पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 'बाबरी मस्जिद' की तर्ज पर मस्जिद की आधारशिला रखी, जिसे लेकर पूरे देश में चर्चा और विरोध शुरू हो गया।
Babri Masjid Controversy: भोपाल में बाबरी मस्जिद की नींव को लेकर भारी विवाद देखने को मिला। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मस्जिद की आधारशिला रखने के बाद इस मामले ने देशभर में तूल पकड़ लिया। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में श्री हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मस्जिद का नाम विदेशी शासक बाबर के बजाय देशभक्त मुस्लिम महापुरुषों के नाम पर रखा जाना चाहिए।
विरोध प्रदर्शन का माहौल
भोपाल के 2 नंबर स्टॉप पर आयोजित प्रदर्शन में संगठन के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जमा हुए। उन्होंने नारों और बैनरों के जरिए अपनी मांग जताई। प्रदर्शनकारियों ने जोर देकर कहा कि बाबर, जिन्हें उन्होंने ‘विदेशी आक्रांता’ बताया, ने भारत में हजारों मंदिरों को तोड़ा था, इसलिए उसके नाम पर मस्जिद का निर्माण स्वीकार्य नहीं।
संगठन के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा, अगर मस्जिद बनानी है तो इसका नाम डॉ. अब्दुल कलाम या अशफाकउल्ला खान जैसे देशभक्त मुस्लिम महापुरुषों के नाम पर होना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने एक विवादास्पद पोस्टर भी साथ लाया, जिस पर लिखा था: ‘बाबर के नाम वाला शौचालय’। उनका इरादा इसे सार्वजनिक शौचालय परिसर में लगाने का था। हालांकि, पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और पोस्टर को जब्त कर लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की भी हुई।
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पुलिस और QRF की तैनाती
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, भोपाल पुलिस ने क्विक रिस्पांस फोर्स (QRF) के 40 से अधिक जवान समेत भारी पुलिस बल तैनात किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को काबू में रखा और स्थिति को नियंत्रित किया। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के विवादों में त्वरित कार्रवाई करना आवश्यक होता है ताकि सामाजिक तनाव और हिंसा को रोका जा सके।
इस विवाद की जड़ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई घटना से जुड़ी है। टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मस्जिद की आधारशिला रखी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल देने से मना कर दिया, जिसके बाद कबीर ने इसे अपना संवैधानिक अधिकार बताया। उनके इस कदम ने पूरे देश में धार्मिक और राजनीतिक बहस को जन्म दिया।










