सीतामढ़ी जिले के बैरगनिया में बाल श्रम के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए धावा दल ने तीन बाल श्रमिकों को मुक्त कराया है। इस छापेमारी के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और कई दुकानदारों एवं प्रतिष्ठानों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। प्रशासन की इस कार्रवाई को बाल श्रम के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, धावा दल को गुप्त सूचना मिली थी कि बैरगनिया के कुछ दुकानों और छोटे प्रतिष्ठानों में नाबालिग बच्चों से काम कराया जा रहा है। इसके बाद टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान तीन बच्चों को काम करते हुए पाया गया, जिन्हें तुरंत मुक्त कराया गया।
मुक्त कराए गए बच्चों की उम्र कम बताई जा रही है और वे लंबे समय से मजदूरी करने को मजबूर थे। इनमें से कुछ बच्चे आर्थिक तंगी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण काम कर रहे थे, जबकि कुछ को बहला-फुसलाकर काम में लगा दिया गया था। धावा दल ने बच्चों को सुरक्षित अभिरक्षा में लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल श्रम कानून के तहत नाबालिग बच्चों से काम कराना पूरी तरह से अपराध है और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संबंधित दुकानदारों और मालिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिलना उनका अधिकार है, जिसे सुनिश्चित करना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।
मुक्त कराए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहां से उनके पुनर्वास और शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही उनके परिवारों से संपर्क कर उन्हें जागरूक भी किया जाएगा, ताकि भविष्य में वे अपने बच्चों को मजदूरी के लिए न भेजें।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि आगे भी ऐसे अभियान लगातार चलाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र में बाल श्रम की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
यह कार्रवाई न केवल तीन बच्चों को एक बेहतर भविष्य देने की दिशा में उठाया गया कदम है, बल्कि यह समाज को भी यह संदेश देती है कि बच्चों का स्थान स्कूल में है, न कि मजदूरी के बोझ तले।








