बिहार बजट सत्र में बड़ा फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा कैशलेस इलाज

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में राज्य सरकार ने विधायकों और सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस इलाज देने का ऐलान किया। इस फैसले से करीब 10 लाख कर्मचारी लाभान्वित होंगे।

बिहार बजट सत्र के दौरान सरकार ने विधायकों और सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस इलाज देने का फैसला किया। इससे करीब 10 लाख कर्मचारी और उनके आश्रित लाभान्वित होंगे। रीइंबर्समेंट सिस्टम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

Patna: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक अहम और दूरगामी फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने ऐलान किया है कि अब बिहार के विधायकों, विधान पार्षदों और सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी। इस फैसले से राज्य के करीब 10 लाख कर्मचारी और उनके आश्रित सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। सरकार का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा देने और इलाज के दौरान आर्थिक बोझ कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सदन में सवालों के बीच हुआ एलान

यह घोषणा विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान हुई। बीजेपी विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने सदन में सरकारी कर्मचारियों के इलाज की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अभी रीइंबर्समेंट सिस्टम लागू है, जिसमें पहले कर्मचारी को इलाज का खर्च खुद उठाना पड़ता है और बाद में कागजी प्रक्रिया के जरिए पैसा वापस मिलता है। यह व्यवस्था न सिर्फ समय लेने वाली है, बल्कि कई बार कर्मचारियों के लिए आर्थिक रूप से भी मुश्किल बन जाती है।

विधायकों के दबाव में सरकार

राघवेंद्र प्रताप सिंह की मांग पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पहले यह कहा कि इस विषय पर बैठक कर फैसला लिया जाएगा। इस पर जाले से बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जब पूरी सरकार सदन में मौजूद है, तो बैठक की जरूरत क्यों। विधायकों के लगातार दबाव के बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सदन में ही कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा देने का एलान कर दिया।

10 लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगा लाभ

सरकार के इस फैसले से विधायकों, विधान पार्षदों और सभी सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ उनके आश्रितों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। अनुमान के मुताबिक इससे करीब 10 लाख से अधिक लोग कवर होंगे। इसका मतलब यह है कि अब इलाज के समय कर्मचारियों को जेब से पैसा नहीं देना होगा और सरकारी सूचीबद्ध अस्पतालों में सीधे इलाज की सुविधा मिलेगी।

रीइंबर्समेंट सिस्टम से बड़ी राहत

अब तक बिहार में सरकारी कर्मचारियों के लिए इलाज की व्यवस्था रीइंबर्समेंट आधारित थी। कर्मचारी को पहले अस्पताल में पूरा भुगतान करना पड़ता था और बाद में फाइल प्रक्रिया के जरिए राशि वापस मिलती थी। कई बार कागजी अड़चनों और देरी के कारण कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ती थी। कैशलेस सिस्टम लागू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी और इलाज ज्यादा आसान और सुलभ बन सकेगा।

एक हफ्ते में बैठक और पॉलिसी की तैयारी

डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सदन में यह भी भरोसा दिलाया कि कैशलेस इलाज की व्यवस्था को लागू करने के लिए एक सप्ताह के भीतर बैठक की जाएगी। इसमें यह तय किया जाएगा कि किन अस्पतालों को इसमें शामिल किया जाएगा और प्रक्रिया किस तरह से लागू होगी। सरकार का कहना है कि इसे जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जाएगा ताकि कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

PPP मोड में बनेंगे नए मेडिकल कॉलेज

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने एक और बड़ा एलान किया है। बिहार में अब नए मेडिकल कॉलेज PPP यानी Public Private Partnership मॉडल पर बनाए जाएंगे। विधायक आईपी गुप्ता के सवाल के जवाब में डिप्टी सीएम ने बताया कि राज्य सरकार इसके लिए नई पॉलिसी तैयार कर रही है, जिसका जल्द ही आधिकारिक एलान किया जाएगा।

डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी चुनौती

सरकार ने माना कि बिहार में डॉक्टरों की भारी कमी है और यही वजह है कि कई मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। सम्राट चौधरी ने बताया कि बेतिया और मधेपुरा जैसे मेडिकल कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद भी डॉक्टर वहां ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। इसी समस्या को देखते हुए PPP मॉडल अपनाने का फैसला लिया गया है।

प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक की तैयारी

डिप्टी सीएम ने यह भी संकेत दिए कि सरकार सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए भी नई पॉलिसी बना रही है। सरकार का मानना है कि अगर सरकारी डॉक्टर पूरी तरह से सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दें, तो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

CHC को लेकर सवाल

विधानसभा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी CHC को लेकर भी सवाल उठे। बीजेपी विधायक नीतीश मिश्रा ने CHC में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्टाफ की संख्या को लेकर सवाल किया। प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी के जवाब से सदन में कुछ देर के लिए ठहाके भी लगे। स्थिति को संभालते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि वर्ष 2025 में पद स्वीकृत किए गए हैं और जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता

लगातार सवालों और विपक्ष के दबाव के बीच सरकार ने साफ किया कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार उसकी प्राथमिकता है। कैशलेस इलाज, PPP मोड में मेडिकल कॉलेज और डॉक्टरों की कमी दूर करने जैसे फैसले इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से आने वाले समय में बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

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