काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर में बापिलु चाई तावसिक को मिली बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी

अरुणाचल प्रदेश की बापिलु चाई तावसिक काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर की कार्यकारी समिति की सदस्य चुनी गई हैं। यह उपलब्धि राज्य और पूर्वोत्तर भारत के लिए गौरव का विषय

अरुणाचल प्रदेश की आर्किटेक्ट बापिलु चाई तावसिक को भारत की काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (CoA) की कार्यकारी समिति का सदस्य चुना गया है। यह उपलब्धि न केवल उनके पेशेवर कौशल की पहचान है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी मान्यता भी है।

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश की प्रतिष्ठित आर्किटेक्ट बापिलु चाई तावसिक को भारत की काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (Council of Architecture–CoA) की कार्यकारी समिति (Executive Committee) का सदस्य चुना गया है। यह नियुक्ति न केवल उनके पेशेवर अनुभव और नेतृत्व क्षमता का सम्मान है, बल्कि देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र से आने वाले वास्तुकारों की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर विविध क्षेत्रों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर क्या है और इसकी भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर भारत में वास्तुकला (Architecture) पेशे और आर्किटेक्चरल शिक्षा को विनियमित करने वाली सर्वोच्च वैधानिक संस्था है। यह देशभर में आर्किटेक्चर शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने, पेशेवर मानकों को तय करने और आर्किटेक्ट के रूप में पंजीकरण संबंधी प्रक्रियाओं की निगरानी करती है। इसके अलावा यह संस्था आधुनिक शहरी विकास, टिकाऊ भवन निर्माण और पेशेवर आचार संहिता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी दिशा-निर्देश जारी करती है।

कार्यकारी समिति (Executive Committee) इस संस्था का प्रमुख निर्णय लेने वाला निकाय है, जो नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक कार्यों और विभिन्न सुधारात्मक पहलों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी जिम्मेदारी

बापिलु चाई तावसिक का कार्यकारी समिति में चुनाव इस बात का संकेत है कि उन्होंने वास्तुकला के क्षेत्र में अपने कार्य, नेतृत्व और पेशेवर प्रतिबद्धता के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बनाई है। यह जिम्मेदारी उन्हें देश में आर्किटेक्चर शिक्षा, पेशेवर मानकों और नीति निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में योगदान देने का अवसर प्रदान करेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार कार्यकारी समिति के सदस्य के रूप में उनका अनुभव देशभर के वास्तुकारों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने दी बधाई

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बापिलु चाई तावसिक को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए इसे पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि भारत की सर्वोच्च वैधानिक वास्तुकला संस्था की कार्यकारी समिति में चुना जाना उनकी पेशेवर उत्कृष्टता, ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि अरुणाचल प्रदेश की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाला महत्वपूर्ण अवसर भी है। उन्होंने तावसिक को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वह इस पद पर उत्कृष्ट कार्य करेंगी।

पूर्वोत्तर भारत की प्रतिभा को मिला राष्ट्रीय मंच

लंबे समय तक पूर्वोत्तर भारत की पेशेवर प्रतिभाओं को राष्ट्रीय संस्थानों में सीमित प्रतिनिधित्व मिलने की बात कही जाती रही है। ऐसे में बापिलु चाई तावसिक का इस महत्वपूर्ण पद पर चुना जाना क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।

यह उपलब्धि न केवल अरुणाचल प्रदेश बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के युवा वास्तुकारों और पेशेवरों को यह संदेश देती है कि समर्पण, योग्यता और निरंतर प्रयास के बल पर राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियां हासिल की जा सकती हैं।

वास्तुकला क्षेत्र में बढ़ेगी नई सोच और नवाचार

भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और टिकाऊ विकास (Sustainable Development) की बढ़ती आवश्यकता के बीच काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में अनुभवी पेशेवरों का नेतृत्व देश में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यकारी समिति में विविध भौगोलिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व होने से नीति निर्माण में व्यापक दृष्टिकोण विकसित होगा, जिसका लाभ पूरे देश के वास्तुकला क्षेत्र को मिलेगा।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी यह उपलब्धि

बापिलु चाई तावसिक की सफलता उन छात्रों और युवा पेशेवरों के लिए प्रेरणा है जो आर्किटेक्चर और डिजाइन के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रतिभा और समर्पण के आधार पर राष्ट्रीय संस्थानों में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया जा सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी उपलब्धियां युवाओं को अपने पेशेवर कौशल को लगातार बेहतर बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर योगदान देने के लिए प्रेरित करती हैं।

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