बेगूसराय में एक पीड़िता ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि उसकी शिकायत के बावजूद न तो थाना स्तर पर सहयोग मिल रहा है और न ही अंचल कार्यालय में संबंधित सीओ उपलब्ध हो रहे हैं।
पीड़िता का कहना है कि वह न्याय की उम्मीद लेकर लगातार दफ्तरों के चक्कर लगा रही है, लेकिन हर जगह से उसे निराशा ही हाथ लग रही है।
पीड़िता के अनुसार उसने अपनी समस्या को लेकर सबसे पहले स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस की ओर से न तो मामले में गंभीरता दिखाई गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई। बार-बार थाना जाने पर उसे सिर्फ आश्वासन दिया गया, लेकिन जांच या आवश्यक कदम आगे नहीं बढ़े। इससे मानसिक और सामाजिक दबाव में जी रही पीड़िता की परेशानी और बढ़ गई है।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि मामला जमीन और प्रशासनिक दस्तावेजों से जुड़ा होने के कारण वह अंचल कार्यालय पहुंची, लेकिन वहां भी उसे निराशा का सामना करना पड़ा। उसका कहना है कि कई बार कार्यालय जाने के बावजूद सीओ कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। कर्मचारियों से पूछने पर कभी बैठक में होने तो कभी बाहर रहने की बात कहकर उसे लौटा दिया गया। इससे उसकी शिकायत लंबित ही बनी हुई है।
पीड़िता का कहना है कि जब निचले स्तर पर सुनवाई नहीं होती, तो आम लोग आखिर जाएं तो कहां जाएं। उसने प्रशासन से मांग की है कि उसकी शिकायत पर निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे पीड़ितों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें। पीड़िता ने यह भी कहा कि समय पर सहयोग न मिलने से उसका मामला और जटिल होता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक मामला नहीं है, बल्कि अक्सर ऐसे उदाहरण सामने आते हैं, जहां पीड़ितों को थाना और अंचल कार्यालय के बीच भटकना पड़ता है। लोगों के अनुसार यदि समय पर सुनवाई और कार्रवाई हो जाए, तो कई विवाद शुरुआती स्तर पर ही सुलझ सकते हैं। प्रशासनिक उदासीनता के कारण ही पीड़ितों का भरोसा व्यवस्था से कमजोर होता जा रहा है।
फिलहाल पीड़िता ने अपनी शिकायत को लेकर उच्च अधिकारियों तक पहुंचने की बात कही है। उसका कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला, तो वह जिला प्रशासन और अन्य सक्षम अधिकारियों से गुहार लगाएगी। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आम लोगों की शिकायतों पर त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को कितनी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।











