भारत स्वस्तिक यात्रा: कालडी पहुंचे मोरारी बापू, शिव को बताया सृष्टि का आधार

भारत स्वस्तिक यात्रा के दौरान मोरारी बापू आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली कालडी पहुंचे। उन्होंने भगवान शिव को सृष्टि का मूल आधार बताया। जानें यात्रा, उनके संदेश

15 दिवसीय भारत स्वस्तिक यात्रा के दूसरे दिन रविवार को प्रसिद्ध रामकथा वाचक संत मोरारी बापू केरल के कालडी पहुंचे। यहां उन्होंने आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली के दर्शन किए। इस अवसर पर वैदिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया।

Bharat Swastik Yatra: प्रसिद्ध रामकथा वाचक मोरारी बापू अपनी 15 दिवसीय ‘भारत स्वस्तिक यात्रा’ के तहत केरल के कालडि पहुंचे। कन्याकुमारी से उत्तराखंड के केदारनाथ तक प्रस्तावित इस आध्यात्मिक यात्रा के दूसरे दिन उन्होंने आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली के दर्शन किए। इस अवसर पर मोरारी बापू ने भगवान शिव की महिमा, नाम जप के महत्व और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं की एकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भगवान शिव संपूर्ण सृष्टि के मूल आधार हैं और सभी शक्तियों का केंद्र हैं।

आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली पर मोरारी बापू का स्वागत

भारत स्वस्तिक यात्रा के दूसरे दिन रविवार को मोरारी बापू केरल के कालडि पहुंचे। यह स्थान आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है और भारतीय दर्शन तथा आध्यात्मिक इतिहास में इसका विशेष महत्व है। यहां वैदिक परंपराओं, मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किया गया।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि भगवान शिव समस्त सृष्टि के मूल आधार हैं। उनके अनुसार, विभिन्न देवी-देवता महादेव की आराधना करते हैं और उनसे आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं। उन्होंने शिव को समस्त शक्तियों का केंद्र बताते हुए कहा कि सृष्टि का कोई भी पक्ष उनकी परिधि से बाहर नहीं है।

9,000 किलोमीटर की आध्यात्मिक यात्रा

मोरारी बापू की भारत स्वस्तिक यात्रा लगभग 9,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस यात्रा में करीब 900 श्रद्धालु दो विशेष ट्रेनों के माध्यम से उनके साथ शामिल हैं। यात्रा का मार्ग तमिलनाडु के कन्याकुमारी से उत्तराखंड के केदारनाथ तक निर्धारित किया गया है।

इस पहल का उद्देश्य भारत के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों को साझा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के सूत्र में जोड़ना है। यात्रा के दौरान विभिन्न धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों पर पहुंचकर भारतीय परंपराओं, दर्शन और भक्ति के संदेश को सामने रखा जा रहा है। कालडि में यात्रा का पड़ाव विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह आदि शंकराचार्य के जीवन और उनके दार्शनिक योगदान से जुड़ा हुआ है।

नाम जप को लेकर क्या बोले मोरारी बापू?

पूर्णा नदी, जिसे पेरियार के नाम से भी जाना जाता है, के तट पर स्थित कालडि में मोरारी बापू ने नाम जप के महत्व पर भी विचार व्यक्त किए। शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को इस उलझन में नहीं पड़ना चाहिए कि ईश्वर के किस नाम का जाप करना अधिक उचित है।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भगवान के विभिन्न नाम उनके अलग-अलग स्वरूपों और भक्ति की परंपराओं को अभिव्यक्त करते हैं। इसलिए व्यक्ति को अपनी श्रद्धा और पसंद के अनुसार उस नाम का स्मरण करना चाहिए, जिससे उसे आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस हो। मोरारी बापू ने राम नाम के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि राम नाम का जाप स्वयं भगवान शिव से भी जुड़ी भक्ति परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने सहज भाव से नाम स्मरण करने पर जोर दिया और बताया कि भक्ति में संख्या से अधिक महत्व श्रद्धा और निरंतरता का है।

आदि शंकराचार्य के योगदान को किया याद

मोरारी बापू ने आदि शंकराचार्य के ज्ञान और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने अपने दार्शनिक विचारों और यात्राओं के माध्यम से सनातन धर्म की परंपराओं को व्यापक स्तर पर समझने और जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आदि शंकराचार्य भारतीय दर्शन के प्रमुख आचार्यों में गिने जाते हैं। 

अद्वैत वेदांत की परंपरा को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने और विभिन्न धार्मिक-दार्शनिक विचारों के बीच संवाद को बढ़ावा देने के लिए उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त है। उनकी जन्मस्थली कालडि आज भी श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्थान है।

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