बांग्लादेश हिंसा की आग में जल रहा है। पिछले तीन दिनों से लगातार देश में अशांति का माहौल बना हुआ है और आज भारत विरोधी कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी को दफनाया जाएगा। उनके अंतिम संस्कार को लेकर राजधानी ढाका में हाई अलर्ट जारी किया गया है।
ढाका: बांग्लादेश में पिछले तीन दिनों से हिंसा का दौर जारी है। 18 दिसंबर की घटनाओं के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि स्थिति शांत हो जाएगी, लेकिन 19 दिसंबर को भी हिंसा जारी रही। उदिची शिल्पी गोष्ठी के दफ्तर पर हमला हुआ, दफ्तर में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई। आज राजधानी ढाका में उस्मान हादी का दफन किया जाएगा, उससे पहले जनाजे की नमाज अता की जाएगी।
हादी की मौत पर बांग्लादेश की सरकार ने आज एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया है और जनाजे में अधिकतम लोगों के शामिल होने की अपील की है। हालात के मद्देनजर यह चिंता जताई जा रही है कि वहां हिंसा फिर भड़क सकती है।
बांग्लादेश में हिंसा की लगातार घटनाएं
18 दिसंबर को हिंसा भड़कने के बाद माना जा रहा था कि हालात शांत हो जाएंगे, लेकिन 19 दिसंबर को भी राजधानी और अन्य हिस्सों में हिंसा जारी रही। खासतौर पर उदिची शिल्पी गोष्ठी के दफ्तर पर हमला हुआ, जिसमें तोड़फोड़ के बाद दफ्तर को आग के हवाले कर दिया गया। आज उस्मान हादी की अंतिम यात्रा से पहले उनके समर्थक मानिक मियां एवेन्यू पर इकट्ठा होने लगे हैं। समर्थकों की भारी संख्या को देखते हुए सुरक्षा बलों ने हाई अलर्ट जारी किया है।
उस्मान हादी की मृत्यु पर बांग्लादेश की मोहम्मद युनूस सरकार ने एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। सरकार ने अधिक से अधिक लोगों से जनाजे में शामिल होने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि हादी की अंतिम यात्रा के दौरान हिंसा भड़कने की संभावना अधिक है। सुरक्षा एजेंसियों ने सभी महत्वपूर्ण सड़क मार्गों को सील कर दिया है और पुलिस, बीएसएफ और सेना की संयुक्त पेट्रोलिंग की जा रही है।

अशांति फैलाने वाले प्रदर्शन
उस्मान हादी के समर्थक उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए राजधानी की सड़कों पर जमा हो गए हैं। 18 दिसंबर को भी हिंसा भड़क गई थी, जिसमें ढाका में दो प्रमुख अखबारों के दफ्तरों में आग लगा दी गई। डेली स्टार और प्रोथोम आलो जैसे प्रमुख मीडिया हाउस पर हमले ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिए चिंता बढ़ा दी है।
डेली स्टार ने हिंसा के बीच बयान जारी करते हुए कहा, “हम डरेंगे नहीं और झुकेंगे नहीं। यह हमारे लिए स्वतंत्र पत्रकारिता की सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में से एक है।











