भारत नहीं, अगले 12 महीनों में इन 7 ग्लोबल मार्केट्स में शिफ्ट होगा निवेश, मार्क फैबर की बड़ी चेतावनी

मार्क फैबर के अनुसार 2026 में विदेशी निवेश भारत से हटकर इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, हांगकांग, ब्राजील, कोलंबिया और चिली में जाएगा। इन देशों के बाजार बेहतर

मार्क फैबर का कहना है कि 2026 में विदेशी निवेश भारत से हटकर इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, हांगकांग, ब्राजील, कोलंबिया और चिली में बढ़ सकता है। उनके अनुसार इन देशों के बाजार सस्ती वैल्यू और बेहतर संभावनाओं के कारण निवेशकों को आकर्षित करेंगे।

Share Market: 2025 उतार-चढ़ाव से भरा रहा है और अब दुनिया भर के बाजार 2026 की तैयारी में जुटे हैं। इसी बीच द ग्लूम बूम एंड डूम रिपोर्ट के संपादक मार्क फैबर ने विदेशी निवेश के रुख पर बड़ा बयान दिया है। बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में उन्होंने बताया कि अगले साल भारत की बजाय विदेशी निवेश इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, हांगकांग, ब्राजील, कोलंबिया और चिली की ओर बढ़ सकता है। उनके अनुसार इन देशों के बाजार 2026 में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

अमेरिका में शुल्क बढ़ने से क्या नए संकट पैदा होंगे

फैबर का मानना है कि अमेरिका में शुल्क बढ़ने का असर सबसे खराब वहीं की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। शुल्क के कारण महंगाई बढ़ सकती है और उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ेगा। फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती कर सकता है लेकिन लंबी अवधि की ब्याज दरें जरूरी नहीं कि कम हों। बॉन्ड मार्केट भी ब्याज दरों में कटौती का स्वागत न करे तो लंबी अवधि की दरें उल्टा बढ़ सकती हैं, जिससे शेयर बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

बाजार जोखिमों को पहचान पा रहे हैं या नहीं

फैबर ने कहा कि वर्तमान समय में शेयर बाजार बॉन्ड बाजार से बेहद प्रभावित है। बॉन्ड की कीमतों में गिरावट और ब्याज दरों में बढ़ोतरी शेयर बाजार के लिए खराब संकेत हैं। अमेरिका में शेयर कीमतें पहले से ही ऊंचाई पर हैं और अगर ब्याज दरें अपेक्षित रूप से कम नहीं होतीं तो अमेरिकी बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। यह स्थिति वैश्विक निवेश प्रवाह को भी प्रभावित कर सकती है।

क्या AI कंपनियों का तेज दौर कमजोर

फैबर ने स्पष्ट कहा कि AI सेक्टर का महत्व खत्म नहीं हुआ है लेकिन इस क्षेत्र के शेयर पहले से ही काफी महंगे हो चुके हैं। निवेशक बड़ी उम्मीदों के साथ इन कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं लेकिन कीमतें भविष्य की सफलता को पहले ही मानकर चल रही हैं। फैबर को इसमें साल 2000 वाले इंटरनेट बुलबुले की झलक दिखती है जब तकनीक सही थी लेकिन कीमतें यथार्थ से दूर थीं और बाद में भारी गिरावट आई थी।

2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के जोखिम

फैबर ने 2026 के लिए कई आर्थिक और राजनीतिक जोखिम चिन्हित किए हैं। पश्चिमी देशों की सामाजिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। दुनिया भर में भूराजनैतिक तनाव बढ़ रहा है जैसे पश्चिम एशिया, वेनेजुएला और यूक्रेन। साथ ही, कई देशों की सरकारों का कर्ज बड़ा है और यही स्थिति भविष्य के लिए खतरा पैदा कर सकती है। कर्ज के बढ़ते बोझ से सरकारें मुद्रा छापने की ओर जाती हैं जिससे महंगाई बढ़ती है और मुद्राओं की वास्तविक कीमत घटती जाती है। उनके अनुसार दुनिया सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक तीनों स्तर पर अस्थिर दिशा की ओर बढ़ रही है।

क्या उभरते बाजार विकसित देशों को पीछे छोड़ सकते हैं

पिछले लगभग 15 वर्षों से उभरते बाजार अमेरिकी बाजार से कमजोर रहे हैं। हालांकि फैबर का मानना है कि अब समय बदल सकता है। लैटिन अमेरिका और दक्षिण पूर्व एशिया के कई देश आने वाले वर्षों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उनकी नजर में भारत दीर्घकाल में अमेरिका से बेहतर कर सकता है लेकिन अगले 12 महीने भारतीय बाजार के लिए उतने अनुकूल नहीं दिखते।

भारतीय बाजार की मौजूदा स्थिति

फैबर का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार की तेजी उन्हें चौंकाती नहीं है। रुपये के लिहाज से भारतीय बाजार ऊपर गया है लेकिन डॉलर के हिसाब से वह नीचे है। सितंबर 2024 के बाद से भारतीय बाजार डॉलर के संदर्भ में नई ऊंचाई नहीं छू पाया है। सोने और चांदी के संदर्भ में भी भारतीय बाजार कमजोर दिखाई देता है। इससे निवेशकों को यह समझना चाहिए कि स्थानीय स्तर की तेजी हमेशा वैश्विक तुलना में मजबूत प्रदर्शन नहीं दर्शाती।

अगले साल भारत में निवेशकों को क्या उम्मीद रखनी चाहिए

फैबर का अनुमान है कि भारत अगले 12 महीनों में निवेशकों को बहुत अच्छे रिटर्न नहीं दे पाएगा। डॉलर के आधार पर भारतीय बाजार पिछले 12 महीनों में नीचे है जबकि ब्राजील 55 प्रतिशत ऊपर है। कई अन्य देश भी भारत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि भारत फिलहाल महंगे मूल्य स्तर पर खड़ा है और विदेशी निवेशक अन्य सस्ते और आकर्षक बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं।

2026 में विदेशी निवेश किन देशों में जाएगा

फैबर ने कहा कि 2026 में इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, हांगकांग, ब्राजील, कोलंबिया और चिली बड़े निवेश आकर्षित कर सकते हैं। इन देशों में बाजार सस्ते मूल्य पर उपलब्ध हैं और विकास की संभावनाएं भी बेहतर हैं। फैबर का दावा है कि भारत के लिए अगले 12 महीने चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं क्योंकि यहां कीमतें ऊंचाई पर हैं और भूराजनैतिक तनाव भी निवेशकों को सतर्क कर रहा है।

क्या वैश्विक बाजार कमजोर रहेंगे

फैबर का मानना है कि दुनिया के अधिकांश शेयर बाजार अगले साल दमदार प्रदर्शन नहीं करेंगे। कुछ देशों में विशेष अवसर जरूर मिल सकते हैं जैसे थाईलैंड के कुछ बैंक अच्छे डिविडेंड ऑफर कर रहे हैं। लेकिन किसी एक सेक्टर पर दांव लगाकर वैश्विक रणनीति नहीं बनाई जा सकती। वह यह भी कहते हैं कि डॉलर, यूरो और रुपया जैसी कागजी मुद्राएं अपनी वास्तविक कीमत खोती जा रही हैं। अगर बाजारों को सोने या चांदी में मापा जाए तो वे कमजोर ही दिखाई देंगे।

फैबर पिछले 30 वर्षों से भारतीय निवेशकों को सोना और चांदी रखने की सलाह देते आए हैं। उनके अनुसार कागजी मुद्रा समय के साथ अपनी खरीदारी क्षमता खो देती है जबकि सोना और चांदी लंबे समय में मूल्य सुरक्षित रखते हैं। भारत में आज कोई भी ऐसा सामान नहीं है जो 30 साल पहले से सस्ता हुआ हो। वह मानते हैं कि सुरक्षित धन रखने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि कुछ हिस्सा सोने, चांदी या प्लेटिनम में जरूर रखा जाए।

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