बेनिन में सेना ने अचानक तख्तापलट कर सरकार भंग कर दी। राष्ट्रपति सहित सभी राज्य संस्थाएं प्रभावहीन, देश अब सेना के नियंत्रण में। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने लोकतंत्र और स्थिरता बनाए रखने की अपील की है।
World News: पश्चिम अफ्रीका के देश बेनिन में रविवार को अचानक तख्तापलट हो गया। सरकारी टीवी पर सैनिकों के एक समूह ने प्रकट होकर देश की वर्तमान सरकार को भंग करने की घोषणा की। यह पश्चिम अफ्रीका में हाल के वर्षों में हुए सैन्य तख्तापलटों में सबसे नया और चौकाने वाला मामला है। सैनिकों ने कहा कि अब देश की सत्ता पूरी तरह सेना के हाथ में है और राष्ट्रपति सहित सभी राज्य संस्थाएं प्रभावहीन कर दी गई हैं।
सेना ने राष्ट्रपति को किया बर्खास्त
खुद को “मिलिट्री कमिटी फॉर रीफाउंडेशन” (Reformation के लिए सैन्य समिति) कहने वाले सैनिकों ने बताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल पास्कल टिग्री को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सैनिकों ने यह भी साफ किया कि अब देश का प्रशासन पूरी तरह उनके नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि यह कदम देश में स्थिरता और सुधार लाने के लिए उठाया गया है।
बेनिन का इतिहास रहा अस्थिर
1960 में फ्रांस से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से बेनिन में कई तख्तापलट हो चुके हैं। शुरुआती दशकों में देश राजनीतिक रूप से अस्थिर रहा। 1991 तक मार्क्सवादी-लेनिनवादी नेता माथ्यू केरेकू के शासन के बाद देश ने कुछ स्थिरता देखी। केरेकू ने अपने शासनकाल के दौरान देश का नाम बदलकर “पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ बेनिन” रखा था।
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राष्ट्रपति पेट्रिस तालों 2016 से सत्ता में थे। अप्रैल में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के बाद उन्हें पद छोड़ना था। उनके दल का उम्मीदवार, पूर्व वित्त मंत्री रोमुआल्ड वाडाग्नी, चुनाव का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। विपक्ष के उम्मीदवार रेनॉड एगबोड्जो को चुनाव आयोग ने पर्याप्त समर्थकों की कमी के कारण अयोग्य घोषित कर दिया था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में तख्तापलट हुआ।
संसद का कार्यकाल बढ़ा, लेकिन सीमा बनी
पिछले महीने ही बेनिन की संसद ने राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल से बढ़ाकर 7 साल कर दिया था। हालांकि, राष्ट्रपति के लिए दो कार्यकाल की सीमा बनाए रखी गई थी। सैनिकों का कहना है कि यह तख्तापलट देश में लोकतंत्र की रक्षा और सुधार लाने के लिए किया गया है।
पश्चिम अफ्रीका में सैन्य तख्तापलट की श्रृंखला
बेनिन का यह तख्तापलट पश्चिम अफ्रीका में सैन्य कब्जों की हालिया श्रृंखला का हिस्सा है। पिछले सप्ताह ही गिनी-बिसाऊ में सैन्य तख्तापलट हुआ था, जिसमें विवादित चुनाव के बाद पूर्व राष्ट्रपति उमारो एम्बालो को हटाया गया। उस चुनाव में एम्बालो और विपक्षी उम्मीदवार दोनों ने खुद को विजेता घोषित किया था।
अफ्रीकी देशों में इस तरह के तख्तापलट से अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों ने शांति और लोकतंत्र बनाए रखने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेनिन में तख्तापलट से न केवल देश की आंतरिक राजनीति प्रभावित होगी बल्कि पश्चिम अफ्रीका में क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर पड़ेगा।







