से शुरू होंगी पंच पूजाएं

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले परंपरा के अनुसार पंच पूजाओं का आयोजन किया जाएगा। बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के अनुसार, इन पूजाओं का कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया है।

12 नवंबर को भगवान गणेश की पूजा के साथ पंच पूजाओं की शुरुआत होगी। 13 नवंबर को आदि केदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे। 14 नवंबर को खड्ग पुस्तक पूजन और वेद ऋचाओं के वाचन से संबंधित परंपराएं पूरी की जाएंगी।

15 नवंबर को माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा और भगवान बदरीविशाल के दरबार में आने का निमंत्रण दिया जाएगा। 16 नवंबर को माता लक्ष्मी गर्भगृह में प्रवेश करेंगी, जबकि भगवान कुबेर और उद्धव जी मंदिर परिसर में विराजमान होंगे। इसी दिन रात 9:37 बजे बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

17 नवंबर से शुरू होगा देवडोलियों का शीतकालीन प्रवास

कपाट बंद होने के अगले दिन 17 नवंबर को भगवान उद्धव और भगवान कुबेर की देवडोलियां बदरीनाथ धाम से योग बदरी, पांडुकेश्वर के लिए रवाना होंगी। शीतकाल के दौरान यहां दोनों की पूजा-अर्चना की जाएगी।

इसी दिन गरुड़ जी और आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी से जुड़ी यात्रा ज्योतिर्मठ स्थित श्री नृसिंह मंदिर की ओर प्रस्थान करेगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, रावल और नायब रावल आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी के साथ योग बदरी, पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगे। इसके बाद 18 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी ज्योतिर्मठ स्थित श्री नृसिंह मंदिर में विराजमान होगी।

इन धार्मिक परंपराओं के पूरा होने के साथ वर्ष 2026 की बदरीनाथ यात्रा का समापन हो जाएगा। इसके बाद शीतकाल में श्रद्धालु निर्धारित शीतकालीन पूजा स्थलों पर दर्शन कर सकेंगे।

भंडार व्यवस्था के लिए भी दी गई पगड़ी

समारोह के दौरान बीकेटीसी की ओर से यात्रा वर्ष 2027 के लिए बदरीनाथ धाम की भंडार व्यवस्था के संचालन से जुड़े प्रतिनिधियों को पगड़ी भेंट की गई। मेहता थोक से उमेश भट्ट और शिवम मेहता तथा कमदी-भंडारी थोक से महेंद्र भंडारी और जगदीश पंवार को पगड़ी भेंट की गई।

इससे पहले विजयदशमी के अवसर पर मंदिर परिसर में नवरात्रि और उर्वशी माता की पूजा का समापन हवन-यज्ञ के साथ किया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मंदिर समिति ने यात्रा से जुड़े विभागों और संस्थाओं के योगदान के लिए आभार भी जताया।

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