भारत-अरब बढ़ते रिश्तों से पाकिस्तान में बेचैनी, कमर चीमा ने जताई चिंता

भारत और मिडिल ईस्ट देशों के बढ़ते रिश्तों से पाकिस्तान में बेचैनी, कमर चीमा का बयान। यूएई, ओमान के साथ भारत की रणनीति और कश्मीर मुद्दे पर असर।

भारत और मिडिल ईस्ट देशों के बढ़ते संबंधों से पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ गई है। कमर चीमा का कहना है कि भारत अरब वर्ल्ड में आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ाकर पाकिस्तान को अलग करने की कोशिश कर रहा है।

World News: मिडिल ईस्ट के कई अहम देशों के विदेश मंत्रियों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद पाकिस्तान में बेचैनी साफ दिखाई देने लगी है। इस कूटनीतिक गतिविधि को लेकर पाकिस्तान के जाने-माने एक्सपर्ट कमर चीमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि भारत जानबूझकर अरब वर्ल्ड में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और इसका सीधा असर पाकिस्तान की पोजीशन पर पड़ सकता है। कमर चीमा ने यहां तक कह दिया कि अगर अरब देशों के साथ पाकिस्तान ने अपने रिश्तों को मजबूत नहीं किया तो भारत वहां अपनी बात मनवाने में सफल हो जाएगा।

अरब देशों के भारत दौरे से क्यों घबराया पाकिस्तान

अरब देशों के विदेश मंत्रियों का भारत आना केवल एक डिप्लोमैटिक विजिट नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे स्ट्रेटेजिक शिफ्ट के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान को डर है कि कहीं अरब वर्ल्ड का झुकाव भारत की तरफ पूरी तरह न हो जाए। कमर चीमा ने कहा कि भारत खुद को एक बड़ी मार्केट के रूप में पेश कर रहा है और अरब देशों को इकोनॉमिक फायदे दिखाकर अपने पक्ष में कर रहा है। उनका मानना है कि अगर भारत अरब मार्केट के भीतर गहराई से घुस गया तो वह अपने राजनीतिक और रणनीतिक एजेंडे को भी आगे बढ़ा पाएगा।

कश्मीर मुद्दे पर अरब वर्ल्ड का बदला रुख

कमर चीमा ने कश्मीर के मुद्दे पर भी अरब देशों के बदले हुए रवैये को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि साल 2019 में जब भारत ने आर्टिकल 370 को हटाया था, तब मुस्लिम देशों के संगठन Organization of Islamic Cooperation यानी OIC की तरफ से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई थी। उनके मुताबिक यह साफ संकेत था कि अरब वर्ल्ड अब कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ पहले जैसी मजबूती से खड़ा नहीं है। कमर चीमा का कहना है कि अरब देशों ने अब अपने इकोनॉमिक और स्ट्रेटेजिक इंटरेस्ट को प्राथमिकता देनी शुरू कर दी है।

भारत की रणनीति और पाकिस्तान को अलग करने की कोशिश

पाकिस्तानी एक्सपर्ट का आरोप है कि भारत जानबूझकर अरब देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है ताकि पाकिस्तान को साइडलाइन किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति का फोकस अब वेस्ट एशिया पर साफ दिखाई देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर लगातार इन देशों के साथ संपर्क बढ़ा रहे हैं। इसका असर यह हो रहा है कि पाकिस्तान की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कमजोर पड़ती जा रही है।

आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर का सख्त संदेश

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अरब देशों के सामने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को सीधे तौर पर घेरा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और cross border terrorism पर जीरो टॉलरेंस होना चाहिए। जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि यह केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और खासकर भारत-अरब क्षेत्र के लिए एक साझा खतरा है। इस बयान के बाद पाकिस्तान में यह धारणा और मजबूत हो गई कि भारत अरब वर्ल्ड में अपनी बात मजबूती से रख पा रहा है।

भारत को अरब देशों के साथ क्यों मिल रही सफलता

कमर चीमा ने खुद स्वीकार किया कि भारत की सफलता की सबसे बड़ी वजह उसकी इकोनॉमी और बड़ी मार्केट है। उन्होंने कहा कि इंडिया एक ऐसा देश बन चुका है, जहां अरब देशों को बिजनेस, इन्वेस्टमेंट और मैनपावर के बड़े मौके दिखाई देते हैं। भारत यह समझता है कि अगर वह अरब मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ा लेगा तो राजनीतिक प्रभाव अपने आप बढ़ जाएगा। यही वजह है कि भारत इन देशों के साथ trade, technology और strategic cooperation पर लगातार काम कर रहा है।

यूएई और ओमान के साथ भारत के मजबूत रिश्ते

पाक एक्सपर्ट ने माना कि यूएई और ओमान के साथ भारत के रिश्ते सबसे ज्यादा मजबूत हैं। भारत इन दोनों देशों के साथ Free Trade Agreement कर चुका है, जिससे दोनों पक्षों को आर्थिक फायदा हो रहा है। कमर चीमा का कहना है कि जैसे-जैसे अरब वर्ल्ड में भारत की presence बढ़ेगी, वैसे-वैसे कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की पकड़ कमजोर होती जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले अरब देश भारत के साथ रिश्तों में कश्मीर का सवाल उठाते थे, लेकिन अब उनकी प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं।

आर्टिकल 370 और OIC की चुप्पी

कमर चीमा ने दोहराया कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद अरब देशों या OIC की तरफ से कोई बड़ा विरोध देखने को नहीं मिला। उनके मुताबिक यह पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी थी कि सिर्फ ideological बातों के सहारे अब अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिलेगा। अरब देश अब practical और economic सोच के साथ फैसले ले रहे हैं। यही वजह है कि भारत के साथ उनके रिश्ते लगातार गहरे होते जा रहे हैं।

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