भारत-अमेरिका Trade Deal की घोषणा के बाद Kremlin ने स्पष्ट किया कि भारत से रूसी तेल खरीद रोकने का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है। रूस ने India-Russia Strategic Partnership को मजबूत और दीर्घकालिक बताया।
India-Russia Relations: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित Trade Deal के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासतौर पर यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत अब रूस से दूरी बनाने की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद रूस की तरफ से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने इस पूरे मुद्दे को और ज्यादा अहम बना दिया है।
रूस ने साफ किया है कि भारत की तरफ से उसे अब तक ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है कि नई दिल्ली रूसी तेल की खरीद रोकने जा रही है। क्रेमलिन ने यह भी दोहराया है कि भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) बेहद मजबूत है और भविष्य में भी इसे और गहराई देने का इरादा है।
Trump की Trade Deal घोषणा से बढ़ी हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ हुए एक बड़े Trade Agreement का ऐलान किया था। इस समझौते के तहत अमेरिका को भेजे जाने वाले भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात कही गई। बदले में ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से ज्यादा ऊर्जा संसाधन खरीदने पर सहमत हो गया है।
ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। कई विशेषज्ञों ने इसे भारत की विदेश नीति में संभावित बदलाव के रूप में देखा, जबकि कुछ का मानना है कि यह सिर्फ अमेरिकी नजरिया है, न कि भारत की आधिकारिक स्थिति।
Kremlin का जवाब, India से कोई आधिकारिक सूचना नहीं
Trump के बयान के एक दिन बाद रूस की तरफ से प्रतिक्रिया आई। Kremlin के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की ओर से अब तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान या सूचना नहीं मिली है, जिसमें रूसी तेल की खरीद रोकने की बात कही गई हो।
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पेस्कोव ने यह भी कहा कि रूस, अमेरिका और भारत के द्विपक्षीय संबंधों (Bilateral Relations) का सम्मान करता है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस-भारत की उन्नत रणनीतिक साझेदारी मॉस्को के लिए बेहद अहम है और इसे किसी भी सूरत में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
Russia-India Strategic Partnership पर जोर
Kremlin के बयान में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया कि भारत और रूस के रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं। रक्षा, ऊर्जा, कूटनीति और वैश्विक मंचों पर दोनों देशों का सहयोग दशकों पुराना है।
पेस्कोव ने कहा कि रूस, भारत के साथ अपने संबंधों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखता है। मॉस्को की नीति हमेशा यह रही है कि नई दिल्ली के साथ सहयोग को और व्यापक बनाया जाए, न कि उसे सीमित किया जाए।
Ukraine War के बाद बदला Oil Trade का समीकरण
साल 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, जिनका मुख्य उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली आय को कम करना था।
इन प्रतिबंधों के बीच भारत ने रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी कच्चे तेल को बड़े पैमाने पर खरीदा। धीरे-धीरे भारत, समुद्री मार्ग से आने वाले रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया। इससे पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और यूरोप में नाराजगी भी देखने को मिली।
Trump का पुराना आरोप, India पर दबाव
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार भारत पर यह आरोप लगा चुके हैं कि वह रूसी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है। ट्रंप का कहना रहा है कि इससे रूस को आर्थिक ताकत मिलती है और युद्ध लंबा खिंचता है।
हालिया Trade Deal की घोषणा में भी ट्रंप ने इसी मुद्दे को दोहराया। उन्होंने यह दावा किया कि नए समझौते के बाद भारत, रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा।
India की ओर से अभी कोई साफ बयान नहीं
दिलचस्प बात यह है कि भारत सरकार की ओर से अब तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिसमें यह कहा गया हो कि भारत रूस से तेल की खरीद पूरी तरह बंद करने जा रहा है। विदेश नीति से जुड़े जानकारों का मानना है कि भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हित (National Interest) को प्राथमिकता देता है।
भारत ने अब तक यह रुख अपनाया है कि वह वैश्विक दबाव में आकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। सस्ते और स्थिर ऊर्जा स्रोत भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी हैं।










