भारत की ग्रोथ से बदले समीकरण, ड्रैगन की बादशाहत को मिली चुनौती

भारत की ग्रोथ से बदले समीकरण, ड्रैगन की बादशाहत को मिली चुनौती

भारत के चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने से वैश्विक संतुलन बदला है। बढ़ती GDP, प्रति व्यक्ति आय और 5 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य ने भारत को निर्णायक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

Business: भारत की अर्थव्यवस्था ने जिस गति से बीते एक दशक में विकास किया है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में भारत के दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद यह साफ हो गया है कि देश अब केवल उभरती हुई ताकत नहीं, बल्कि एक निर्णायक वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में बढ़ चुका है। आर्थिक मोर्चे पर यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आम नागरिक की आय, खपत क्षमता और जीवन स्तर पर भी दिखने लगा है।

दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत का यह स्थान बताता है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक निर्णयों में भारत की भूमिका और मजबूत होने वाली है।

5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का लक्ष्य

मौजूदा अनुमानों के अनुसार भारत 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर (5 Trillion Dollar Economy) की अर्थव्यवस्था बनने के बेहद करीब पहुंच सकता है। यह लक्ष्य लंबे समय से नीति निर्धारकों की प्राथमिकता में रहा है और अब इसके संकेत जमीन पर दिखाई देने लगे हैं।

जिस गति से मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार हुआ है, उसने भारत की GDP को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत को आने वाले दशक की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था मान रही हैं।

चीन के मुकाबले भारत की बदलती स्थिति

हालांकि भारत के पड़ोसी चीन की कुल GDP अभी भी भारत से बड़ी है, लेकिन कई अहम आर्थिक संकेतकों में भारत तेजी से चीन के करीब पहुंच रहा है। खास तौर पर प्रति व्यक्ति आय, घरेलू खपत और मिडिल क्लास के विस्तार के मामले में भारत की रफ्तार कहीं अधिक स्थिर और संतुलित मानी जा रही है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की हालिया रिपोर्ट इस बदलाव की साफ तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार इस दशक के अंत तक भारत ‘Upper-Middle Income’ कैटेगरी में शामिल हो सकता है, जो अब तक सीमित देशों तक सिमटी हुई थी।

प्रति व्यक्ति आय में ऐतिहासिक बदलाव

SBI की रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब 4,000 डॉलर तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि भारत की आय संरचना में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है।

आजादी के बाद भारत को लो-इनकम इकोनॉमी से लोअर-मिडिल इनकम इकोनॉमी बनने में करीब 60 साल लगे। साल 1962 में जहां प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 90 डॉलर थी, वहीं 2007 तक यह बढ़कर 910 डॉलर हो गई। इस दौरान औसतन 5.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो उस समय के हालात को देखते हुए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

तेज रफ्तार में बदली आर्थिक तस्वीर

2007 के बाद भारत की आर्थिक गति में स्पष्ट तेजी देखने को मिली। जहां आजादी के बाद देश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में छह दशक लगे, वहीं 2014 तक यह आंकड़ा दो ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

इसके बाद 2021 तक भारत तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बना और सिर्फ चार वर्षों में 2025 तक ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए चार ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया। इसी उपलब्धि के साथ भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा।

साल दर साल मजबूत होती आमदनी

प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े भी भारत की आर्थिक मजबूती की कहानी कहते हैं। साल 2009 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 1,000 डॉलर तक पहुंची। इसके बाद अगले दस वर्षों में यह दोगुनी होकर 2019 तक 2,000 डॉलर हो गई।

अनुमान है कि 2026 तक यह आंकड़ा 3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगा। इसका सीधा असर देश की खपत क्षमता, मिडिल क्लास के विस्तार और घरेलू बाजार की मजबूती पर पड़ेगा। यही कारण है कि भारत को अब ‘Consumption-Driven Economy’ के रूप में देखा जा रहा है।

चीन और इंडोनेशिया की बराबरी की ओर भारत

SBI का आकलन बताता है कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत आने वाले वर्षों में चीन और इंडोनेशिया के स्तर के करीब पहुंच सकता है। यह स्थिति न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता को दर्शाती है, बल्कि सामाजिक बदलाव की भी कहानी कहती है।

बढ़ती आय का मतलब है बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत सामाजिक ढांचा। यही वह आधार है जो किसी भी देश को दीर्घकालिक वैश्विक शक्ति बनाता है।

मूडीज का भरोसा भारत की ग्रोथ पर

रेटिंग एजेंसी Moody’s ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। मूडीज के अनुसार भारत की मजबूत ग्रोथ औसत घरेलू आय को सीधा समर्थन देगी, जिससे कई सेक्टरों में मांग बढ़ेगी।

खासकर Insurance Sector में इसका असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। मूडीज का मानना है कि तेज आर्थिक विस्तार, बढ़ता डिजिटलीकरण, टैक्स सुधार और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों में प्रस्तावित बदलाव प्रीमियम ग्रोथ को लगातार बढ़ावा देंगे।

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