भारत-खाड़ी गहरे समुद्री ऊर्जा पाइपलाइन पर केंद्र की सफाई, ओमान से किसी परियोजना पर नहीं चल रही बातचीत

केंद्र सरकार ने भारत-खाड़ी डीप-सी ऊर्जा पाइपलाइन की खबरों को खारिज किया। मंत्रालय ने कहा कि ओमान या अन्य खाड़ी देशों से कोई सक्रिय बातचीत नहीं चल रही है।

केंद्र सरकार ने भारत और खाड़ी देशों के बीच प्रस्तावित डीप-सी ऊर्जा पाइपलाइन की खबरों का खंडन किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ओमान या किसी अन्य खाड़ी देश के साथ इस परियोजना पर कोई सक्रिय चर्चा या वार्ता नहीं चल रही है।

नई दिल्ली: भारत सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारत और खाड़ी देशों के बीच एक प्रस्तावित गहरे समुद्री ऊर्जा पाइपलाइन परियोजना पर काम चल रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि गुजरात को ओमान और अन्य खाड़ी देशों से जोड़ने वाली किसी भी गहरे समुद्री ऊर्जा पाइपलाइन पर फिलहाल न तो विचार किया जा रहा है और न ही इस संबंध में किसी स्तर पर आधिकारिक बातचीत चल रही है।

हाल के दिनों में कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू रिपोर्टों में तथाकथित “मिडिल ईस्ट-इंडिया डीपवॉटर पाइपलाइन” (MEIDP) का उल्लेख किया गया था। इन रिपोर्टों में दावा किया गया था कि यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और खाड़ी क्षेत्र से सीधे ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित की जा सकती है। हालांकि, सरकार ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि इस विषय पर कोई सक्रिय प्रस्ताव मौजूद नहीं है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने अटकलों पर लगाया विराम

मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि सरकार ने विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही खबरों का संज्ञान लिया है। बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया कि ओमान या किसी अन्य खाड़ी देश के साथ इस प्रकार की किसी पाइपलाइन परियोजना पर कोई चर्चा, वार्ता या योजना मंत्रालय के स्तर पर नहीं चल रही है।

सरकार ने यह भी कहा कि यह स्पष्टीकरण इसलिए जारी किया गया है ताकि इस विषय को लेकर चल रही अटकलों और भ्रम को समाप्त किया जा सके। मंत्रालय का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी ऐसी खबरें निवेशकों, उद्योग जगत और आम नागरिकों के बीच गलत संदेश पैदा कर सकती हैं, इसलिए तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक था।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति पर बना हुआ है फोकस

हालांकि सरकार ने पाइपलाइन परियोजना से इनकार किया है, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई अन्य रणनीतियों पर लगातार काम कर रहा है। दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों में शामिल भारत अपनी तेल और गैस आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।

खाड़ी क्षेत्र लंबे समय से भारत के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का प्रमुख स्रोत रहा है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और ओमान जैसे देशों के साथ भारत के ऊर्जा संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा और विविधीकरण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

भारत-खाड़ी गहरे समुद्री ऊर्जा पाइपलाइन पर केंद्र की सफाई, ओमान से किसी परियोजना पर नहीं चल रही बातचीत

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि भू-राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो भारत और खाड़ी देशों के बीच ऊर्जा अवसंरचना से जुड़ी नई परियोजनाओं पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि गहरे समुद्री पाइपलाइन का कोई प्रस्ताव सक्रिय एजेंडे में नहीं है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरा भारतीय LNG जहाज

इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत के लिए एक राहतभरी खबर सामने आई है। माल्टा के ध्वज वाला एलएनजी वाहक जहाज ‘DISHA’ सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर चुका है।

यह जहाज लगभग 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर भारत के गुजरात स्थित दहेज बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार जहाज के 18 जून तक भारत पहुंचने की संभावना है।

जहाज का सुरक्षित पारगमन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के सप्ताहों में पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। भारत के लिए LNG आपूर्ति का निर्बाध जारी रहना ऊर्जा बाजारों की स्थिरता के लिहाज से अहम है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सरकार की विशेष नजर

सरकार ने कहा है कि वह विदेश मंत्रालय, विदेशी मिशनों, शिपिंग कंपनियों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है ताकि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

हाल के दिनों में मध्य पूर्व क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा से जुड़े कुछ गंभीर घटनाक्रम सामने आए हैं। विशेष रूप से ओमान तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविकों की मौत ने सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने समुद्री क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नागरिकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने जारी किए नए सुरक्षा निर्देश

समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने जहाजरानी कंपनियों और समुद्री भर्ती एजेंसियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इन निर्देशों के तहत कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे अगले आदेश तक संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय नाविकों की तैनाती को सीमित रखें। साथ ही खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य और उससे सटे समुद्री क्षेत्रों में संचालित जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

जहाजों के कप्तानों से कहा गया है कि वे सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी चेतावनियों, नौवहन संबंधी परामर्श और जोखिम मूल्यांकन रिपोर्टों पर लगातार नजर रखें। इसके अलावा जहाज सुरक्षा योजनाओं और कंपनी सुरक्षा प्रक्रियाओं को पूरी तरह लागू करने पर भी जोर दिया गया है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर

पश्चिम एशिया दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।

भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है। इसी कारण सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकतानुसार सुरक्षा तथा ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े कदम उठा रही है।

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