Success Story: NEET पास कर भानवी शेखावत ने डॉक्टर बनने के साथ सेना में जाने का सपना किया पूरा

राजस्थान की भानवी शेखावत ने NEET पास कर AFMC पुणे से MBBS किया। डॉक्टर बनने के साथ सेना में लेफ्टिनेंट बनकर देशसेवा का सपना भी पूरा किया।

राजस्थान की भानवी शेखावत ने NEET पास करने के बाद AFMC पुणे से MBBS की पढ़ाई पूरी की और सेना की मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट बनीं। बचपन में देखा डॉक्टर और सेना में जाने का सपना उन्होंने एक साथ पूरा किया।

Success Story: राजस्थान के झुंझुनू जिले के जाखल गांव से ताल्लुक रखने वाली भानवी शेखावत ने पढ़ाई और देशसेवा के अपने दोनों सपनों को पूरा किया। NEET पास करने के बाद उन्होंने AFMC पुणे से MBBS किया और सेना की मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट बनीं। सरकारी शिक्षक माता-पिता के परिवार से आने वाली भानवी ने बचपन में दादा की वर्दी देखकर सेना में जाने का सपना देखा था।

बचपन से था डॉक्टर और सेना में जाने का सपना

भानवी शेखावत राजस्थान के झुंझुनू जिले की नवलगढ़ तहसील के जाखल गांव की रहने वाली हैं। उनका परिवार बाद में चुरू जिले के राजलदेसर कस्बे में शिफ्ट हो गया। ऐसे परिवार में पली-बढ़ीं भानवी के लिए शिक्षा को हमेशा खास महत्व मिला। उनके पिता दीपेंद्र सिंह शेखावत और मां रेनू राठौड़ दोनों सरकारी शिक्षक हैं।

Success Story: NEET पास कर भानवी शेखावत ने डॉक्टर बनने के साथ सेना में जाने का सपना किया पूरा

बचपन में दादा को सेना की वर्दी में देखकर भानवी के मन में भी सेना में जाने की इच्छा पैदा हुई। इसी के साथ उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना भी देखा। NEET में सफलता हासिल करने के बाद उनके सामने देश के कई मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई करने के विकल्प थे, लेकिन उन्होंने Armed Forces Medical College यानी AFMC, पुणे को चुना।

AFMC से MBBS कर बनीं लेफ्टिनेंट

भानवी ने AFMC पुणे से MBBS की पढ़ाई पूरी की। मेडिकल शिक्षा के साथ उन्होंने सेना में सेवा करने का अपना सपना भी आगे बढ़ाया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सेना की मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट बनीं।

उनकी कहानी इस मायने में खास है कि उन्होंने मेडिकल करियर और देशसेवा को अलग-अलग रास्तों के रूप में नहीं देखा। NEET की तैयारी से लेकर AFMC में पढ़ाई और फिर सेना की वर्दी पहनने तक का सफर उनके दोनों लक्ष्यों को एक साथ पूरा करने की मिसाल बन गया।

परिवार में लंबे समय से जुड़ी है सैन्य सेवा

दिए गए कंटेंट में परिवार की सैन्य विरासत का विस्तृत उल्लेख भी है। हालांकि, इसमें भानवी शेखावत की कहानी के साथ तुन्मय शुक्ला और शुक्ला परिवार की अलग Success Story का कंटेंट भी शामिल है। इसलिए दोनों कहानियों के तथ्यों को एक साथ मिलाना उचित नहीं होगा।

तुन्मय शुक्ला से जुड़ी जानकारी के अनुसार, उनके परिवार की सैन्य सेवा 1841 से चली आ रही है और वह पांचवीं पीढ़ी के रूप में भारतीय सेना में शामिल होने जा रहे हैं। उनके परिवार में हवलदार कर्ता राम शुक्ला, नायक हरि नारायण शुक्ला, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीनिवास शुक्ला और कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला ने सेना में सेवा की है।

भानवी शेखावत की उपलब्धि का मुख्य केंद्र हालांकि उनका अपना सफर है, जिसमें NEET की सफलता, AFMC से MBBS की पढ़ाई और सेना की मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट बनने का लक्ष्य शामिल है।

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