राजस्थान के Bikaner कोर्ट परिसर को ईमेल के जरिए फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली। पुलिस, डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते ने सर्च ऑपरेशन चलाया। कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
बीकानेर: राजस्थान के बीकानेर स्थित अदालत परिसर को एक बार फिर ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सोमवार को हड़कंप मच गया। धमकी भरे संदेश में अदालत परिसर में साइनाइड गैस से भरे IED बमों से विस्फोट करने की चेतावनी दी गई थी। सूचना मिलते ही कोर्ट परिसर को एहतियातन खाली कराया गया और पुलिस, बम निरोधक दस्ता तथा डॉग स्क्वॉड की मदद से व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया।
यह पिछले एक महीने में दूसरी बार है, जब बीकानेर कोर्ट को इस तरह की धमकी मिली है। इससे पहले मार्च में भी अदालत परिसर और शहर के अन्य सार्वजनिक संस्थानों को धमकी भरे ईमेल मिले थे। लगातार मिल रही धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों और न्यायिक तंत्र दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
धमकी भरे ईमेल में क्या लिखा था?
बीकानेर कोर्ट की आधिकारिक ईमेल आईडी पर रविवार रात लगभग 9:39 बजे एक धमकी भरा संदेश प्राप्त हुआ। ईमेल में दावा किया गया कि:
सोमवार दोपहर 1:15 बजे विस्फोट किया जाएगा
अदालत परिसर में 14 IED बम लगाए गए हैं
बमों में साइनाइड गैस भरी गई है
कुछ व्यक्तियों की रिहाई की मांग की गई
ईमेल में ऐसे संवेदनशील और विवादास्पद दावे भी किए गए, जिनका संबंध अन्य राज्यों के कथित मामलों से जोड़ा गया। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस संदेश की सत्यता की स्वतंत्र जांच की जा रही है और ईमेल में लिखी बातों को सत्य मानने का कोई आधार नहीं है।
धमकी की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इसे उच्च प्राथमिकता पर लिया।
कोर्ट परिसर कराया गया खाली, सघन तलाशी अभियान
सोमवार सुबह जैसे ही अदालत प्रशासन को ईमेल की जानकारी मिली, तुरंत सुरक्षा प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए। सबसे पहले:
![]()
कोर्ट परिसर को खाली कराया गया
कर्मचारियों, वकीलों और आम लोगों को बाहर निकाला गया
मुख्य प्रवेश द्वार सील किए गए
आसपास के क्षेत्र में पुलिस तैनात की गई
तलाशी अभियान में शामिल टीमें:
स्थानीय पुलिस
बम निरोधक दस्ता
डॉग स्क्वॉड
साइबर सेल
खुफिया एजेंसियां
पूरे कोर्ट परिसर, रिकॉर्ड रूम, पार्किंग, गलियारों, न्यायालय कक्षों और बाहरी क्षेत्रों की गहन जांच की गई।
प्रारंभिक तलाशी में कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां इसे फर्जी अलर्ट मानकर हल्के में नहीं ले रही हैं।
मार्च में भी मिली थी ऐसी ही धमकी
यह पहली बार नहीं है जब बीकानेर में अदालत या सार्वजनिक संस्थानों को निशाना बनाने की धमकी मिली हो। मार्च के पहले सप्ताह में भी:
बीकानेर कोर्ट
लूणकरनसर कोर्ट
बीकानेर हेड पोस्ट ऑफिस
को ईमेल के जरिए धमकियां मिली थीं।
उस समय भी:
सर्च ऑपरेशन हुआ
कोई विस्फोटक नहीं मिला
जांच शुरू हुई
लेकिन अब तक उन धमकियों के पीछे जिम्मेदार व्यक्ति या नेटवर्क का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है।
लगातार दूसरी बार मिली धमकी ने जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या यह किसी संगठित नेटवर्क, साइबर शरारत या दहशत फैलाने की सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
ईमेल स्रोत की साइबर जांच शुरू
पुलिस ने धमकी भरे ईमेल की तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
ईमेल का IP एड्रेस ट्रेस कर रहे हैं
सर्वर लोकेशन का पता लगा रहे हैं
VPN या फर्जी डोमेन के इस्तेमाल की जांच कर रहे हैं
पिछले धमकी मेल से समानता तलाश रहे हैं
साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि:
ऐसे मामलों में ईमेल अक्सर फर्जी पहचान से भेजे जाते हैं
प्रॉक्सी सर्वर और एन्क्रिप्शन इस्तेमाल हो सकता है
डिजिटल फॉरेंसिक से स्रोत तक पहुंचने में समय लग सकता है
पुलिस ने कहा है कि जांच के सभी पहलुओं पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।
बार एसोसिएशन ने जताई चिंता
बीकानेर बार एसोसिएशन ने लगातार मिल रही धमकियों पर गंभीर चिंता जताई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पुरोहित ने कहा कि:
न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए
पिछली धमकियों के आरोपियों का पता अब तक नहीं चलना चिंताजनक है
सुरक्षा व्यवस्था स्थायी रूप से मजबूत की जानी चाहिए
वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों ने भी अदालत परिसरों में:
CCTV कवरेज बढ़ाने
प्रवेश जांच सख्त करने
साइबर अलर्ट सिस्टम मजबूत करने
की मांग उठाई है।
न्यायिक संस्थानों पर धमकियों का व्यापक असर
कोर्ट परिसरों को धमकी मिलना केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था और आम नागरिकों के विश्वास से भी जुड़ा विषय है।
ऐसे मामलों का प्रभाव:
न्यायिक कार्यवाही बाधित होती है
आम लोगों में डर का माहौल बनता है
अदालतों की सुरक्षा चुनौती बढ़ती है
प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक परिसरों जैसे संवेदनशील संस्थानों के लिए:
स्थायी सुरक्षा ऑडिट
ईमेल मॉनिटरिंग सिस्टम
साइबर खुफिया तंत्र
और मजबूत किया जाना चाहिए।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती
भारत में हाल के वर्षों में ईमेल, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए धमकी देने के मामलों में वृद्धि देखी गई है। कई बार ये:
फर्जी अलर्ट
शरारती तत्व
संगठित साइबर अपराध
का हिस्सा होते हैं।
बीकानेर का मामला इस बात की याद दिलाता है कि डिजिटल युग में सुरक्षा खतरे केवल भौतिक नहीं, बल्कि वर्चुअल माध्यम से भी गंभीर हो सकते हैं।









