भारत ने जारी की पहली एंटी-टेरर पॉलिसी ‘PRAHAAR’, सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम, जानें इसकी खासियत

भारत ने जारी की PRAHAAR एंटी-टेरर पॉलिसी। आतंकवाद, साइबर और CBRNED खतरों से निपटने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों को मजबूत किया जाएगा।

भारत ने गृह मंत्रालय के तहत पहली एंटी-टेरर पॉलिसी PRAHAAR जारी की। यह नीति आतंकवाद, साइबर खतरों, CBRNED और सीमा पार खतरों से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों को सशक्त बनाएगी।

नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने भारत की पहली पूरी एंटी-टेरर पॉलिसी ‘PRAHAAR’ जारी कर दी है। यह नीति देश में आतंकवाद, साइबर हमलों और क्रॉस बॉर्डर खतरों से निपटने के लिए तैयार की गई है। पॉलिसी का उद्देश्य भारत को आने वाले आतंकवादी खतरों से सुरक्षित करना और इस दिशा में सरकारी एजेंसियों की तैयारियों को सशक्त बनाना है।

‘PRAHAAR’ नीति में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी खास धर्म, नस्ल, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता है। इसके तहत यह समझाया गया है कि टेरर ग्रुप तेजी से ऑर्गेनाइज़्ड क्रिमिनल नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि वे लोग भर्ती कर सकें और अपने ऑपरेशन को अंजाम दे सकें।

सीमा पार आतंकवाद

पॉलिसी में यह भी कहा गया है कि भारत को जमीन, पानी और हवा के जरिए विभिन्न आतंकवादी खतरे लगातार प्रभावित कर रहे हैं। गृह मंत्रालय ने बताया कि ग्लोबल टेरर ग्रुप्स जैसे अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) ने भारत में स्लीपर सेल और नेटवर्क के माध्यम से हिंसा भड़काने की कोशिशें की हैं। इसके अलावा दूसरे देशों से जुड़े चरमपंथियों ने भी देश में आतंकवाद फैलाने की योजनाएं बनाई हैं।

PRAHAAR पॉलिसी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आतंकवादी फंडिंग और ऑपरेशनल गाइडेंस के लिए सोशल मीडिया, इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन, एन्क्रिप्शन टूल, क्रिप्टो वॉलेट और डार्क वेब का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते एनॉनिमस एक्टिविटी और डिजिटल माध्यमों के जरिए खतरे और बढ़ गए हैं।

CBRNED और हाईटेक खतरे

पॉलिसी में CBRNED यानी केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव और डिजिटल मैटीरियल से जुड़े खतरे भी शामिल किए गए हैं। गृह मंत्रालय ने बताया कि इन खतरों का इस्तेमाल आतंकवादी समूह कर सकते हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बढ़ जाती है। इसके अलावा ड्रोन और रोबोटिक्स का गलत इस्तेमाल भी चिंता का विषय है।

इसमें यह भी कहा गया है कि विदेशी और घरेलू गैर-राज्यिक एक्टर्स जानलेवा मकसदों के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे उपकरणों के दुरुपयोग से देश की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

युवाओं का रेडिकलाइजेशन

PRAHAAR में युवाओं के रेडिकलाइजेशन का भी जिक्र किया गया है। आतंकी संगठन भारतीय युवाओं को भर्ती करने की कोशिशें जारी रखते हैं। गृह मंत्रालय ने बताया कि पहचान होने पर ग्रेडेड कार्रवाई की जाती है। साथ ही सामाजिक और धार्मिक नेताओं, मॉडरेट प्रचारकों और NGOs की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। ये संस्थाएं युवाओं में चरमपंथ और हिंसा के परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाने में जुटी हैं।

क्षेत्रीय सहयोग

पॉलिसी में यह भी कहा गया है कि ट्रांसनेशनल आतंकवाद से निपटने के लिए केवल राष्ट्रीय उपाय पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग जरूरी है। विदेश में मौजूद ग्रुप्स अब हमले करने के लिए स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और इलाके की जानकारी पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। इसलिए विदेश नीति और खुफिया सहयोग को मजबूत करना भी आवश्यक है।

डिजिटल खतरों पर फोकस

PRAHAAR पॉलिसी में साइबर सुरक्षा को लेकर भी चेतावनी दी गई है। क्रिमिनल हैकर्स और डिजिटल हमलावर आतंकवादी संगठनों के लिए लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल प्लानिंग में मदद कर रहे हैं। गृह मंत्रालय ने कहा कि डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन नेटवर्क की निगरानी, साइबर सुरक्षा नियमों का पालन और तकनीकी सॉल्यूशंस के जरिए खतरे कम किए जा सकते हैं।

Leave a comment