बिहार के बाढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे को सांप ने काटा, मौत के बाद NH-30A पर प्रदर्शन

बिहार के बाढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र में सांप काटने से 5 वर्षीय इशु कुमार की मौत हो गई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाकर NH-30A जाम किया।

बिहार के बाढ़ क्षेत्र के बेढ़ना गांव में आंगनबाड़ी केंद्र में सांप काटने से पांच वर्षीय इशु कुमार की मौत हो गई। परिजनों ने कर्मियों पर समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाने का आरोप लगाया, जिसके बाद ग्रामीणों ने NH-30A जाम कर प्रदर्शन किया।

बिहार: बेढ़ना गांव के पोथमा टोले में आंगनबाड़ी केंद्र में सांप काटने के बाद पांच वर्षीय इशु कुमार की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय घर भेज दिया गया। बच्चे की मौत की खबर फैलने पर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने शव सड़क पर रखकर NH-30A जाम किया और जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई तथा मुआवजे की मांग की।

आंगनबाड़ी केंद्र में सांप काटने के बाद घर भेजने का आरोप

बिहार के बाढ़ थाना क्षेत्र के बेढ़ना गांव स्थित पोथमा टोले में गुरुवार को पांच वर्षीय इशु कुमार की सर्पदंश से मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, बच्चा रोज की तरह आंगनबाड़ी केंद्र गया था। इसी दौरान केंद्र परिसर में उसे सांप ने काट लिया।

परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद आंगनबाड़ी केंद्र के कर्मचारियों ने न तो परिवार को तुरंत सूचना दी और न ही बच्चे को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। उनके मुताबिक, बच्चे को घर भेज दिया गया। इशु घर पहुंचा और अपनी मां को बताया कि उसे सांप ने काट लिया है। घर और केंद्र के बीच की दूरी करीब 50 मीटर बताई गई है।

घटना के बाद बच्चे की हालत को लेकर परिवार और आसपास के लोग परेशान हो गए। परिजनों के अनुसार, स्थानीय लोगों की सलाह पर वे पहले उसे झाड़-फूंक के लिए बड़हिया ले गए। वहां उसे मृत बताया गया। इसके बाद अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने भी मृत घोषित कर दिया।

बच्चे की मौत के बाद NH-30A जाम, कार्रवाई की मांग

इशु की मौत की खबर फैलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। परिजनों ने बच्चे को शेखपुरा स्थित अस्पताल और फिर अनुमंडलीय अस्पताल, बाढ़ ले जाने की बात कही, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर NH-30A पर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि घटना के लिए जिम्मेदार आंगनबाड़ी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उन्हें निलंबित किया जाए। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चे को समय पर चिकित्सा सहायता मिलती, तो उसे बचाने की कोशिश की जा सकती थी। हालांकि, बच्चे की मौत के कारणों और समय पर उपचार मिलने की स्थिति का आधिकारिक निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा

सड़क जाम और प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस तथा प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने और जाम समाप्त कराने का प्रयास किया। प्रदर्शन के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनी।

फिलहाल इस घटना में परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े आगे के विवरण का इंतजार है। घटना ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की सुरक्षा, आपात स्थिति में अभिभावकों को तुरंत सूचना देने और सर्पदंश जैसी घटनाओं में तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत को सामने ला दिया है।

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