बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और एनडीए की प्रचंड जीत से उत्पन्न दबाव के बीच प्रदेश के कांग्रेस नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और शीर्ष नेता राहुल गांधी से मुलाकात का समय मांगा है।
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा और एनडीए की प्रचंड जीत ने न केवल बिहार की राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि इसका असर उत्तराखंड की कांग्रेस इकाई तक साफ दिखाई दे रहा है। भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके चलते कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात का समय मांगा है। नेताओं की मंशा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर गंभीर चर्चा करने की है।
बिहार की जीत बनी कांग्रेस के लिए चेतावनी
बिहार चुनाव में भाजपा की विजय ने कांग्रेस नेतृत्व को झकझोर दिया है। उत्तराखंड कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि यदि अभी से चुनावी तैयारी और संगठन मजबूत नहीं किया गया, तो 2027 में पार्टी के लिए हालात और कठिन हो सकते हैं। पार्टी के अंदर यह महसूस किया जा रहा है कि भाजपा की लगातार चुनावी सफलताएँ कांग्रेस के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं, खासकर तब जब पिछले एक दशक से उत्तराखंड में कांग्रेस किसी निर्णायक जीत के लिए संघर्ष कर रही है।
हाल ही में उत्तराखंड कांग्रेस में हुए संगठनात्मक फेरबदल ने भी पार्टी के अंदर हलचल बढ़ा दी है। जिलाध्यक्षों की नई सूची को लेकर कई जगहों पर विरोध सामने आया है। पार्टी हाईकमान ने यह बदलाव 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया है, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह फेरबदल बिना पर्याप्त संवाद और जमीनी आकलन के किया गया है।
बिहार परिणामों के बाद यह असंतोष और स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है। कांग्रेस नेता अब चाहते हैं कि हाईकमान तुरंत हस्तक्षेप करे और संगठन की कमियों, चुनावी रणनीति और आगामी चुनौतियों पर चर्चा की जाए।
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12 से अधिक वरिष्ठ नेता हाईकमान से मिलना चाहते हैं
इस पूरे घटनाक्रम के बीच उत्तराखंड कांग्रेस के लगभग 12 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व से मुलाकात का समय मांगा है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर उन्होंने कांग्रेस के राज्य सह प्रभारी सुरेंद्र शर्मा से विस्तृत बातचीत की है। संदेश यह है कि उत्तराखंड के नेता बिहार परिणामों को गंभीरता से लेते हुए भविष्य की रणनीति पर चर्चा करना चाहते हैं, ताकि उसी स्थिति की पुनरावृत्ति उत्तराखंड में न हो। जिन नेताओं ने मुलाकात का समय मांगा है, उनमें शामिल हैं:
- पूर्व सांसद महेंद्र सिंह पाल
- पूर्व सांसद ईसम सिंह
- एआईसीसी सदस्य एवं पूर्व मंत्री ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी
- विधायक तिलक राज बेहड़
- विधायक मदन बिष्ट
- पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी
- प्रदेश कांग्रेस महामंत्री एवं पूर्व राज्य मंत्री मकबूल अहमद
- पूर्व अल्पसंख्यक विभाग अध्यक्ष हाजी सलीम खान
- ओबीसी विभाग के पूर्व अध्यक्ष आशीष सैनी
- प्रवक्ता सूरज नेगी
- प्रदेश कांग्रेस सचिव हाजी राव मुन्ना
ये सभी नेता एक ही बात पर एकमत हैं कि पार्टी को 2027 चुनाव को लेकर तुरंत अपनी दिशा और रणनीति स्पष्ट करनी चाहिए। धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से भी बातचीत की है। रावत ने कहा कि हाईकमान से रणनीतिक बातचीत करना बिल्कुल आवश्यक है — “परामर्श लेने में कोई हानि नहीं है।” उन्होंने कांग्रेस के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा से भी संपर्क किया। हालांकि माहरा ने अपनी बातचीत का विवरण साझा करने से इनकार कर दिया।









