भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को मंजूरी नहीं मिलने पर हाईकोर्ट पहुंची पंजाब सरकार, केंद्र के फैसले को दी चुनौती

भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने पर पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सरकार ने विदेश मंत्रालय के फैसले को चुनौती दी।

पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को केंद्र की मंजूरी नहीं मिलने के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सरकार ने विदेश मंत्रालय के फैसले को मनमाना बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।

चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रस्तावित फ्रांस यात्रा को राजनीतिक मंजूरी नहीं दिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। यह यात्रा 17 से 21 अक्टूबर 2026 तक पेरिस में होने वाली अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार प्रदर्शनी ‘SIAL Paris 2026’ में शामिल होने के लिए प्रस्तावित थी। राज्य सरकार का कहना है कि यह दौरा पंजाब के कृषि और खाद्य कारोबार को बढ़ावा देने से जुड़ा था और मंजूरी देने से इनकार करने के फैसले में कोई कारण नहीं बताया गया।

भगवंत मान की फ्रांस यात्रा पर केंद्र के फैसले को चुनौती

पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को मंजूरी नहीं दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट का रुख किया है। राज्य सरकार ने भारत संघ के खिलाफ 56 पन्नों की याचिका दाखिल कर विदेश मंत्रालय के उस फैसले को रद्द करने की मांग की है, जिसके तहत मुख्यमंत्री को फ्रांस जाने के लिए राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया गया था।

 भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को मंजूरी नहीं मिलने पर हाईकोर्ट पहुंची पंजाब सरकार, केंद्र के फैसले को दी चुनौती

प्रस्तावित यात्रा 17 से 21 अक्टूबर 2026 तक पेरिस में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार प्रदर्शनी ‘SIAL Paris 2026’ से संबंधित थी। पंजाब सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री को इस कार्यक्रम में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना था। राज्य का तर्क है कि यह दौरा पंजाब के खाद्य उत्पादों और कृषि कारोबार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया था।

सरकार ने याचिका में केंद्र के निर्णय को मनमाना बताते हुए कहा है कि मंजूरी से इनकार करने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। इसी आधार पर विदेश मंत्रालय के फैसले को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

मार्कफेड की भागीदारी से जुड़ा था प्रस्तावित दौरा

याचिका के अनुसार, मुख्यमंत्री की फ्रांस यात्रा पंजाब की प्रमुख सहकारी संस्था पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड यानी मार्कफेड की भागीदारी से जुड़ी थी। राज्य सरकार का कहना है कि इस प्रदर्शनी के माध्यम से पंजाब के खाद्य उत्पादों और कारोबारी संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाना था।

पंजाब के सहकारिता विभाग ने विदेश मंत्रालय को 3 और 8 सितंबर को पत्र लिखकर यात्रा के लिए मंजूरी देने का अनुरोध किया था। इसके बाद 9 सितंबर को राजनीतिक मंजूरी के लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया गया था। सरकार के अनुसार, प्रस्तावित यात्रा की प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत जरूरी मंजूरियां हासिल की गई थीं।

याचिका में कहा गया है कि यात्रा का खर्च मार्कफेड द्वारा उठाया जाना था। इसलिए राज्य सरकार ने इस दौरे को पंजाब के व्यापारिक हितों से जुड़ा बताया है।

मंजूरी नहीं देने पर कारण न बताने का आरोप

पंजाब सरकार ने अदालत में दलील दी है कि फ्रांस में भारतीय मिशन से परामर्श किया गया था और प्रशासनिक मंजूरी तथा कैडर क्लीयरेंस भी प्राप्त कर ली गई थी। इसके बावजूद ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन को अस्वीकृत दिखा दिया गया।

राज्य सरकार का आरोप है कि विदेश मंत्रालय ने मंजूरी से इनकार करने का कारण नहीं बताया और न ही इस मामले में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। याचिका में इस कार्रवाई को मनमाना और बिना पर्याप्त कानूनी आधार के लिया गया फैसला बताया गया है।

अब मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पंजाब सरकार ने केंद्र के फैसले को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की है। अदालत का अंतिम निर्णय और मामले में केंद्र सरकार का पक्ष सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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