बांग्लादेश में राजनीतिक संकट के बीच 12 फरवरी को आम चुनाव होंगे। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने इसकी घोषणा की। 17 साल बाद तारीक रहमान की वापसी से चुनावी माहौल और तनाव दोनों तेज हुए।
Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के माहौल के बीच अब चुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है। देश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश में आम चुनाव 12 फरवरी को कराए जाएंगे। इस घोषणा के साथ ही देश की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के लिए चुनाव जरूरी हैं, जबकि विपक्ष इसे मौजूदा संकट से निकलने का अहम मोड़ मान रहा है।
मुहम्मद यूनुस का बयान
मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने अमेरिका के विशेष दूत सर्जियो गोर से बातचीत के दौरान कहा कि बांग्लादेश में लोकतंत्र को पटरी पर लाने के लिए तय समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराए जाएंगे। यूनुस प्रशासन का दावा है कि देश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके।
तारीक रहमान की 17 साल बाद स्वदेश वापसी
चुनाव से पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के लिए एक बड़ी राजनीतिक घटना सामने आई है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी नेता तारीक रहमान 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटने वाले हैं। वे पिछले करीब 17 वर्षों से लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे थे। माना जा रहा है कि उनकी वापसी बीएनपी के लिए बड़ी ताकत साबित हो सकती है। पार्टी के अंदर इसे चुनाव से पहले संजीवनी के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि तारीक रहमान पार्टी के प्रचार और रणनीति की कमान संभाल सकते हैं।
BNP को मिल सकती है नई ऊर्जा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तारीक रहमान की वापसी से बीएनपी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आएगा। लंबे समय से पार्टी नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही थी, जिसे अब पूरा किया जा सकता है। चुनावी माहौल में उनकी सक्रिय भूमिका बीएनपी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। हालांकि, सरकार समर्थक खेमे का कहना है कि उनकी वापसी से राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
पत्रकारों पर हमले और अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल
बांग्लादेश में राजनीतिक संकट के बीच पत्रकारों पर हो रहे हमलों ने भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। ब्रिटेन में रहने वाले बांग्लादेशी पत्रकार सुशांत दास गुप्ता ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश में उनके पैतृक घर पर भीड़ ने हमला कर लूटपाट की। उनके मुताबिक, हमले से सिर्फ 30 मिनट पहले उनके परिवार को घर छोड़कर भागना पड़ा। सुशांत का दावा है कि यह हमला मुहम्मद यूनुस प्रशासन की आलोचना करने और सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने की वजह से किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार आलोचकों को डराने और चुप कराने की कोशिश कर रही है।
उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा
एंटी इंडिया नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश के कई हिस्सों में हिंसा भड़क उठी है। आगामी चुनाव में उम्मीदवार रहे हादी की मौत के बाद उनके समर्थकों ने ढाका के कई इलाकों में प्रदर्शन किए। इस दौरान कई ऐतिहासिक स्थलों और मीडिया हाउसों जैसे ‘द डेली स्टार’ और ‘प्रथम आलो’ पर हमले किए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हादी के हत्यारे भारत भाग गए हैं, जिसके बाद देश में भारत विरोधी माहौल और तेज हो गया है।
भारत विरोधी भावनाओं का उभार
हादी की मौत के बाद से बांग्लादेश में भारत विरोधी बयानबाजी और प्रदर्शन बढ़े हैं। कई जगहों पर नारेबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। इससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और गहरा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय रिश्तों को और नुकसान पहुंचा सकती हैं।
भारत-बांग्लादेश के बीच वीजा सेवाएं निलंबित
भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों में इस बीच बड़ी दरार देखने को मिली है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बांग्लादेश ने नई दिल्ली और त्रिपुरा स्थित अपने सेंटर्स में वीजा सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दी हैं। इससे पहले भारत भी सुरक्षा चिंताओं के चलते बांग्लादेश के कई शहरों में अपनी वीजा सेवाएं रोक चुका है। अगरतला और कोलकाता में बांग्लादेशी मिशनों के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों ने तनाव को और बढ़ा दिया है।










