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भारत ने रूस के साथ-साथ क्यों बढ़ाया अमेरिका से तेल आयात? जानिए पूरा मामला

भारत ने रूस के साथ-साथ क्यों बढ़ाया अमेरिका से तेल आयात? जानिए पूरा मामला

भारत ने रूस के साथ-साथ अमेरिका से भी तेल खरीद बढ़ा दी है। ट्रंप सरकार की टैरिफ नीतियों और सस्ते दामों का फायदा उठाते हुए भारतीय रिफाइनरियां अमेरिकी क्रूड ऑयल पर फोकस कर रही हैं। जून तिमाही में अमेरिका से आयात 114% बढ़ा है। इससे भारत को लागत कम करने और व्यापार घाटा घटाने में मदद मिलेगी।

 India increased oil purchases: भारत ने हाल ही में रूस के साथ-साथ अमेरिका से भी कच्चे तेल की खरीद तेज कर दी है। ट्रंप के टैरिफ दबाव और आर्बिट्रेज विंडो खुलने के बाद भारतीय रिफाइनरियां अमेरिकी क्रूड ऑयल आयात कर रही हैं। जून तिमाही में भारत का अमेरिकी तेल आयात पिछले साल की तुलना में 114% बढ़ा, जबकि रूस अब भी सबसे बड़ा सप्लायर बना रहा। IOC, BPCL और रिलायंस जैसी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर अमेरिकी बैरल खरीदे। यह कदम भारत के ऊर्जा भंडार को विविध बनाने, सस्ती आपूर्ति हासिल करने और अमेरिका के साथ व्यापार घाटा घटाने की कोशिश का हिस्सा है।

क्यों बढ़ी अमेरिका से खरीद

भारतीय रिफाइनरियों ने जून तिमाही में अमेरिकी तेल की ओर खासा रुख किया है। अमेरिका से कच्चे तेल की खरीदारी पिछले साल की तुलना में इस बार 114 प्रतिशत तक बढ़ गई है। जून महीने में भारत ने करीब 4.55 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया। इसमें रूस की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही लेकिन अमेरिका ने भी 8 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की। इसका कारण है कि एशियाई बाजारों के लिए अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतें प्रतिस्पर्धी हो गईं। यही वजह है कि भारत के साथ-साथ कई एशियाई देशों ने अमेरिका से तेल खरीदना तेज कर दिया।

कंपनियों ने बढ़ाया ऑर्डर

इस बदलाव के तहत भारतीय कंपनियों ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में ऑर्डर दिए हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने पांच मिलियन बैरल, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) ने दो मिलियन बैरल और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने विटोल से दो मिलियन बैरल तेल खरीदा है। इसके अलावा यूरोप की कंपनियों जैसे गनवोर, इक्विनोर और मर्कुरिया ने भी भारतीय कंपनियों को अमेरिकी तेल की आपूर्ति की है।

रूस से खरीद जारी

गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका से खरीद बढ़ाने के बावजूद भारत ने रूस से तेल आयात कम नहीं किया है। रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है। भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल की कीमतें भी आकर्षक हैं। रूस से मिलने वाले डिस्काउंटेड ऑयल की वजह से भारत को ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में राहत मिल रही है। हालांकि अमेरिका की ओर से बढ़ते दबाव को देखते हुए भारत ने संतुलन बनाने के लिए अमेरिकी तेल पर भी जोर देना शुरू कर दिया है।

सिर्फ अमेरिका और रूस ही नहीं, बल्कि भारत अब दूसरे देशों से भी कच्चे तेल की खरीद पर ध्यान दे रहा है। BPCL ने हाल ही में नाइजीरिया के यूटापेट क्रूड की पहली बार खरीद की है। यह दिखाता है कि भारत अपने तेल भंडार को विविध बनाने की रणनीति अपना रहा है। अलग-अलग ग्रेड के तेल खरीदकर भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना चाहता है।

अमेरिका का दबाव 

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर दबाव बनाया है। इसके अलावा टैरिफ 50 प्रतिशत तक बढ़ाकर भारत को संकेत दिया गया है कि उसे अमेरिका से खरीदारी बढ़ानी होगी। ऐसे में भारत ने एक संतुलित रास्ता चुना है। रूस से सस्ता तेल खरीद जारी रखते हुए अमेरिका से भी पर्याप्त मात्रा में आयात किया जा रहा है। इस रणनीति से भारत का व्यापार घाटा कम होगा और दोनों देशों के साथ रिश्ते बेहतर बने रहेंगे।

एशिया में खुली नई खिड़की

अमेरिकी क्रूड ऑयल के लिए एशियाई बाजारों में एक तरह की आर्बिट्रेज विंडो खुल गई है। यानी यहां दाम इतने आकर्षक हो गए हैं कि खरीददारों को फायदा हो रहा है। भारत समेत कई एशियाई देशों की रिफाइनरियां इस मौके का फायदा उठा रही हैं। भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि देश को दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता के तौर पर लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करनी होती हैं।

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